GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 7 बढ़े कहानी

   

Gujarat Board GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 7 बढ़े कहानी Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

Gujarat Board Textbook Solutions Class 7 Hindi Chapter 7 बढ़े कहानी

GSEB Solutions Class 7 Hindi बढ़े कहानी Textbook Questions and Answers

बढ़े कहानी अभ्यास

1. ढाँचे के आधार पर कहानी का कथन और लेखन कीजिए :

एक बादशाह – वजीर की निवृत्ति के बाद उस पद के लिए उम्मीदवार बुलवाना – कठिन परीक्षा -तीन उम्मीदवारों का बादशाह तक पहुँचना – बादशाह का तीनों को एक ही सवाल – “मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एक साथ आग लग जाए तो क्या करोगे?” पहला – मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा। दूसरा – मैं पहले आपकी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा। तीसरा – मैं एक हाथ से आपकी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा। – बादशाह – पहला स्वार्थी, दूसरा नादान एवं तीसरा बुद्धिमान है, अत: तीसरे को वजीर पद के लिए नियुक्त करना।
उत्तर:
नए वजीर का चुनाव अथवा चतुर बादशाह
एक बादशाह था। उसका वजीर बहुत बूढ़ा हो गया तो उसकी निवृत्ति का समय आया। तब बादशाह ने वजीर के पद के लिए नए उम्मीदवार बुलवाए।

वजीर का पद बहुत इज्जत का था। इसलिए उसके लिए बहुत से उम्मीदवार आए। उन सबकी कठिन परीक्षा ली गई। परीक्षा में सफल तीन उम्मीदवारों को बादशाह के पास भेजा गया। उन्हीं तीन में से किसी एक को वजीर चनना था।

बादशाह ने बारी – बारी से तीनों को अपने पास बुलाया और प्रत्येक उम्मीदवार से एक ही सवाल पूछा, “मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एक साथ आग लग जाए तो तुम क्या करोगे?

इस प्रश्न के उत्तर में पहले उम्मीदवार ने कहा, “मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।” दूसरे उम्मीदवार ने कहा, “मैं पहले आपकी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।” तीसरे उम्मीदवार का जवाब था, “मैं एक हाथ से आपकी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।”

तीनों के उत्तर सुनकर बादशाह ने कहा, “पहले उम्मीदवार की बात से लगता है कि वह स्वार्थी है। दूसरे के जवाब से लगता है कि वह नादान है। तीसरे के जवाब से मालूम होता है कि वह बुद्धिमान है।”

बादशाह ने तीसरे उम्मीदवार को ही नए वजीर के पद पर नियुक्त कर लिया।

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2. कहानी आगे बढ़ाइए :

एक चरवाहा था। एक बार जंगल की ओर बकरियाँ चराने गया। चरवाहा पेड़ के नीचे बैठा था और एक बकरी अकेली थोड़े दूर निकल गई। वहाँ कहीं से एक भेड़िया आ पहुँचा। उसने बकरी से कहा, ‘मैं तुझे खाऊँगा…

अब आप बकरी की जान बचाकर कहानी पूर्ण कीजिए।
उत्तर :
मुझे बड़ी भूख लगी है। अच्छा हुआ तू यहाँ आ गई।” बकरी पहले तो बहुत घबराई। फिर उसने हिम्मत से काम लिया। वह बोली, “आप मुझे खाना चाहते हैं तो कोई बात नहीं, परंतु पहले आप मेरा एक गाना सुन लीजिए।” भेड़िया बोला, “चलो ठीक है, सुना तू अपना गाना।”

बकरी जोर – जोर से ‘में – में’ करने लगी। आवाज सुनकर चरवाहा लाठी लेकर वहाँ आ पहुँचा। उसे देखकर भेड़िया भाग गया और बकरी की जान बच गई।

सीख : मुसीबत आने पर घबराना नहीं चाहिए। हिम्मत और युक्ति से काम लेने पर मुसीबत दूर हो सकती है।

3. टी.वी., रेडियो, टेपरिकार्डर और मोबाइल फोन के माध्यम से कहानी दिखाना या सुनाना, बाद में बारी-बारी से कक्षा में कहानी का वर्णन करवाना।
उत्तर :
छात्र ध्यानपूर्वक कहानी देखें या सुनें। फिर वे एक के बाद एक देखे या सुने अनुसार कहानी का वर्णन करें।

4. दिए गए ढाँचे के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए :

एक नाई – चमत्कारी मुर्गी मिलना – मुर्गी का रोज सोने का एक अंडा देना – नाई का अमीर हो जाना – शहर भर में चर्चा – इज्जत करना – सारा सोना एक साथ पाने की लालसा जागना – मुर्गी को मार डालना – अंडे मिलना बंद होना – लालच में सोने के सब अंडे खो देना – सीख।
उत्तर:
लालच का फल किसी गाँव में एक नाई रहता था। वह बहुत गरीब था। एक दिन वह एक सेठ की हजामत कर लौट रहा था। रास्ते में उसे एक मुर्गी मिल गई। वह मुर्गी बहुत चमत्कारी थी। वह रोज सोने का एक अंडा देती थी। कुछ ही समय में नाई अमीर हो गया। शहरभर में उसकी चर्चा होने लगी। लोगों में उसकी इज्जत बढ़ गई।

एक दिन नाई ने सोचा कि इस मुर्गी के पेट में तो सोने के बहुत सारे अंडे होंगे। यदि मैं इसका पेट चीर डालूँ तो सोने के सभी अंडे मुझे एक साथ मिल जाएँ। उनको पाकर मैं बहुत धनवान बन जाऊँगा।

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ऐसा सोचकर नाई ने मुर्गी को मार डाला। उसे मुर्गी के पेट में से एक भी अंडा नहीं मिला। अब उसे सोने के अंडे मिलना बंद हो गया। नाई को बहुत पछतावा हुआ।

सीख : सचमुच, लालच का परिणाम बहुत बुरा होता है।

5. नीचे दिए गए चित्र के आधार पर कहानी का निर्माण कीजिए:
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उत्तर:
खरगोश की चतुराई अथवा ताकत से अक्ल बड़ी
किसी जंगल में एक सिंह रहता था। वह जंगल में रोज कई जानवरों का शिकार करता था। इसलिए सब जानवर भयभीत और चिंतित रहते थे।

एक दिन जंगल के पशुओं ने मिलकर सिंह से प्रार्थना की, “आप जंगल में शिकार के लिए न निकलें। हम प्रतिदिन निश्चित समय पर एक जानवर आपके पास भेज देंगे।

अब निश्चित समय पर रोज एक जानवर सिंह के पास आने लगा। एक दिन एक खरगोश की बारी आई। उसने एक तरकीब सोची। वह जान – बूझकर सिंह के पास देर से पहुँचा। सिंह को बहुत गुस्सा आया। उसने उससे देर से आने का कारण पूछा।

खरगोश ने कहा, “महाराज, रास्ते में मुझे एक दूसरा सिंह मिल गया था। वह मुझे मारकर खाना चाहता था। उससे जल्दी वापस लौटने का वादा कर मैं आपके पास आया हूँ।”

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जंगल में दूसरा सिंह होने की बात सुनकर सिंह आपे से बाहर हो गया और गरजकर बोला, “चल दिखा मुझे, कहाँ है वह दूसरा सिंह? मैं अभी उसका काम तमाम करता हूँ।” खरगोश सिंह को एक गहरे कुएँ के पास ले गया और बोला, “महाराज, इसीमें छिपा है वह दुष्ट !”

सिंह ने कुएँ में झाँका। कुएँ के पानी में उसे अपनी परछाईं दिखाई दी। उसीको दूसरा सिंह समझकर वह कुएँ में कूद पड़ा और डूबकर मर गया। खरगोश की जान बच गई। जंगल के दूसरे जानवरों ने भी राहत की सांस ली और खरगोश को धन्यवाद दिया।

सीख : ताकत से अक्ल बड़ी होती है। जो काम ताकत से न हो, उसे अक्ल से करना चाहिए।

6. ‘प्यासा कौआ कहानी में कौआ, मटका, पानी, पत्थर, धूप जैसे पात्र/वस्तुएँ हैं। ये सब कहानी की प्रतिक्रिया के रूप में ‘अपनी प्यारी छोटी चाची’ को जो बताते हैं, वह आप लिखिए।
जैसे :
धूप : आज गजब हो गया चाची, एक उड़ते कौए को हैरान करने की शरारत सूझी और मैं उस पर टूट पड़ी। पल में ही उसका गला सूखने लगा और जोरों की प्यास लगी। उसने एक पानी का मटका देखा, पर पानी खूब गहराई में था, उसकी पहुँच के बाहर था। मन ही मन सोचती थी – बच्चू! अब, क्या करोगे? पर वह बड़ा अक्लमंद निकला उसने पत्थर से पानी निकाला।
उत्तर :
कौआ : चाची, ऐसी प्यास मुझे कभी नहीं लगी जैसी आज लगी। धूप भी तेज थी। मैं उड़ते – उड़ते थक भी गया था। गला बुरी तरह सूख रहा था। तभी मेरी नजर एक मटके पर पड़ी। उसमें पानी देखकर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। लेकिन जब मैंने मटके में चोंच डाली, तो वह पानी तक नहीं पहुंची।

इधर – उधर बैठकर कई बार प्रयत्न किए, पर कोई सफलता न मिली। पर चाची, तुम्हारा यह भतीजा हार माननेवाला नहीं था। फौरन एक तरकीब सूझी। मैंने आसपास पड़े पत्थर मटके में डाले। पानी ऊपर तक आ गया। मैंने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई।

मटका : चाची, आज एक कौए ने कमाल कर दिया। मुझमें बहुत थोड़ा पानी था। मैं सोचता था किसीने मुझे जरा – सा भी धक्का दिया या किसीकी ठोकर लगी तो यह पानी ढुलक जाएगा। लेकिन जैसे दाने – दाने पर उसे खानेवाले का नाम लिखा होता है, वैसे ही बूंद – बूंद पर उसे पीनेवाले का नाम लिखा होता है। इतने में एक चतुर कौआ आया।

उसे प्यास लगी थी। परंतु पानी तक उसकी चोंच नहीं पहुंची। तब उसने मुझमें कई पत्थर डाले। पानी की सतह ऊपर उठ गई और कौए ने मजे से पानी पिया। मैं उस चतुर कौए को कभी नहीं भूलूंगी।

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पानी : चाची, जिंदगी वही अच्छी है जो किसीके काम आ जाए। मैं एक मटके में था। सोचता था कि मैं धीरे – धीरे भाप बनकर उड़ जाऊँगा। उस भाप से भला किसी का क्या भला होगा? परंतु आज एक कौआ मटके के मुँह पर बैठा। वह बहुत प्यासा था।

उसने चोंच मटके में डाली पर वह मुझ तक पहुँच न पाई। तब उसने मटके में पत्थर डाले और जब मैं ऊपर आया, तब उसने मुझे पीकर अपनी प्यास बुझाई।

पत्थर : चाची, हम तो खुले में पड़े – पड़े ऊब गए थे। जीवन व्यर्थ लग रहा था। लेकिन आज एक चतुर कौए ने हमारा उपयोग कर हमें चकित कर दिया। उसे एक मटके से पानी पीना था, परंतु पानी तक उसकी चोंच नहीं पहँचती थी।

तब उसने हमें एक – एककर मटके में डाला। पानी ऊपर आ गया। उसने मजे से पानी पिया और खुश होकर उड़ गया। हम मटके के पानी में चले गए। बहुत मजा आया। सचमुच, चाची, कौआ बड़ा अक्लमंद था।

7. शब्दों के भेद को जानकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए :
आदि-आदी, अपेक्षा-उपेक्षा, अशक्त-आसक्त, गृह-ग्रह, बहार-बाहर, शौक़-शोक
उत्तर :
(1) आदि – आरंभ
इस कहानी का आदि और अंत बहुत रोचक हैं।
आदी – अभ्यस्त
मैं सुबह जल्दी उठने का आदी हूँ।

(2) अपेक्षा – आशा
मुझे आपसे यही अपेक्षा थी।
उपेक्षा – ध्यान न देना
उसने स्वास्थ्य की उपेक्षा की।

(3) अशक्त – कमजोर
बीमारी ने उसे अशक्त बना दिया।
आसक्त – मुग्ध, आकर्षित
राजा सत्यवती पर आसक्त था।

(4) गृह – घर
यह हमारा नया गृह है।
ग्रह – बुध, शुक्र आदि ग्रह
ग्रहों की तरह हमारी पृथ्वी भी एक ग्रह है।

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(5) बहार – वसंत
बागों में बहार आई हुई है।
बाहर – सीमा के पार
लोग घरों से बाहर निकल आए।

(6) शौक – – चसका, रुचि
मुझे घूमने – फिरने का शौक है।
शोक – दुःख माँ के मरने पर उसे बहुत शोक हुआ।

बढ़े कहानी स्वाध्याय

1. कहानी आगे बढ़ाइए… कहानी को अपने आप लिखिए :

प्रश्न 1.
एक दिन अकबर ने बीरबल से पूछा, ‘बीरबल दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली कौन है?’ बीरबल ने क्या कहा होगा? कहानी आगे बढ़ाइए।
उत्तर :
एक दिन अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल, दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली कौन है?” बीरबल ने फौरन उत्तर दिया, “जहाँपनाह, दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली सूरज है।”

अकबर ने पूछा, “कैसे?” तब बीरबल ने कहा, “हुजूर, दुनिया में तीन ही बड़ी शक्तियाँ हैं – हवा, पानी और सूरज। एक बार इन तीनों में बहस छिड़ गई कि उनमें सबसे अधिक बलवान कौन है? तब सूरज ने कोट पहनकर सड़क से गुजरनेवाले एक यात्री की ओर संकेत कर कहा – “जो इसका कोट शरीर पर से उतरवा दे वही सबसे अधिक बलवान है।”।

हवा ने कहा, “इसमें कौन – सी बड़ी बात है। अभी मैं इसका कोट उतरवाकर बताती हूँ।” ऐसा कहकर हवा जोर से चलने लगी। उसने तूफान का रूप ले लिया, पर इससे वह आदमी अपने कोट को और कसकर पकड़े रहा। आखिर हवा ने अपनी हार मान ली।

अब पानी को अपनी ताकत दिखानी थी। जोर की बरसात होने लगी। यात्री एक घने पेड़ के नीचे खड़ा हो गया। फिर भी वह भीग गया, पर अपना कोट नहीं उतारा। कोट के कारण उसकी कमीज और बनियान अधिक नहीं भीगी। पानी ने भी अपनी हार कबूल कर ली।

अब सूरज की बारी थी। उसने जोर से तपना शुरू किया। गर्मी से बेहाल होकर यात्री ने कोट उतारकर कंधे पर डाल लिया। इस तरह सूरज यात्री का कोट उतरवाने में सफल रहा। उसने अपने को सबसे अधिक शक्तिशाली सिद्ध कर दिखाया।

अकबर बीरबल की बात सुनकर खुश हो गया।

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प्रश्न 2.
गेंद स्कूटर के साथ कहीं चली गई। उसके बाद गेंद के साथ क्या-क्या हुआ होगा। सोचकर बताओ।
उत्तर :
रबर की एक गेंद रास्ते में पड़ी थी। एक स्कूटर वहाँ से गुजरा तो वह उसके एक पहिए में फंस गई। आगे रास्ते में ऊँची – ऊँची घास थी। कोमल – कोमल घास का स्पर्श गेंद को बहुत अच्छा लगा। फिर स्कूटर एक कीचड़वाली जगह से गुजरा। कीचड़ के छींटे गेंद पर भी पड़े।

गेंद को बहुत बुरा महसूस हुआ, पर क्या करती बेचारी? स्कूटर आगे बढ़ा तो एक बगीचा आया। स्कूटरवाले को बगीचे से फूल लेने थे। उस स्कूटरचालक से बातें करते समय माली के हाथ से पानी का पाइप कुछ मुड़ गया। पानी की धार स्कूटर के पहिए में फंसी गेंद पर पड़ी।

उससे कीचड़ के छींटे धुल गए। गेंद को ठंडा – ठंडा पानी बहुत अच्छा लगा।

माली से फूल लेकर चालक ने स्कूटर पर बैठकर किक मारी तो गेंद पहिए से निकलकर उछली और फूल के एक गमले में जा गिरी। उसी समय माली का छोटा बेटा वहाँ आया। उसने कूडे में गेंद पड़ी देखी। गेंद पाकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।

2. ढाँचे पर से कहानी लिखिए :

एक कुत्ता – मुँह में रोटी का टुकड़ा – छोटे पुल पर से जाना – पानी में अपनी परछाईं देखना – परछाई को दूसरा कुत्ता समझना – रोटी का टुकड़ा छीन लेने के लिए भौंकना – अपना टुकडा गँवाना – सीख।
उत्तर:
लालची कुत्ता
एक कुत्ता था। एक दिन उसे एक रोटी का टुकड़ा मिल गया। उसे मुँह में लेकर वह एक छोटी नदी के पुल पर से गुजर रहा था।

नदी के पानी में कुत्ते ने अपनी परछाई देखी। परछाई को उसने दूसरा कुत्ता समझ लिया। उसके पास भी रोटी का टुकड़ा था। उसे दूसरे कुत्ते की रोटी छीनने की इच्छा हुई।

कुत्ते ने उस कुत्ते की ओर जोर से भौंकने के लिए जैसे ही मुँह खोला, उसके मुँह की रोटी नदी के पानी में गिर पड़ी। लालच में पड़कर उसने अपनी रोटी भी गँवा दी।

सीख : सच है, लालच का फल बुरा होता है।

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बढ़े कहानी योग्यता विस्तार

  1. अपने स्कूल में आनेवाले सामयिकों में दी गई कहानियों का संग्रह कीजिए और प्रार्थना सभा में कहिए।
  2. पुस्तकालय से कहानी की किताबें लेकर पढिए। आपने जो कहानी पढी हो उसको कक्षा में कहिए।

बढ़े कहानी Summary in Hindi

कौआ और मुर्गी
कहानी पढ़ते जाइए और उसमें छूटे हुए शब्दों को खाली स्थान में भरते जाइए।
उत्तर :
कौआ और मुर्गी दोनों एक घर में रहते थे। कौआ दाना लाता था। मुर्गी भी दाना लाती थी। ऐसा करते – करते घर में बहुत दाना जमा हो गया। एक दिन कौए ने कहा, “मैं चावल लेने जाता हूँ, तू घर का दरवाजा बंद रखना, नहीं तो कोई दाने ले जाएगा।

थोड़ी देर बाद एक घोड़ा आया। उसने कहा, “मुर्गी – मुर्गी, दरवाजा खोल और मुझे दाना दे।” मुर्गी ने कहा, “नहीं, नहीं, मैं दाना नहीं दूंगी।” घोड़े ने कहा, “मुर्गी, मुझे दाना दे, मुझे बहुत भूख लगी है।” मुर्गी को दया।

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आ गई। उसने सारे दाने घोड़े को दे दिए। अब वह सोचने लगी, कौआ दाना माँगेगा तो मैं कहाँ से दूंगी? मुर्गी बहुत घबरा गई। जब कौआ दाना लेकर घर लौटा तब मुर्गी चक्की के पीछे छिप गई। कौए ने आवाज लगाई, ” मुर्गी, मुर्गी, तू कहाँ है?” डर के मारे मुर्गी चुप रही। एक आवाज भी नहीं निकाली।

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उस समय एक बिल्ली घर में आई। बिल्ली ने कहा, “मुर्गी, मुझे अपनी चक्की दे। मुझे दाना पीसना है।” कौए ने कहा, “मुर्गी तो घर में नहीं है। तू अपना दाना यहीं लाकर पीस ले।” बिल्ली दाना ले आई और पीसने को बैठी।

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बिल्ली ने दाना चक्की में डाला। मुर्गी ने चट उसे मुँह में भर लिया। बिल्ली ने और दाना चक्की में डाला। मुर्गी ने उसे भी चट कर लिया। बिल्ली पीसने लगी, पर आटा न निकला। ये देख बिल्ली बहुत दुःखी हुई।

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बिल्ली ने सारी बात कौए को बताई। कौआ भी बहुत चकित हुआ। कौआ सोचने लगा, दाना कहाँ होगा। ढूँढ़ते – ढूँढ़ते उसने चक्की के पीछे देखा। वहाँ मुर्गी मुँह में दाना भरे बैठी थी। उसका मुँह दाने से एकदम फूल गया था।

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उसे देख कौआ हँसा। उसे देख बिल्ली भी बहुत हँसी। दोनों हँसे तो मुर्गी को भी जोर की हँसी आई। वह हँसी और उसके मुँह से सारे दाने निकल पड़े।

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बढ़े कहानी विषय – प्रवेश

कहानी पढ़ना और सुनना सबको अच्छा लगता है। हमें कहानी लिखने का भी अभ्यास करना चाहिए। इस पाठ में इसी हेतु से कुछ कहानियाँ पूरी करने के लिए दी गई हैं।

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