GSEB Solutions Class 10 Hindi Kritika Chapter 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा !

   

Gujarat Board GSEB Std 10 Hindi Textbook Solutions Kritika Chapter 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा ! Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

GSEB Std 10 Hindi Textbook Solutions Kritika Chapter 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा !

निम्नलिखित गद्यांशों के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

1. टून्नू की मुसकराहट उसके होठों में ही विलीन हो गई । उसने गिरे मन से उत्तर दिया, ‘साल-भर का त्योहार था, इसीलिए मैंने सोचा कि…’ कहते हुए उसने बगल से बंडल निकाला और उसे दुलारी के हाथों में दे दिया । दुलारी बंडल लेकर देखने लगी । उसमें खद्दर की एक साड़ी लपेटी हुई थी । दुन्नू ने कहा, ‘यह खास गांधी आश्रम की बिनी है ।’

‘लेकिन इसे तुम मेरे पास क्यों लाए हो ?’ दुलारी ने कड़े स्वर से पूछा । टुन्नू का शीर्ण वदन और भी सूख गया । उसने सूखे गले से कहा, ‘मैंने बताया न कि होली का त्यौहार था ।…’ टुन्नू की बात काटते हुए दुलारी चिल्लाई, ‘होली का त्यौहार था तो तुम यहाँ क्यों आए ? जलने के लिए क्या तुम्हें कहीं और चिता नहीं मिली जो मेरे पास दौड़े चले आए ? तुम मेर मालिक हो या बेटे हो या भाई हो, कौन हो ?

खैरियत चाहते हो तो अपना यह कफन लेकर यहाँ से सीधे चले जाओ !’ और उसने उपेक्षापूर्वक धोती दुन्नू के पैरों के पास फेंक दी । टुन्नू की काजल-लगी बड़ी-बड़ी आँखों में अपमान के कारण आँसू भर आए । उसने सिर झुकाए हुए आर्द्र कंठ से कहा, “मैं तुमसे कुछ माँगता तो हूँ नहीं । देखो, पत्थर की देवी तक अपने भक्त द्वारा दी गई भेंट नहीं ठुकराती, तुम तो हाड-माँस की बनी हो ।’

प्रश्न 1.
दुनू दुलारी के घर क्यों आया था ?
उत्तर :
सालभर का त्योहार होली के अवसर पर टुन्नू दुलारी को खद्दर की एक साड़ी उपहार में देने के लिए उसके घर आया था।

प्रश्न 2.
दुन्नू का शीर्ण बदन क्यों सूख गया ?
उत्तर :
दुलारी दुन्नू द्वारा लाए गए उपहार को अस्वीकार करते हुए कड़े स्वर में पूछा कि इसे तुम मेरे पास क्यों लाए हो, यह सुनकर टुन्नू का शीर्ण बदन और भी सूख गया ।

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प्रश्न 3.
दुलारी ने उपहार का क्या किया ?
उत्तर :
दुलारी टुन्नू द्वारा लाए गए उपहार की उपेक्षा करते हुए टुन्नू के पैरों के पास फेंक दिया और उसे टुन्नू को कड़े शब्दों में – फटकार लगाई ।

प्रश्न 4.
आई कंठ से टुन्नू ने दुलारी से क्या कहा ?
उत्तर :
आर्द्र कंठ से टुन्नू ने दुलारी से कहा कि ‘मैं तुमसे कुछ माँगता तो नहीं हूँ ! देखो पत्थर की देवी तक अपने भक्त द्वारा दी । गई भेंट नहीं तुकराती, तुम तो हाड़-माँस की बनी हो ।

2. दुलारी के जीवन में टुन्नू का प्रवेश हुए अभी कुल छह मास हुए थे । पिछली भादों में तीज के अवसर पर दुलारी खोजवाँ बाजार में गाने गई थी । दुक्कड़ पर गानेवालियों में दुलारी की महती ख्याति थी । उसे पद्य में ही सवाल-जवाब करने की अद्भुत क्षमता प्राप्त थी । कजली गाने वाले बड़े-बड़े विख्यात शायरों की उससे कोर दबती थी ।

इसलिए उसके मुँह पर गाने में सभी घबराते थे । उसी दुलारी को कजली-दंगल में अपनी ओर खड़ा कर खोजवाँ वालों ने अपनी जीत सुनिश्चित समझ ली थी परंतु जब साधारण गाना हो चुकने पर सवाल-जवाब के लिए दुक्कड़ पर चोट पड़ी और विपक्ष से सोलहसत्रह वर्ष का एक लड़का गौनहारियों की गोल में सबसे आगे खड़ी दुलारी की ओर हाथ उठाकर ललकार उठा – ‘रनियाँ लड़ परमेसरी लोट !’ (प्रामिसरी नोट) तब उन्हें अपनी विजय पर पूरा विश्वास न रह गया ।

प्रश्न 1.
दुलारी का परिचय दुनू से कब और कहाँ हुआ ?
उत्तर :
पिछली भादों में तीज के अवसर दुलारी खोजवाँ बाजार में गाने गई थी । वहीं पर दुलारी का परिचय दुन्नू से हुआ । दुलारी के जीवन में टुन्नू का प्रवेश हुए अभी कुछ छह मास हुए थे ।

प्रश्न 2.
दुलारी किन-किन कलाओं में दक्ष थी ?
उत्तर :
दुलारी दुक्कड़ पर गाने में बड़ी दक्ष थी । इसमें उसकी ख्याति दूर-दूर तक थी । उसे पद्य में ही सवाल-जवाब करने की अद्भुत क्षमता प्राप्त थी । वह ‘कजली’ गाने में भी दक्ष थी । बड़े-बड़े विख्यात शायर भी उसका सामना करने से डरते । थे ।

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प्रश्न 3.
खोजबावालों को अपनी जीत पर पूरा विश्वास क्यों न रहा ?
उत्तर :
खोजवायालों ने अपनी तरफ से दुलारी को खड़ा किया था । किन्तु विपक्ष की तरफ से सोलह-सत्रह वर्ष का एक लड़का गौनहारियों की गोल में सबसे आगे खड़ी दुलारी को ललकारने लगा । इस स्थिति को देख खोजयावालों को अपनी जीत पर पूरा विश्वास नहीं रहा ।

प्रश्न 4.
खोजबावालों ने कजली-दंगल में अपनी ओर से किसे खड़ा किया और क्यों ?
उत्तर :
खोजवावालों ने कजली-दंगल में अपनी ओर से दुलारी को खड़ा किया । दुलारी कजली गाने में माहिर थी । बड़े-बड़े विख्यात शायर भी दुलारी से डरते थे । इसलिए खोजवावालों ने अपनी ओर से दुलारी को खड़ा किया था ।

3. दुन्नू के इस सार्वजनिक आविर्भाव का यह तीसरा या चौथा अवसर था । उसके पिता घाट पर बैठकर और कच्चे महाल के दस-पाँच घर यजमानी में सत्यनारायण की कथा से लेकर श्राद्ध और विवाह तक कराकर कठिनाई से गृहस्थी की नौका खे रहे थे । परंतु पुत्र को आवारों की संगति में शायरी का चस्का लगा ।

उसने भैरोहेला को अपना उस्ताद बनाया और शीघ्र ही सुंदर कजली-रचना करने लगा । वह पद्यात्मक प्रश्नोत्तरी में भी कुशल था और अपनी इसी विशेषता के बल पर वह बजरडीहावालों की ओर से बुलाया गया था । उसकी ‘शायरी’ पर बजरडीहावालों ने ‘वाह-वाह’ का शोर मचाकर सिर पर आकाश उठा लिया । खोजवावालों का रंग उतर गया । दुन्नू का गीत भी समाप्त हो गया ।

प्रश्न 1.
दुन्नू के पिता अपनी गृहस्थी कैसे चलाते थे ?
उत्तर :
टुन्नू के पिता घाट पर बैठकर और कच्चे महाल के दस पाँच घर यजमानी में सत्यनारायण की कथा से लेकर श्राद्ध और विवाह कराकर अपनी गृहस्थी चलाते थे ।

प्रश्न 2.
दुन्नू सुंदर कजली रचना कैसे करने लगा ?
उत्तर :
टुन्नू को आवारों की संगति में शायरी का चस्का लगा । उसने भैरोहेला को अपना उस्ताद बनाया । उनके निर्देशन में ही वह शीघ्र सुंदर कजली रचना करने लगा ।

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प्रश्न 3.
किस विशेषता के कारण बजरडीहावालों ने दुल्नू को बुलाया था ?
उत्तर :
टुन्नू सुंदर कजली-रचना करने में सिद्धहस्त था तथा पद्यात्मक प्रश्नोत्तरी में भी वह कुशल था । उसकी इन्हीं विशेषता के । कारण बजरडीहावालों ने टुन्नू को बुलाया था ।

प्रश्न 4.
खोजवावालों का रंग क्यों उतर गया ?
उत्तर :
टुन्नू की शायरी पर बजरडीहावालों ने वाह-वाह का शोर मचाकर सिर पर आकाश उठा लिया था । इस कारण से खोजकावालों का रंग उतर गया ।

4. दुलारी फेंकू को उत्तर देना ही चाहती थी कि जलाने के लिए विदेशी वस्त्रों का संग्रह करता हुआ देश के दीवानों का दल भैरवनाथ की सँकरी गली में घुसा और ‘भारतजननि तेरी जय, तेरी जय हो’ गीत की ध्वनि से उभय पार्श्व में खड़ी इमारतों की प्रत्येक कोठरी गूंज गई । एक बड़ी-सी चादर फैलाकर चार व्यक्तियों ने उसके चारों कोनों को मजबूती से पकड़ रखा था ।

उसी पर खिड़कियों से धोती, साड़ी, कमीज, कुरता, टोपी आदि की वर्षा हो रही थी। सहसा दुलारी ने भी अपनी खिड़की खोली और मैंचेस्टर तथा लंका-शायर के मिलों की बनी बारीक सूत की मखमली किनारे वाली नयी कोरी धोतियों का बंडल नीचे फैली चादर पर फेंक दिया । चादर सँभालनेवाले चारों व्यक्तियों की आँखें एक साथ खिड़की की ओर उठ गई; कारण, अब तक जितने वस्त्रों का संग्रह हुआ था वे अधिकांश फटे-पुराने थे । परंतु यह जो नया बंडल गिरा उसकी धोतियों की तह तक न खुली थी ।

प्रश्न 1.
देश के दीवानों का दल कौन-से कार्य कर रहा था ?
उत्तर :
देश के दिवानों के दल विदेशी वस्त्रों को जलाने के लिए गली-गली घूमकर, वस्त्र एकत्रित कर रहे थे । साथ-साथ भारत जननि, तेरी जय, तेरी जय’ गीत को गाकर गली को गुंजायमान कर रहे थे ।

प्रश्न 2.
दिवानों के दल वस्खों को कैसे एकत्रित कर रहे थे ?
उत्तर :
एक बड़ी-सी चादर फैलाकर चार व्यक्तियों ने उसके चारों कोनों को मजबूती से पकड़ रखा था । उसी पर खिड़कियों से धोती, साड़ी, कमीज, कुरता, टोपी आदि लोग गिराते थे । इस तरह से वे वस्त्रों को एकत्रित करते थे ।

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प्रश्न 3.
खिड़की खोलकर दुलारी ने क्या किया ?
उत्तर :
खिड़की खोलकर दुलारी ने मैंचेस्टर तथा लंका-शायर के मिलों की बनी बारीक सूत की मखमली किनारेवाली नयी कोरी धोतियों का बंडल नीचे फैली चादर पर फेंक दिया ।

प्रश्न 4.
चादर संभालनेवाले व्यक्तियों की आँखें एक साथ खिड़की की ओर क्यों उठ गई ?
उत्तर :
चादर संभालनेवाले व्यक्तियों की आँखें एक साथ खिड़की की ओर उठ गई क्योंकि अब तक जितने वस्त्रों का संग्रह हुआ था चे अधिकांश फटे-पुराने थे । परन्तु यह जो नया बंडल गिरा था उसकी धोतियों की तह तक नहीं खुली थी ।

5. ‘कल छह अप्रैल को नेताओं की अपील पर नगर में पूर्ण हड़ताल रही, यहाँ तक कि खोमचेवालों ने भी नगर में फेरी नहीं लगाई । सवेरे से ही जुलूसों का निकलना जारी हो गया, जो जलाने के लिए विदेशी वस्त्रों का संग्रह करता जाता था । ऐसे ही एक जुलूस के साथ नगर का प्रसिद्ध कजली-गायक टुन्नू भी था ।

उक्त जुलूस जब टाउन हॉल पहुँचकर विघटित हो गया तो पुलिस के जमादार अली सगीर ने टुन्नू को जा पकड़ा और उसे गालियाँ दी । गाली देने का प्रतिवाद करने पर जमादार ने उसे बूट की ठोकर मारी । चोट पसली में लगी । वह तिलमिलाकर जमीन पर गिर गया और उसके मुँह से एक चुनन खून निकल पड़ा । पास ही गोरे सैनिकों की गाड़ी खड़ी थी ।

उन्होंने टुन्नू को उठाकर गाड़ी में लाद लिया । लोगों से कहा गया कि अस्पताल को ले जा रहे हैं । परंतु हमारे संवाददाता ने गाड़ी का पीछा करके पता लगाया है कि वास्तव में दुन्न मर गया । रात के आठ बजे टुन्नू का शव वरुणा में प्रवाहित किए जाते भी हमारे संवाददाता ने देखा है ।

प्रश्न 1.
नेताओं द्वारा अपील किए गए हड़ताल का क्या असर पड़ा ?
उत्तर :
छ अप्रैल को नेताओं ने हड़ताल की अपील की थी । यह हड़ताल पूर्ण रूप से सफल रही, यहाँ तक कि खोमचेवालों न भी नगर में फेरी नहीं लगाई । सुबह से ही जुलूस निकलने लगे थे ।

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प्रश्न 2.
हड़तालवाले दिन कजली गायक दुचू क्या कर रहा था ?
उत्तर :
हड़तालवाले दिन कजली गायक टुन्नू एक जुलूस के साथ विदेशी वस्त्रों का संग्रह करनेवाले दल के साथ विदेशी वस्त्रों का संग्रह कर रहा था ।

प्रश्न 3.
टाउन हॉल पहुँचकर जुलूस की क्या हालत हुई ?
उत्तर :
टाउनहॉल पहुँचकर जुलूस विघटित हो गया । उस समय पुलिस के जमादार अली सगीर ने टुन्नू को पकड़ लिया ।

प्रश्न 4.
प्रसिद्ध कजली-गायक टुन्नू की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर :
प्रसिद्ध कजली-गायक टुन्नू जुलूस में शामिल था । टाउनहॉल पर पुलिस के जमादार अली सगीर ने दुन्नू को पकड़ कर गालियाँ दी । प्रतिवाद करने पर जमादार ने उसे बूट की ठोकर मारी । चोट पसली में लगी । टुन्नू के मुँह से खून निकल गया । लोगों ने बताया कि उसे अस्पताल ले जा रहे है । रास्ते में ही ट्रेन की मृत्यु हो गई ।

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