GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 7 सोच अपनी-अपनी

Gujarat Board GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 7 सोच अपनी-अपनी Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

Gujarat Board Textbook Solutions Class 8 Hindi Chapter 7 सोच अपनी-अपनी

नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। फिर उन पर आधारित प्रश्नों पर कक्षा में वाद-विवाद करवाइए :
GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 7 सोच अपनी-अपनी 1

(1) दोनों चित्रों में क्या अंतर है?
उत्तर :
दोनों चित्रों में से एक चित्र गाँव का और दूसरा नगर का है। गाँव के चित्र में नदी है। उसके घाटों पर नहाते, कपड़े धोते, पानी भरते और काम करते लोग हैं। गाँव में कच्चे घर हैं। लोग मामूली कपड़े पहने हुए हैं। लेकिन गाँव में बड़ी शांति का वातावरण है। नगर के चित्र में चौड़ी और दो तरफा सड़क है। पक्के मकान हैं, सड़क पर वाहन चल रहे हैं। वाहनों के कारण शोर है। लोग आधुनिक वेशभूषा में है।

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(2) गाँव तथा नगर के जीवन में क्या अंतर है और तुम्हें कौन-सा जीवन रुचिकर लगता है? क्यों?
उत्तर :
गाँव के जीवन में सादगी सरलता है। किसी तरह की बनावट और तड़क-भड़क नहीं है। लोग शांति से अपने-अपने काम करते हैं। नदी-कुएँ का पानी पीते हैं। वे अपने खेतों में उगाया अनाज तथा ताजी सब्जियाँ खाते हैं। लोग कच्चे घरों में रहते हैं, पर उनका जीवन प्रकृति के बहुत नजदीक होता है।

नगर के जीवन में तड़क-भड़क और बनावट अधिक होती है। लोग आधुनिक और फैशनेबल कपड़े पहनते हैं। वे पक्के मकानों में रहते हैं। वे नल का पानी पीते हैं और बाजार से अनाज तथा फल-सब्जी खरीदकर खाते हैं। नगर की सड़कों पर वाहनों का हमेशा शोर होता है। लोग दूकानों, बैंकों और दफ्तरों में काम करते हैं। नगर के जीवन में शांति नहीं होती।

लोगों का जीवन प्रकृति से बहुत दूर होता है। नगर के जीवन में अनेक दोष हैं, फिर भी मुझे यहाँ का जीवन ही पसंद है। यहाँ के लोग शिक्षित और प्रगतिशील होते हैं। नगर में अच्छे स्कूल और कॉलेज होते हैं। इनके कारण मनपसंद शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की जा सकती हैं। अनेक संस्थाएँ, पुस्तकालय आदि व्यक्ति की योग्यता बढ़ाने में सहायक होते हैं। उन्नति के जितने अवसर नगर में हैं, उतने गाँव में नहीं, इसलिए मुझे नगरीय जीवन ही रुचिकर लगता है।

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(3) क्या तालाब का जल पीने के लिए योग्य है? यदि नहीं, तो क्यों?
उत्तर :
तालाब का जल पीने के लिए योग्य नहीं होता।। तालाब चारों ओर से बंद होता है। उसमें चारों ओर से बाहर की धूल-मिट्टी गिरती है। पेड़ों के पत्ते गिरकर सड़ते रहते हैं। लोग तालाब के किनारे कपड़े धोते हैं और जानवरों को नहलाते हैं। यह सारी गंदगी तालाब के जल को दूषित कर देती है। यह दूषित जल पीने से हैजा, पेचिश आदि तरह-तरह की जानलेवा बीमारियाँ होने की पूरी संभावना रहती है। इसलिए तालाब का जल पीने के योग्य नहीं होता।

चित्रों पर आधारित प्रश्नों के आधार पर कक्षाकक्ष में वाद-विवाद :

बकुल : नगर अपने पक्के और आलीशान मकानों, पक्की सड़कों और वाहनों पर कितना भी गर्व करें, लेकिन सच तो यही है कि जो सुख-शांति ग्रामीण जीवन में है, वह नगर में नहीं मिल सकती। सुबह उठो, उगते हुए सूर्य के दर्शन करो और दिल लगाकर अपने खेतों में काम करो। ताजा अनाज, ताजा फले और ताजी सब्जियाँ खाओ। सूर्यास्त होते ही घर में आकर सबसे मिलो, बातें करो। गाँव की बैठक में दिलचस्प चर्चाएँ करो। यह है गाँव का आनंद, यह है गाँव की मस्ती। मेलों में जाओ, बैलगाड़ी-साइकिल की सवारी का रस लूटो। जीवन का यह रस शहरों में कहाँ नसीब हो सकता है। वहाँ तो सब कुछ नकली, बनावटी। चौबीस घंटे अशांति ही अशांति, भागमभाग! यह कोई जीवन है!

सुहास : वाह रे गाँव के भक्त! इस इक्कीसवीं सदी में भी यह पिछड़ापन ! नगर हमारे जीवन की प्रगति के परिचायक हैं। हमारी सभ्यता के प्रतीक हैं। वैज्ञानिक सभ्यता के फलने-फूलने का अवसर नगरों में ही मिलता है। नगरों की भाग-दौड़ यहाँ के गतिशील जीवन की सूचक है। नगरों का शोरगुल यहाँ की जिंदादिली का सबूत है। यहाँ के तमाम स्कूल, कॉलेज, इन्स्टिट्यूट्स हमारी योग्यता को बढ़ाने में लगे रहते हैं। बुद्धि-प्रतिभा की चमक-दमक नगरों में ही देखी जा सकती है। मुझे तो अपनी मुंबई सबसे अच्छी लगती है।

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प्रश्न 2.
नीचे दिए हुए मुद्दों के आधार पर ‘विज्ञान वरदान या अभिशाप’ इस विषय पर कोई एक पक्ष में अपने विचार कारण सहित बताइए।
(प्रदूषण, बिजली, अंतरिक्ष की खोज, डॉक्टरी सुविधा, दूरभाष, कम्प्यूटर, परमाणु बम्ब, पिस्तौल, यातायात, ग्लोबल वॉर्मिंग)
उत्तर :
प्रत्येक वस्तु के दो पहलू होते हैं। एक पहलू उसकी अच्छाइयाँ बताता है, दूसरे में उसकी बुराइयाँ दिखाई जाती है। विज्ञान को भी इस कसौटी पर कसें । तो सबसे पहले उसके अच्छे पहलू हमारे सामने आते हैं।

विज्ञान ने बिजली की खोज कर मानवजाति पर बड़ा उपकार किया है। ट्यूबलाइट, पंखे, ए.सी., कूलर, फ्रीज, गीजर, लिफ्ट तथा बिजली से चलनेवाली अन्य । मशीनें विज्ञान की अद्भुत देन है। डॉक्टरी पेशे के तमाम उपकरण, एलोपेथी दवाइयाँ, विज्ञान ने ही हमें दी हैं। टेलीफोन और मोबाइल हमें विज्ञान से मिले हैं। फिल्में और दूरदर्शन विज्ञान के ही उपहार हैं। कम्प्यूटर देकर तो विज्ञान ने आज की दुनिया ही बदल डाली है। मोटर, बस, ट्रेन, हेलिकोप्टर, हवाई जहाज आदि वाहन भी विज्ञान के ही दिए हुए हैं। विज्ञान के कारण आज मनुष्य अंतरिक्ष में पहुँच गया है। चाँद की धरती पर उसने अपने कदम रख दिए हैं। विज्ञान के इन अनमोल वरदानों के कारण मानव आज धरती पर ही स्वर्ग के सुख लूट रहा है।

इन सब वैज्ञानिक आविष्कारों के साथ ही विज्ञान ने बंदूक, पिस्तौल, परमाणु बम्ब जैसे हिंसा और विनाश के साधन भी हमें दिए हैं। विज्ञान के कारण आज जल, थल और वायु में प्रदूषण भी बढ़ा है। इसमें संदेह नहीं कि ये विज्ञान के अभिशाप है। परंतु विज्ञान के वरदानों की तुलना में उसके अभिशाप खतरनाक होने पर भी कमजोर पड़ जाते हैं। सच तो यही है कि यदि विज्ञान न होता तो मानवजाति आज भी वही जीवन जीती जो आदिकाल में जंगलों में रहनेवाले लोग जीते थे। इसलिए हमें विज्ञान को वरदान और आधुनिक वैज्ञानिकों का आभार मानना चाहिए। उनके प्रयत्नों से ही हमें वे वैज्ञानिक सुविधाएँ मिली हैं।

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प्रश्न 3.
कौन शक्तिशाली है, ‘कलम या तलवार’? अपने विचार कारण सहित बताइए।
उत्तर :
कलम लिखने का काम करती है, तलवार युद्ध में काम आती है। कलम के साथ दिमाग की शक्ति जुड़ी है, तलवार के साथ शारीरिक बल जुड़ा है। कलम कविता, कहानी, उपन्यास, जीवनचरित्र आदि लिखती है, तलवार गले काटती है और खून बहाती है। कलम आनंद देती है। उससे समाज में सुख-शांति का प्रसार होता है। वह लोगों के दिल जीतती है, वह बुरों को अच्छा बनाती है।

‘रामायण’ पढ़कर कितने ही रावण राम बन गए। गाँधीजी की ‘आत्मकथा’ ने कितने ही बुरे लोगों को अच्छा बना दिया। व्यास, वाल्मीकि, कालिदास, तुलसीदास, रवीन्द्रनाथ टागोर, शेक्सपियर आदि कलम के कारण मरकर भी अमर हो गए। कलम ने कई सिंहासन पलट दिए हैं। फ्रांस की राज्यक्रांति रूसो, वाल्तेयर की कलम की ताकत से ही हुई थी।

तलवार रक्षा का साधन जरूर है, पर उसकी शक्ति कुछ समय तक ही रहती है। कलम की शक्ति युग-युग तक छाई रहती है। इसलिए मेरे विचार से तलवार की अपेक्षा कलम ही अधिक शक्तिशाली है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित सामग्री पढ़िए और उसके आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
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(1) अंतरिक्ष की किस घटना से वैज्ञानिक उत्साहित हैं?
उत्तर :
वैज्ञानिक इस घटना से उत्साहित है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा एक नया ग्रह जन्म ले रहा है।

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(2) पृथ्वी जैसा ग्रह बनने के लिए अंतरिक्ष में किस प्रकार की स्थिति होना आवश्यक है?
उत्तर :
पृथ्वी जैसा ग्रह बनने के लिए यह आवश्यक है कि अंतरिक्ष में पानी मौजूद हो। इसके साथ धूल-मिट्टी की पर्त हो। ऐसी चट्टानें हों जिनसे पृथ्वी की ऊपरी पर्तों का निर्माण हुआ है।

(3) रेखा खींचकर सही मिलाप करें।
424 प्रकाश वर्ष — नासा का टेलिस्कोप
1.6 करोड़ वर्ष — पृथ्वी से नए ग्रह की दूरी
10 करोड़ वर्ष — वैज्ञानिक
स्पिट्जर स्पेस — पूर्ण ग्रह बनने में लगनेवाला समय
कैरी सिस्से — नए ग्रह की उम्र
उत्तर :
424 प्रकाश वर्ष – पृथ्वी से नए ग्रह की दूरी
1.6 करोड़ वर्ष – नए ग्रह की उम्र
10 करोड़ वर्ष – पूर्ण ग्रह बनने में लगनेवाला समय
स्पिट्जर स्पेस – नासा का टेलिस्कोप कैरी
सिस्से – वैज्ञानिक

प्रश्न 5.
देश की उन्नति, विकास एवं रक्षा के लिए आप क्या बनना चाहेंगे ‘किसान या सैनिक’? कारण सहित अपने मित्र को पत्र लिखिए।
उत्तर:

15, ‘सुयोग’,
बोरीवली (पूर्व),
मुंबई – 400066
6- 10-2012

प्रिय मित्र राज,
सप्रेम नमस्ते।
बहुत दिनों बाद तुम्हारा पत्र आया। चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिलने पर तुम्हें ढेर सारी बधाई। पत्र में तुमने पूछा है : ‘किसान या सैनिक बनने के बारे में तुम्हारी पसंद क्या है?’ बड़ा टेढ़ा सवाल है, क्योंकि हमारे देश में किसान और सैनिक (जवान) दोनों का महत्त्व है। यदि जवान राष्ट्र का रक्षक है तो किसान हमारा अन्नदाता है। फिर भी मैं तो किसान बनना ही पसंद करूँगा।
हमारे देश की जनसंख्या बढ़ती जा रही है। आज भी हमारे यहाँ बहुत-से लोगों को दो वक्त की रोटी नहीं मिलती। अनाज महँगे हैं, दालें महँगी हैं, मसाले महँगे हैं और तेल भी महँगा है। ये चीजें सबको सुलभ नहीं हैं। देश में लाखों बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, क्योंकि उनको जरूरी पौष्टिक आहार नहीं मिलता। इस खाद्य-समस्या का हल कृषि के विकास से ही हो सकता है। खेतों में अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियाँ आदि भरपूर पैदा होंगी तभी सबको सुलभ होगी। देश के जवानों को भी तो खाद्यपदार्थों की पूर्ति करनी पड़ती है। इस प्रकार वर्तमान परिस्थितियों में मैं किसान बनना ही पसंद करूँगा।
इस पत्र के उत्तर में तुम अपनी पसंद के बारे में जरूर बताना। शेष सब कुशल हैं।

तुम्हारा,
प्रसाद परीख।

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प्रश्न 6.
उदाहरण के आधार पर उपसर्ग लगाकर शब्द पुनः लिखिए :
(वि, प्र, अ, दुर्, अध, निर्, गैर) उदाहरण : भिन्न – विभिन्न
उत्तर :
(1) देश – विदेश
(2) पका – अधपका
(3) गम – दुर्गम
(4) योग – प्रयोग
(5) जीव – निर्जीव
(6) बल – निर्बल
(7) समझ – गैरसमझ
(8) सुविधा – असुविधा
(9) वांछित – अवांछित

प्रश्न 7.
उदाहरण के आधार पर प्रत्यय लगाकर शब्द पुनः लिखिए :
(ई, ता, इत, इक) उदाहरण : नियम – नियमित
उत्तर :
(1) विदेश – विदेशी
(2) प्रकृति – प्राकृतिक
(3) पुत्र – पुत्री
(4) लापरवाह – लापरवाही
(5) चंचल – चंचलता
(6) यंत्र – यांत्रिक
(7) मानव – मानवता
(8) हँस – हँसी

प्रश्न 8.
चित्र के आधार पर काव्य की रचना कीजिए :
घड़ी लगी दीवार पर टिक
टिक कर तू चलती है,
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उत्तर:
घड़ी लगी दीवार पर
टिक टिक कर तू चलती है,
दिन हो, चाहे रात हो
जाड़ा या बरसात हो
कभी नहीं तू रुकती है।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित वाक्यों में से अव्यय छाँटकर लिखिए :
(1) उमंग और स्मित घर चले गए।
(2) मुझे अपने जन्मदिन पर कैमरा चाहिए या मोबाइल फोन?
(3) वाह! क्या कैच लिया है!
(4) दुर्योधन तथा कर्ण में गहरी मित्रता थी।
(5) वह तेज दौड़ा।
उत्तर :
(1) और
(2) या
(3) वाह
(4) तथा
(5) तेज

(1) ‘और’ शब्द उमंग और स्मित संज्ञाओं को जोड़ने का कार्य करता है।
(2) ‘या’ शब्द कैमरा और मोबाइल में से किसी एक का निर्देश करता है।
(3) ‘वाह’ शब्द प्रशंसात्मक उद्गार सूचित करता है।
(4) तथा’ शब्द भी ‘दुर्योधन’ और ‘कर्ण’ संज्ञाओं को जोड़ने का कार्य करता है।
(5) ‘तेज’ शब्द दौड़ने की क्रिया की विशेषता बताता है।
ये शब्द ऐसे हैं जिनके रूप में कभी कोई परिवर्तन नहीं होता। ये लिंग, वचन और कारक के प्रभाव से सदा मुक्त हैं। इसलिए निश्चित रूप से ये ‘अव्यय पद’ हैं।

विषय-प्रवेश

अपनी शाला में आपने वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ देखी होंगी। इसमें कुछ विद्यार्थी किसी विषय के एक पक्ष में बोलते हैं तो कुछ विद्यार्थी विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करते हैं। इस पाठ में कुछ ऐसे ही विषय दिए गए हैं। विद्यार्थियों को इनका समर्थन या विरोध करना है और उसके कारण भी बताने हैं।

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