GSEB Solutions Class 9 Hindi Chapter 18 अँधेरी नगरी

   

Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 9 Solutions Chapter 18 अँधेरी नगरी Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

GSEB Std 9 Hindi Textbook Solutions Chapter 18 अँधेरी नगरी

Std 9 GSEB Hindi Solutions अँधेरी नगरी Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय

1. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-दो वाक्यों में उत्तर लिखिए:

प्रश्न 1.
महंत ने नगर की असलियत जानने पर क्या फैसला लिया?
उत्तर :
महंत ने नगर की असलियत जानकर वहाँ क्षणभर भी न रहने का निर्णय लिया।

प्रश्न 2.
अंधेरी नगरी में भाजी और खाजा किस भाव से बिकता था?
उत्तर :
अंधेरी नगरी में भाजी और खाजा दोनों टके सेर भाव बिकता था।

प्रश्न 3.
कसाई ने भेड़ किससे मोल ली थी?
उत्तर :
कसाई ने भेड़ एक गड़रिये से मोल ली थी।

प्रश्न 4.
महंत ने गोवर्धनदास को क्या सलाह दी थी?
उत्तर :
महंत ने गोवर्धनदास को उस नगर में न रहने की सलाह दी थी, जहाँ टका सेर भाजी और टका सेर खाजा मिलता हो।

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प्रश्न 5.
राजा फाँसी चढ़ने को क्यों तैयार हो गया?
उत्तर :
राजा फांसी चढ़ने को तैयार हो गया, क्योंकि महंत ने कहा था कि उस शुभ घड़ी में जो मरेगा वह सीधे स्वर्ग जाएगा।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छ: वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
गोवर्धनदास ने खुश होकर अंधेरी नगरी में ही रहने का फैसला क्यों लिया?
उत्तर :
गोवर्धनदास में महंत जैसी दूरदृष्टि नहीं थी। उसे बस अपना पेट भरने की चिंता रहती थी। अंधेरी नगरी में टके सेर मिठाई मिलती थी। गोवर्धनदास को मिठाई खाने का शौक था। अंधेरौ नगरी में रहकर वह कम पैसों में भी भरपेट मिठाई खा सकता था। इसलिए उसने अंधेरी नगरी में ही रहने का फैसला किया।

प्रश्न 2.
बकरी की मौत के लिए किस-किसको अपराधी वहराया गया? राजा ने किसे-किसे और क्यों फाँसी चढ़ाने का फैसला किया?
उत्तर :
बकरी की मौत के लिए कल्लू बनिया, दीवार बनानेवाले कारीगर, चूनेवाले, भिश्ती, कसाई, गड़रिए और कोतवाल को अपराधी ठहराया गया। अंत में राजा ने कोतवाल को फांसी पर चढ़ाने का फैसला किया।

प्रश्न 3.
गोवर्धनदास पर पछताने की बारी क्यों आ गई?
उत्तर :
गुरु महंत का कहना न मानकर गोवर्धनदास ने अंधेरी नगरी में ही रहने का निर्णय किया था। उसने सोचा कि कम खर्च में अधिक मजे के साथ वहीं रह सकता था। परंतु जब दुबला-पतला होने के कारण कोतवाल फाँसी से बच गया, तब सिपाहियों ने गोवर्धनदास को पकड़ा। सिपाहियों को न्याय-अन्याय तथा दोषी और निर्दोष की परवाह नहीं थी। उन्हें तो फांसी पर चढ़ने लायक व्यक्ति की जरूरत थी। उनके द्वारा पकड़े जाने पर गोवर्धनदास को पछताने की बारी आई।

प्रश्न 4.
महंत गोवर्धनदास की जान बचाने में सफल कैसे हो गए?
उत्तर :
जब गोवर्धनदास को फांसी पर चढ़ाया जानेवाला था, तभी उसके गुरु महंतजी वहां पहुंच गए। गुरु ने शिष्य के कान में कुछ कहा और फिर गरु-शिष्य फांसी पर चढ़ने के लिए आपस में हुज्जत करने लगे। इससे सिपाही चकित हो गए। राजा, मंत्री और कोतवाल भी वहां पहुंच गए। पूछने पर महंत ने बताया कि उस मुहूर्त में फांसी पर चढ़नेवाला सीधा स्वर्ग जाएगा। स्वर्ग के लालच में चौपट राजा खुद फांसी पर चढ़ गया। इस प्रकार गोवर्धनदास की जान बचाने में महंत सफल हो गए।

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प्रश्न 5.
पाठ को ‘अंधेरी नगरी’ शीर्षक क्यों दिया गया?
उत्तर :
कहावत है – ‘यथा राजा तथा प्रजा’ प्रस्तुत एकांकी इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करता है। एकांकी में एक दीवार गिरने के अपराध में कइयों पर दोष मढ़ा जाता है, पर अपने-अपने बचाव में सब सफल हो जाते हैं। अंत में कोतवाल दोषी साबित होता है, जिसका घटना से कोई संबंध नहीं है। राजा उसे फांसी देने का हुक्म देता है। कोतवाल की पतली गरदन फांसी के बड़े फैदे के लायक नहीं, इसलिए मोटे-ताजे गोवर्धनदास को पकड़ा जाता है। अंत में महंत की चतुराई से राजा स्वयं फांसी पर चढ़ जाता है।

इस प्रकार अंधेरी नगरी सचमुच अंधेरी नगरौ है। यहाँ सच और झूठ में कोई भेद नहीं किया जाता। यहाँ न कोई कानून है, न व्यवस्था। अपराध कोई करता है और दंड किसी और को दिया जाता है। इसलिए पाठ को ‘अंधेरी नगरी’ शीर्षक दिया गया है।

3. आशय स्पष्ट कीजिए :

प्रश्न 1.
अंधेरी नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।
उत्तर :
मूर्ख राजा के राज्य में अच्छे-बुरे, साधारण-विशेष, उचितअनुचित में कोई अंतर नहीं होता। खाजा जैसी महंगी मिठाई भी भाजी के भाव बेची जाती है। न्याय-अन्याय में भी कोई फर्क नहीं रखा जाता। राज्य में सब जगह अंधेर ही अंधेर दिखाई देता है।

प्रश्न 2.
राजा के जीतेजी और कौन स्वर्ग जा सकता है ? हुमको फाँसी चढ़ाओ, जल्दी करो।
उत्तर :
राजा को बताया गया कि फांसी पर चढ़ने की वह बहुत शुभ घड़ी थी। उस समय फांसी पर चढ़नेवाला सीधा स्वर्ग जाएगा। मूर्ख राजा स्वर्ग के लालच में आ गया। बुद्धि-विवेक का उसमें घोर अभाव था। महंत की चाल में फंसकर वह फांसी पर चढ़ने के लिए तैयार हो गया। उसकी मूर्खता ही उसकी राजहठ बन गई।

4. सही शब्द चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए :

प्रश्न 1.

  1. महंत अंधेरी नगरी में …………. रहना नहीं चाहते ? (यथासमय, क्षणभर)
  2. मंत्री और नौकर लोग ………….. बैदे हैं.। (इकठ्दा, यथास्थान)
  3. कोतवाल तूने …………. धूमधाम से क्यों निकाली? (मीठाई, सवारी)
  4. मुझे अपने …….. को अंतिम उपदेश देने दो।
  5. शुभघड़ी में जो मरा, सीधा……….. जाएगा । (महल, स्वर्ग)

उत्तर :

  1. क्षणभर
  2. यथास्थान
  3. सवारी
  4. शिष्य
  5. स्वर्ग

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5. निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द दीजिए :

प्रश्न 1.

  1. न्याय माँगनेवाला
  2. तस्कारी बेचनेवाली स्त्री
  3. चमड़े की खाल का बड़ा थैला
  4. भेड़-बकरे चरानेवाला
  5. मीठाई बेचनेवाला

उत्तर :

  1. फरियादी
  2. कुंजड़िन
  3. मशक
  4. गडरिया
  5. हलवाई

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :

प्रश्न 1.
नगर और राजा का नाम सुनकर महंत ने क्या कहा?
उत्तर :
नगर और राजा का नाम सुनकर महंत ने कहा कि ऐसी नगरी में रहना उचित नहीं है जहाँ टके सेर भाजी और टके सेर खाजा बिकता है। मैं तो इस नगर में अब एक क्षण भी नहीं रहूंगा।

प्रश्न 2.
गोवर्धनदास ने अंधेरी नगरी न छोड़ने का क्या कारण बताया?
उत्तर :
गोवर्धनदास ने अंधेरी नगरी न छोड़ने का कारण बताते – हुए कहा कि और जगह दिनभर मांगें तो भी पेट नहीं भरता ! यहाँ कम – पैसों में भी मजे से गुजारा हो सकता है।

प्रश्न 3.
गड़रिए ने कसाई को बड़ी भेड़ देने का क्या कारण बताया?
उत्तर :
गड़रिए ने बताया कि जब मैं कसाई को भेड़ दे रहा था, उसी समय कोतवाल साहब की सवारी आ गई। भीड़ के कारण मैं छोटीबड़ी भेड़ का ख्याल नहीं कर सका। इसीलिए मैंने बड़ी-बड़ी भेड दे दी।

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प्रश्न 4.
कोतवाल फांसी से कैसे बच गया?
उत्तर :
कोतवाल दुबला-पतला आदमी था। फासी देते समय फाँसी का फंदा उसकी गरदन से बड़ा निकला। इसलिए वह फांसी से बच गया।

प्रश्न 5.
गोवर्धनदास को अंधेरी नगरी में अंधेर कब दिखाई दिया?
उत्तर :
राजा के सिपाही गोवर्धनदास को मोटा-ताजा देखकर फांसी पर चढ़ाने के लिए ले गए। तब निर्दोष होने पर भी अपने साथ अन्याय होता देखकर गोवर्धनदास को अंधेरी नगरी में अंधेर दिखाई दिया।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

प्रश्न 1.
गोवर्धनदास को नगर का क्या नाम बताया गया?
उत्तर :
गोवर्धनदास को नगर का नाम ‘अंधेरी नगरी’ बताया गया।

प्रश्न 2.
गोवर्धनदास को नगर का नाम किसने बताया?
उत्तर :
गोवर्धनदास को नगर का नाम हलवाई ने बताया।

प्रश्न 3.
गोवर्धनदास को भिक्षा में कितने पैसे मिले थे?
उत्तर :
गोवर्धनदास को भिक्षा में सात पैसे मिले थे।

प्रश्न 5.
गोवर्धनदास ने कितनी मिठाई खरीद ली?
उत्तर :
गोवर्धनदास ने साढ़े तीन सेर मिठाई खरीद ली।

प्रश्न 6.
महंत ने गोवर्धनदास को क्या चेतावनी दी?
उत्तर :
महंत ने गोवर्धनदास को यह चेतावनी दी कि अगर वह उनकी सलाह न मानेगा तो एक दिन पछताएगा।

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प्रश्न 7.
दीवार किसकी गिरी थी?
उत्तर :
दीवार कल्लू बनिए की गिरी थीं।

प्रश्न 8.
दीवार के नीचे दबकर कौन मर गया था?
उत्तर :
दीवार के नीचे दबकर बकरी मर गई थी।

प्रश्न 9.
धूमधाम से सवारी किसने निकाली थी?
उत्तर :
धूमधाम से सवारी कोतवाल ने निकाली थी।

प्रश्न 10.
सिपाहियों ने फांसी पर बढ़ाने के लिए गोवर्धनदास को क्यों उपयुक्त समझा?
उत्तर :
सिपाहियों ने फांसी पर चढ़ाने के लिए गोवर्धनदास को उपयुक्त समझा, क्योंकि वह खुब मोटी गरदनवाला था।

प्रश्न 11.
गोवर्धनदास गुरु की बात न मानकर क्यों पछताता है?
उत्तर :
गोवर्धनदास गुरु की बात न मानकर पछताता है, क्योंकि गुरु की आज्ञा न मानने के कारण ही एक दिन सिपाही उसे फांसी पर चढ़ाने के लिए ले जाते हैं।

निम्नलिखित विधान ‘सही’ है या ‘गलत’ यह बताइए :

प्रश्न 1.

  1. अंधेरी नगरी में महंत दो शिष्यों के साथ आए।
  2. गोवर्धनदास ने अंधेरी नगरी में ही रहना तय कर लिया।
  3. मिठाई खाकर नारायणदास अलमस्त बन गया था।
  4. कल्लू बनिए की दीवार के नीचे गाय दब गई।
  5. सीधा स्वर्ग जाने का वह शुभ मुहूर्त था।
  6. राजा ने कहा, ‘फांसी पर मुझे चढ़ाओ।’

उत्तर :

  1. सही
  2. सही
  3. गलत
  4. गलत
  5. गलत
  6. सही

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. नगर के पूर्व में कौन-सा शिष्य गया?
  2. किस शिष्य ने उसी नगर में रहने का निश्चय किया?
  3. भिश्ती ने किसे दोषी बताया?
  4. अंत में फांसी पर कौन चढ़ा?

उत्तर :

  1. नारायणदास
  2. गोवर्धनदास ने
  3. कसाई को
  4. राजा

सही वाक्यांश चुनकर निम्नलिखित विधान पूर्ण कीजिए :

प्रश्न 1.
महंत ने गोवर्धनदास से कहा था कि …..
(अ) वह वहाँ रहते हुए सावधान रहे।
(ब) वह लालच में अधिक मिठाई नखाए।
(क) कभी संकट पड़े तो वह उन्हें याद करे।
उत्तर :
महंत ने गोवर्धनदास से कहा था कि कभी संकट पड़े तो वह उन्हें याद करे।

प्रश्न 2.
कारीगर ने दीवार गिरने का आरोप ….
(अ) भिश्ती पर लगाया।
(ब) चूनेवाले पर लगाया।
(क) कसाई पर लगाया।
उत्तर :
कारीगर ने दीवार गिरने का आरोप चूनेवाले पर लगाया।

प्रश्न 3.
गुरु ने सिपाहियों से कहा …..
(अ) “मुझे अपने शिष्य को अंतिम उपदेश देने दो।”
(ब) “मुझे अपने शिष्य की अंतिम इच्छा जानने दो।”
(क) “मुझे अपने शिष्य को स्वर्ग में जाने का उपाय बताने दो।”
उत्तर :
गुरु ने सिपाहियों से कहा “मुझे अपने शिष्य को अंतिम उपदेश देने दो।”

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निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
बनिये ने अपराधी किसे बताया?
A. कारीगर को
B. चूनेवाले को
C. भिश्ती को
D. गडरिये को
उत्तर :
A. कारीगर को

प्रश्न 2.
फांसी का हुक्म किसे हुआ था?
A. बनिये को
B. चूनेवाले को
C. कारीगर को
D. कोतवाल को
उत्तर :
D. कोतवाल को

प्रश्न 3.
स्वर्ग जाने की जल्दी किसे थी?
A. गोवर्धनदास को
B. महंत को
C. मंत्री को
D. राजा को
उत्तर :
D. राजा को

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. नाहक
  2. कसूर
  3. हुज्जत
  4. मूर्ख
  5. आफ़त
  6. प्रार्थना
  7. दशा
  8. सबब

उत्तर :

  1. व्यर्थ
  2. दोष
  3. दलील
  4. नासमझ
  5. मुश्किल
  6. बिनती
  7. स्थिति
  8. कारण

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निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. सुंदर
  2. आनंद
  3. उचित
  4. मोटा
  5. नौकर

उत्तर :

  1. असुंदर
  2. शोक
  3. अनुचित
  4. पतला
  5. सेठ

निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. बेकसुर
  2. कुंशडीन
  3. पूजारि
  4. फरीयादि

उत्तर :

  1. बेकसूर
  2. कुंजडिन
  3. पुजारी
  4. फरियादी

निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए:

प्रश्न 1.

  1. अंधेरी नगरी के लोगों में आत्मीयता का नामोनिशान न था।
  2. लोग अपनी मूर्खता के कारण बेमौत मारे जाते थे।
  3. यहाँ अच्छे-बुरे में कोई अंतर नहीं था।
  4. सही समय पर शिष्य को गुरुजी का स्मरण हो आया।

उत्तर :

  1. आत्मीयता
  2. मूर्खता
  3. अंतर
  4. स्मरण

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निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. गुरु शिष्य को अंतिम उपदेश देने के लिए कुछ देर दूर ले गए।
  2. बाज़ार में भाजी और मिठाई आदि सभी चीजें एक ही भाव से बिक रही थी।
  3. एक दिन महंत और उनके दो शिष्य अंधेरी नगरी में आ पहुंचे।
  4. वहाँ मूर्ख राजा का राज्य चलता था।

उत्तर :

  1. अंतिम
  2. सभी
  3. अंधेरी
  4. मूर्ख

निम्नलिखित वाक्यों के अर्थ की दृष्टि से प्रकार लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. मैंने गुरुजी का कहना न माना।
  2. गुरुजी आ जाए तो अच्छा हो।
  3. कृपया मेरी सहायता कीजिए।
  4. क्यों रे गड़रिए, ऐसी बड़ी भेड़ क्यों बेची?

उत्तर :

  1. निषेधवाचक वाक्य
  2. इच्छावाचक वाक्य
  3. विधिवाचक वाक्य
  4. प्रश्नवाचक वाक्य

निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. मठ का मुखिया
  2. मशक में पानी भरकर घर-घर पहुंचानेवाला
  3. नगर का बड़ा पुलिस अफसर

उत्तर :

  1. महंत
  2. भिश्ती
  3. कोतवाल

निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए !

  • अंधेर होना – अन्याय होना वाक्य : रिश्वत खोरी इतनी है कि जहाँ देखो वहीं अंधेर है।
  • मोल लेना – दाम देकर खरीदना वाक्य : मैंने चालीस रुपए में आधा किलो अंगूर मोल लिए।
  • गोल-माल होना – गड़बड़ होना वाक्य : बैंक के खाते में कुछ गोल-माल जरूर हुआ है।

निम्नलिखित कहावतों के अर्थ स्पष्ट कीजिए :

  • अंधेरी नगरी, चौपट राजा टके सेर भाजी, टके सेर खाजा अर्थ : मूर्ख शासक के शासन में अन्याय और अव्यवस्था होती हैं, वहाँ भले-बुरे सब एकसमान समझे जाते हैं।
  • यथा राजा तथा प्रजा अर्थ : जैसा राजा होता है, ठीक वैसी ही प्रजा होती है। राजा अगर नीतिमान होता है, तो उसकी प्रजा भी नीतिपूर्ण होती है।

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निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. अनुभव
  2. प्रार्थना
  3. निर्णय
  4. निर्दोष
  5. कमजोर
  6. निरपराध
  7. बेकसूर
  8. अव्यवस्था
  9. व्यवस्था
  10. अन्याय
  11. यथास्थान
  12. यथासंभव
  13. संभव
  14. अनुचित
  15. बेमौत
  16. असुंदर
  17. अशोक
  18. प्रत्येक
  19. नासमझ

उत्तर :

  1. अनुभव – अनु + भव
  2. प्रार्थना – प्र + अर्थना
  3. निर्णय – नि: (निस) + नय
  4. निर्दोष – नि: (निर) + दोष
  5. कमज़ोर – कम + जोर
  6. निरपराध – नि: (निर) + अपराध
  7. बेकसूर – बे + कसूर
  8. अव्यवस्था – अ + व्यवस्था
  9. व्यवस्था – वि + अवस्था
  10. अन्याय – अ + न्याय
  11. यथास्थान – यथा + स्थान
  12. यथासंभव – यथा + संभव
  13. संभव – सम् + भव
  14. अनुचित – अन् + उचित
  15. बेमौत – बे + मौत
  16. असुंदर – अ + सुंदर
  17. अशोक – अ + शोक
  18. प्रत्येक – प्रति + एक
  19. नासमझ – ना + समझ

निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. फरियादी
  2. चूनेवाला
  3. अपराधी
  4. मिठाई
  5. दोषी
  6. अंतिम
  7. कुंजडिन
  8. दलीलबाज़ी
  9. नीतिमान
  10. शीर्षक
  11. चतुराई
  12. असलियत
  13. मूर्खता
  14. उचित
  15. अंधेरी

उत्तर :

  1. फरियादी – फरियाद + ई
  2. चूनेवाला – चूना + वाला
  3. अपराधी – अपराध + ई
  4. मिठाई – मीठा + ई
  5. दोषी – दोष + ई
  6. अंतिम – अंत + इम
  7. कुंजड़िन – कुजड़ा + इन
  8. दलीलबाज़ी – दलील + बाजी
  9. नीतिमान – नीति + मान
  10. शीर्षक – शीर्थ + क
  11. चतुराई – चतुर + आई
  12. असलियत – असल + इयत
  13. मूर्खता – मूर्ख + ता
  14. उचित – उच + इत
  15. अंधेरी – अंधेर + ई

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अँधेरी नगरी Summary in Gujarati

ગુજરાતી ભાવાર્થ :

મહંત અને શિષ્ય: એક મહંત પોતાના બે શિષ્યો સાથે અંધેરી નગરીમાં આવે છે. શિષ્યોનાં નામ નારાયણદાસ અને ગોવર્ધનદાસ છે. મહંત અને શિષ્યોને નગર ખૂબ સુંદર લાગ્યું. ભિક્ષા પણ સારી મળશે. ગુરુની સૂચના પ્રમાણે નારાયણદાસ નગરની પૂર્વ તરફ અને ગોવર્ધનદાસ પશ્ચિમ તરફ ભિક્ષા માગવા ગયા.

ગોવર્ધનદાસ બજારમાં બજારમાં ભાજી અને મીઠાઈ બધી ચીજો એક જ ભાવથી વેચાતી હતી. ભાજી પણ ટકે શેર અને ખાજા પણ ટકે શેર! ગોવર્ધનદાસને નગર ખૂબ ગમ્યું. પૂછવામાં આવતાં ખબર પડી કે નગરનું નામ “અંધેરી નગરી’ અને રાજાનું નામ “ચૌપટ’ રાજા છે.

મહંતની સલાહ: નગરની બાબતમાં માહિતી મળતાં મહંતે ત્યાં ન રહેવાનો નિશ્ચય કર્યો, પરંતુ ગોવર્ધનદાસે ત્યાં જ રહેવાનું નક્કી કર્યું. મહંતે જતાં જતાં કહ્યું કે મારી વાત ન માની તો પસ્તાઈશ. પણ સંકટ પડે તો મને યાદ કરજે. મહંત નારાયણદાસને લઈને ચાલ્યા ગયા.

ચૌપટ રાજાનો ચૌપટ ન્યાયઃ રાજાના દરબારમાં એક ફરિયાદી આવ્યો. એની બકરી કલ્લુ વાણિયાની દીવાલ પડી જતાં દબાઈને મરી ગઈ હતી. એ ન્યાય ઇચ્છતો હતો. રાજાના આદેશથી કલૂ વાણિયાને પકડીને લાવવામાં આવ્યો. કલૂએ પોતાને નિર્દોષ જણાવી કારીગરને દોષી ઠરાવ્યો. તેણે દીવાલ કમજોર બનાવી હતી.

કલૂને છૂટો કરી કારીગરને હાજર કરવામાં આવ્યો. તેણે ચૂનાવાળાને દોષી ઠેરવ્યો. તેણે ખરાબ ચૂનો બનાવ્યો હતો. ચૂનાવાળાએ ભિસ્તીને દોષી ઠરાવ્યો, જેણે વધારે પાણી નાખીને ચૂનો કમજોર બનાવ્યો હતો. ત્યારે ભિસ્તીને પકડીને લાવવામાં આવ્યો. ભિસ્તીએ કસાઈને દોષી ઠરાવ્યો. એણે મશક મોટી બનાવી હતી. ભિસ્તીએ કહ્યું કે ભરવાડે આટલી મોટી બકરી વેચી, જેથી મશક મોટી બની ગઈ. ભિસ્તીને છોડીને ભરવાડને લાવવામાં આવ્યો. તેણે ખુલાસો કર્યો કે કોટવાલની સવારી આવવાને લીધે નાની-મોટી બકરીનો ખ્યાલ રહ્યો નહિ. મારો કોઈ દોષ નથી.

કોટવાલ ફસાયોઃ અંતે કોટવાલને દીવાલ પડી જવાનો અપરાધી ગણવામાં આવ્યો. રાજાએ કોટવાલને ફાંસી આપવાનો હુકમ કર્યો. બિચારો ગોવર્ધનદાસ ગોવર્ધનદાસ મીઠાઈ ખાવામાં મસ્ત હતો ત્યારે તેને પકડવા ચાર સિપાઈઓ આવ્યા. તેમણે કહ્યું કે કોટવાલને ફાંસી અપાઈ રહી હતી પણ તે દૂબળો-પાતળો છે એટલે ફાંસીનો ફંદો ઢીલો પડી રહ્યો છે. હવે એની જગ્યાએ તારે ફાંસી પર ચડવાનું છે. કારણ કે તારું ગળે ફાંસીના ફંદામાં બરાબર બેસી જાય છે. સિપાઈઓ ગોવર્ધનદાસને પકડીને લઈ ગયા.

ગુરુનું સ્મરણઃ હવે ગોવર્ધનદાસને સમજાયું કે ગુરુની આજ્ઞા ન માનવાનું આ ફળ છે. તે ગુરુજીને યાદ કરવા લાગ્યો. સંજોગવસાત તે વખતે જ મહંત ત્યાં આવી પહોંચ્યા. ગોવર્ધનદાસે તેમને પોતાને ફાંસીથી બચાવી લેવાની વિનંતી કરી.

ગુરુમંત્ર આપવાને બહાને બચાવવાનો મંત્ર: ગુરુ શિષ્યને અંતિમ ઉપદેશ આપવા માટે થોડે દૂર લઈ ગયા. તેમણે તેના કાનમાં કંઈક કહ્યું. શિષ્યની મુક્તિ અને રાજાને ફાંસી : મહેતે હઠ કરી કે ગોવર્ધનદાસને બદલે તેઓ ફાંસી પર ચડશે. ગોવર્ધનદાસે કહ્યું, “મને ફાંસી પર ચડાવવા માટે જ લાવવામાં આવ્યો છે. એટલે હું જ ફાંસી પર ચડીશ.” બંનેમાં આ પ્રકારની ચર્ચા થઈ રહી હતી ત્યારે રાજા, મંત્રી અને કોટવાલ ત્યાં આવી પહોંચ્યા.

મહંતે રાજાને કહ્યું, “આ શુભ મુહૂર્તમાં જે ફાંસી પર ચડશે, તે સીધો સ્વર્ગમાં જશે.” એ જાણીને મંત્રી ફાંસી પર ચડવા તૈયાર થયા. કોટવાલે કહ્યું કે સજા મને મળી છે એટલે હું જ ફાંસી પર ચડીશ. રાજા બોલ્યો, “મારા જીવતાં બીજું કોણ સ્વર્ગે જઈ શકે છે? ફાંસી પર મને ચડાવો.” નોકરીએ રાજાને ફાંસી પર ચડાવી દીધો. આ રીતે મહંતે યુક્તિપૂર્વક પોતાના શિષ્ય ગોવર્ધનદાસને બચાવી લીધો.

GSEB Solutions Class 9 Hindi Chapter 18 अँधेरी नगरी

अँधेरी नगरी Summary in English

The head of the monastery and his disciple : The head of the monastery arrives to Andheri Nagari with his two disciples. The names of the disciples are Narayandas and Govardhandas. The head of the monastery and the disciples like very beautiful town. They hope that they will get begging too well. According to their master’s (guru’s) instruction Narayandas went towards east and Govardhandas went towards west to beg in the town.

Govardhandas in a market : In the market vegetables and sweets were sold at the same price. Vegetables were sold at take sher and khaja (a sweet) was also sold at take sher (three palse for 500 grams).

Advice of the head of the monastery : When the head of the monastery came to know about the town he decided not to stay there, but Govardhandas decided to stay there. The head of the monastery warned him that he would have to regret if he stayed there. He also told him that if he had any difficulty (trouble), he might go for help to him. The head of the monastery went away with Narayandas.

The chaupat justice of the chaupat king: Once a man came to the court to complain. His goat was killed when a wall of Kallu Bania’s house fell down. He wanted justice from the king The king summoned Kallu to the court. Kallu proved him innocent and the labourer (mason) guilty, because he had made the wall weak.

Kallu was released and the mason was presented in the court. He proved the lime-man guilty, because he had prepared the worst lime. The lime-man proved the water-man (bhisti) guilty because he hade prepared the lime worst by pouring more water. Then the water-man was brought to the court. The water-man proved the butcher guilty, because he had made the leather bag (mashak) big.

The water-man said that the shepherd had sold a big goat so the water bag was made big The water-man was released and the shepherd was brought to the court. He made the clarification that as there was a police officer’s procession, he could not keep in his mind about a small – big goat. So he was Innocent.

The police officer was trapped : At last the police officer was considered guilty. The king sentenced him to death.

Helpless Govardhandas : While Govardhandas was engrossed in eating sweets, four policemen came to arrest him. They said that they were going to hang the police officer, but they could not because he was thin so the noose was loose for him. Now he would be hung in his place because his neck was quite fit for noose. They arrested Govardhandas.

Remembrance of guru (master): Now Govardhandas realised that it was the result of disobedience of guru (master). Luckily he arrived there. Govardhandas requested him to save him from handing down.

Saving mantra in a pretext of gurumantra: The guru (master) took the disciple faraway to give him sermon. He said something in his ear.

Freedom to the disciple and death by hanging to the king: The master obstinated that he would die by hanging in place of Govardhandas. Govardhandas said, “I have been brought here to hang, therefore I will die by hanging” Meanwhile the king, the minister and the police officer arrived there.

The master (mahant) said. “The person who will be hung in this auspicious time, will straight go to the heaven. The police officer said that as he was given the punishment he would hang The king said, “Who can go to heaven when I am alive? Let me be hung.” The servants hung the king In this way the master (mahant) saved his disciple by using a trick.

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अँधेरी नगरी Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :

अंधेरी नगरी का अर्थ है ऐसा शहर जहाँ अजान का बोलबाला है। वहाँ न कोई कायदा है और न कोई कानून। यहाँ अच्छे-बुरे और सच-झूठ में कोई अंतर नहीं है। राजा और प्रजा दोनों मूर्ख हैं। सभी चीजें एक ही भाव में बेची जाती है। एक महंत और उनके दो शिष्य इस अंधेरी नगरी में आ पहुंचते हैं। उन्हीं के अनुभव इस एकांकी में दिखाये गए हैं।

पात्र-परिचय :

  1. महंत
  2. गोवर्धनदास : महंत के शिष्य
  3. नारायणदास : महंत के शिष्य
  4. चौपट राजा : अंधेरी नगरी का राजा
  5. कुंजडिन, हलवाई, फरियादी, कल्लू बनिया, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कसाई, गडरिया, कोतवाल, सिपाही।

पाठ का सार :

महंत और शिष्य : एक महंत अपने दो शिष्यों के साथ अंधेरी नगरी में आते हैं। शिष्यों के नाम हैं – नारायणदास और गोवर्धनदास। महंत और शिष्यों को नगर बहुत सुंदर लगा। भिक्षा अच्छी मिलेगी। गुरु के निर्देश पर नारायणदास नगर के पूर्व तरफ और गोवर्धनदास पश्चिम की तरफ भिक्षा लेने चले।

गोवर्धनदास बाजार में : बाजार में भाजी और मिठाई आदि सभी चीजें एक ही भाव से बिक रही थीं। भाजी भी टका सेर और खाजा भी टका सेर। गोवर्धनदास को नगर बहुत अच्छा लगा। पूछने पर पता चला कि नगर का नाम ‘अंधेरी नगरी’ और राजा का नाम ‘चौपट राजा’ है।

महंत की सलाह : नगर के बारे में जानकारी मिलने पर महंत ने वहाँ न रहने का निश्चय किया। परंतु गोवर्धनदास ने वहीं रहने का निर्णय किया। महंत ने जाते-जाते कहा – “मेरी बात नहीं मानी तो पछताएगा, पर संकट पड़े तो मुझे याद करना।” महंत नारायणदास को लेकर चले गए।

चौपट राजा का चौपट न्याय : राजा के दरबार में एक फरियादी आया। उसकी बकरी कल्लू बनिये की दीवार गिर जाने से दबकर मर गई थी। वह न्याय चाहता था। राजा के आदेश पर कल्लू बनिये को पकड़कर लाया गया। कल्लू ने स्वयं को निर्दोष बताकर कारीगर को दोष दिया। उसीने कमजोर दीवार बनाई थी।

कल्लू को रिहा कर कारीगर को हाजिर किया गया। उसने चूनेवाले को दोषी बताया जिसने खराब चूना बनाया था। चूनेवाले ने भिश्ती को दोषी बताया, जिसने पानी ज्यादा डालकर चूने को कमजोर कर दिया था। तब भिश्ती को पकड़कर लाया गया। भिश्ती ने कसाई को दोषी बताया जिसने मशक बड़ी बना दी थी। भिश्ती ने कहा कि गड़रिये ने इतनी बड़ी भेड़ बेची, जिससे मशक बड़ी बन गई। भिश्ती को छोड़कर गड़रिये को लाया गया। उसने खुलासा किया कि कोतवाल की सवारी आने के कारण उसे छोटी-बड़ी भेड़ का ख्याल ही नहीं रहा। उसका कोई कसूर नहीं है।

कोतवाल फैसा : अंत में दीवार गिरने का अपराधी कोतवाल को ठहराया गया। राजा ने उसे फांसी देने का हुक्म दिया। बेचारा गोवर्धनदास : गोवर्धनदास मिठाई खाने में मस्त था कि तभी उसे पकड़ने चार सिपाही आए। उन्होंने उसे बताया कि कोतवाल को फांसी दी जा रही थी पर वह दुबला-पतला है। इसलिए फांसी का फंदा उसे ढीला पड़ रहा था। अब उसकी जगह तुमें फांसी पर चढ़ना है, क्योंकि तुम्हारा गला फांसी के फंदे में फिट हो जाएगा। सिपाही गोवर्धनदास को पकड़कर ले गए।

गुरु का स्मरण : अब गोवर्धनदास की समझ में आया कि यह गुरु की आज्ञा न मानने का फल है। उसने गुरुजी का स्मरण किया। संयोग से उसी समय महंत वहां पहुंच गए। गोवर्धनदास ने फांसी से बचाने की प्रार्थना की।

गुरुमंत्र देने के बहाने बचाने का मंत्र : गुरु शिष्य को अंतिम उपदेश देने के लिए उसे कुछ दूर ले गए और उन्होंने उसके कान में कुछ कहा।

शिष्य की मुक्ति और राजा को फाँसी : महंत ने हठ की कि गोवर्धनदास के बदले वे फांसी पर चढ़ेंगे। गोवर्धनदास ने कहा – नहीं, फाँसी पर चढ़ाने के लिए, मुझे लाया गया है। इसलिए मैं ही फांसी पर चढूंगा। दोनों में इस तरह की हुज्जत होने लगी। तभी राजा, मंत्री और कोतवाल वहाँ आ गए।

महंत ने राजा को बताया कि इस शुभ मुहूर्त में जो फांसी पर चढ़ेगा, वह सीधा स्वर्ग में जाएगा। यह जानकर मंत्री ने फांसी पर चढ़ना चाहा। कोतवाल ने कहा कि सजा उसे मिली है, इसलिए वही फांसी पर चढ़ेगा। राजा बोला, “मेरे जीते जी और कौन स्वर्ग जा सकता है? फांसी पर मुझे चढ़ाओ।” नौकरों ने राजा को फांसी पर चढ़ा दिया। इस तरह महंत ने युक्तिपूर्वक अपने शिष्य गोवर्धनदास को बचा लिया।

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अँधेरी नगरी शब्दार्थ :

  • महंत – मठ का प्रधान, मुखिया।
  • कुजडिन – शाक भाजी बेचनेवाली।
  • खाजा – एक मिठाई।
  • टका – पुराने दो पैसे का सिक्का।
  • भिश्ती – मशक में पानी भरकर घर-घर पहुंचानेवाला।
  • मशक – चमड़े का बड़ा थैला।
  • कसूर – अपराध।
  • कसाई – पशु को मारकर मांस बेचनेवाला।
  • गड़रिया – भेड़-बकरी चरानेवाला।
  • कोतवाल – नगर का बड़ा पुलिस अफसर, जिसके अधीन वहाँ के थाने होते हैं।
  • अर्ज करना – निवेदन करना।
  • नाहक – व्यर्थ।
  • बेकसूर – बेगुनाह, निरपराध।
  • हुज्जत करना – दलीलबाजी करना।
  • दशा – हालत, स्थिति।
  • सबब – कारण।

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