GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

Gujarat Board GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

Gujarat Board Textbook Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
प्रसादजी ने ‘ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति’ किसे कहा?
उत्तर :
काशी के उत्तर में धर्मचक्र विहार था। उसे मौर्य और गुप्त सम्राटों ने बनवाया था। वह उनकी कीर्ति का प्रतीक था, लेकिन अब वह खंडहर हो चुका था। उस भवन के शिखर खंडित हो चुके थे और अब वहाँ घास और झाड़ियाँ उग आई थीं। फिर भी उन टूटी हुई दीवारों और ईंटों में भारतीय शिल्पकला की भव्य झलक देखी जा सकती थी। इसे ही प्रसादजी ने ‘ईंटों के ढेर में बिखरी हुई भारतीय शिल्प की विभूति’ कहा है।

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प्रश्न 2.
अकबर ने अष्टकोण मंदिर कब और कहाँ बनवाया?
उत्तर :
ममता ने थके, हारे और भयभीत हुमायूँ को रात में अपनी झोंपड़ी में आश्रय दिया था। उसकी उदारता के कारण ही हुमायूँ के प्राणों की रक्षा हुई थी। वहाँ से लौटते समय हुमायूँ ने अपने साथी मिरज़ा को उस विधवा की झोंपड़ी के स्थान पर नया घर बनवाने का आदेश दिया था। बरसों बाद जब हुमायूँ का पुत्र अकबर बादशाह बना तो उसे उस घटना का पता चला। उसने सोचा कि जिस जगह उसके पिता के प्राणों की रक्षा हुई थी, वहाँ एक स्मारक बनाना चाहिए। इस प्रकार पिता की याद में ममता की झोंपड़ी की जगह अकबर ने सैंतालीस वर्षों के बाद अष्टकोण मंदिर बनवाया।

प्रश्न 3.
ममता का चरित्र-चित्रण कीजिए।
अथवा
कहानी के आधार पर मुख्य पात्र ममता के बारे में कहिए।
उत्तर :
ममता एक विधवा ब्राह्मण युवती थी। लोभ उसे छू तक न गया था। उसने स्वर्ण रूप में शेरशाह द्वारा दिया हुआ उत्कोच ठुकरा दिया था। उसे ईश्वर, धर्म और हिन्दू जाति पर पूरा भरोसा था। ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध व्यवहार करना उसे पसंद नहीं था। वह गीता का पाठ करती थी। अतिथि को आश्रय देना वह अपना धर्म समझती थी। उसके उज्ज्वल चरित्र और स्नेहपूर्ण व्यवहार के कारण वह आसपास के गाँवों की स्त्रियों में लोकप्रिय बन गई थी।

प्रश्न 4.
शहंशाह हुमायूँ के आदेश का किस प्रकार पालन हुआ? वह सही था या गलत? अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
शहंशाह हुमायूँ ने मुसीबत में ममता की झोंपड़ी में आश्रय लिया था, इसलिए उसकी जगह पक्का घर बनवा देने का आदेश दिया था। हुमायूँ के बाद उसका बेटा अकबर शहंशाह बना। उसने उस झोंपड़ी की जगह एक अष्टकोणीय मंदिर बनवाया। उस गगनचुंबी विशाल मंदिर में एक शिलालेख पर उसके निर्माता शहंशाह अकबर और अपने पिता हुमायूँ का नाम अंकित था। ममता का कहीं नाम तक नहीं था। पिता का स्मारक बनवाकर अकबर ने सारा श्रेय खुद लेना चाहा। दया की जिस देवी ममता ने उसके पिता को शरण दी थी, उसकी अकबर ने जरा भी परवाह नहीं की। यह सरासर गलत था। मेरे विचार से, इस तरह उसने ममता के प्रति अन्याय किया।

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प्रश्न 5.
‘ममता’ कहानी के अंतिम वाक्य को हटाकर कहानी का अंत अपने अनुसार कीजिए।
उत्तर :
वहाँ एक अष्टकोण मंदिर बना और उस पर शिलालेख लगाया गया –
“यह वह स्थान है, जहाँ किसी समय ‘ममता’ नामक एक दयालु स्त्री की झोंपड़ी थी। विपत्ति के समय उस महिला ने शहंशाह हुमायूँ को एक रात उस झोंपड़ी में आश्रय दिया था। हुमायूँ के पुत्र अकबर ने अपने पिता को आश्रय देनेवाली दया की उस देवी ममता की स्मृति में यह मंदिर बनवाया।”

प्रश्न 6.
चूड़ामणि विपद के लिए क्या आयोजन करना चाहते थे?
उत्तर :
चूड़ामणि समझ गए थे कि रोहतास दुर्ग का पतन बहुत करीब है, इसलिए उनका मंत्रित्व जल्दी ही समाप्त होनेवाला है। विपत्ति के उन दिनों के लिए ही उन्होंने शेरशाह से उत्कोच के रूप में एक बड़ी स्वर्णराशि स्वीकार की थी। इसी राशि से वे अपनी विधवा पुत्री ममता का भविष्य सुरक्षित करना चाहते थे। भावी विपद के लिए यही उनका आयोजन था।

प्रश्न 7.
चूड़ामणि ने ममता को ‘मूर्ख’ क्यों कहा?
उत्तर :
चूड़ामणि ने बेटी ममता के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शेरशाह से उत्कोच में बड़ी स्वर्णराशि ली थी। ममता की दृष्टि में म्लेच्छ से उत्कोच लेना अनीति और अधर्म था। उस स्वर्णराशि में उसे अनर्थ ही अनर्थ दिखाई देता था। उसने पिता से अनुरोध किया कि वे उस स्वर्णराशि को जल्दी से जल्दी वापस कर दें पुत्री की यह नादानी और अव्यावहारिकता देखकर चूड़ामणि ने उसे ‘मूर्ख’ कहा।

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प्रश्न 8.
हुमायूँ को आश्रय देने में ममता को हिचकिचाहट क्यों हो रही थी?
उत्तर :
हुमायूँ के मुँह से शेरशाह का नाम सुनकर ममता का हृदय घृणा से भर गया। शेरशाह का छलकपट और क्रूर व्यवहार उसने देखा था। उससे आश्रय चाहनेवाला व्यक्ति भी शेरशाह जैसा ही क्रूर और स्वार्थी लग रहा था। ममता ने सोचा कि ये विधर्मी दया के पात्र नहीं है। उसे संदेह हुआ कि यह मुगल भी शेरशाह की तरह छल कर सकता है। इसलिए हुमायूँ को आश्रय देने में उसे पहले हिचकिचाहट हो रही थी।

प्रश्न 9.
ममता ने पथिक को आश्रय क्यों दिया?
उत्तर :
ममता विधर्मियों को दया का पात्र नहीं समझती थी, इसलिए आरंभ में उसे पथिक को आश्रय देने में हिचकिचाहट हुई। परंतु फिर उसने सोचा कि वह ब्राह्मणी है और उसका धर्म है अतिथि को देव मानना। उसे अपने अतिथि-धर्म का पालन करना चाहिए। यह दया नहीं है, यह तो कर्तव्य है। यदि यह छल भी करेगा तो मेरा क्या बिगड़नेवाला है? सब भले ही अपना धर्म छोड़ दें, वह अपना धर्म क्यों छोड़े? कर्तव्यपालन की इसी भावना से प्रेरित होकर ममता ने पथिक को आश्रय दिया।

प्रश्न 10.
मरणासन्न ममता ने अश्वारोही से क्या कहा?
उत्तर :
मरणासन्न ममता ने अश्वारोही से कहा कि मैं नहीं जानती कि वह बादशाह था या साधारण मुगल। परंतु वह इसी झोंपड़ी में रहा था। वह मेरा घर बनवाने की आज्ञा देकर गया था। आज मैं इस झोंपड़ी को छोड़कर अपने चिरविश्रामगृह में जा रही हूँ। अब तुम यहाँ मकान बनवाओ या महल, यह कहते-कहते उसके प्राण-पक्षी उड़ गए।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में लिखिए :

प्रश्न 1.
ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत क्यों थी?
उत्तर :
विधर्मी शेरशाह के आततायी सैनिकों ने ममता के पिता का वध किया था। उसी घटना के कारण ममता को प्रत्येक लड़नेवाले सैनिक से नफरत थी।

प्रश्न 2.
घोड़े पर सवार होते हुए पथिक ने मिरज़ा से क्या कहा?
उत्तर :
घोड़े पर सवार होते हुए पथिक ने मिरज़ा से कहा कि उस स्त्री को मैं कुछ दे नहीं सका। इस स्थान पर उसका पक्का घर बनवा देना, क्योंकि मैंने विपत्ति में यहाँ विश्राम पाया है।

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प्रश्न 3.
किस बात से पता चलता है कि ममता सबके सुख-दुःख की सहभागिनी थी?
उत्तर :
गाँव की दो-तीन स्त्रियाँ वृद्धा और जर्जर शरीरवाली ममता की सेवा कर रही थीं। इससे पता चलता है कि ममता गाँववालों के सुख-दुःख की सहभागिनी थी।

प्रश्न 4.
मंत्री चूड़ामणि क्यों व्यथित थे?
उत्तर :
मंत्री चूड़ामणि की स्नेहपालिता, एकमात्र पुत्री ममता विधवा थी, जिसके लिए मंत्रीजी कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। इस चिंता के कारण वे व्यथित थे।

प्रश्न 5.
उत्कोच के बारे में पिता और पुत्री के दृष्टिकोण में क्या अंतर था?
उत्तर :
ममता की दृष्टि में पिता द्वारा लिया गया उत्कोच एक ब्राह्मण के लिए अनर्थ था। इसके विपरीत पिता उसे पुत्री के आपत्ति के समय उपयोगी मानते थे।

प्रश्न 6.
ममता ने मुगल को दूसरा आश्रय-स्थान खोजने के लिए क्यों कहा?
उत्तर :
शेरशाह से हारने पर भी मुगल उसीकी तरह क्रूर लग रहा था। उसके मुख पर रक्त की प्यास और निष्ठुरता झलक रही थी, इसलिए ममता ने मुगल को दूसरा आश्रय-स्थान खोजने के लिए कहा।

प्रश्न 7.
ममता ने पथिक को आश्रय क्यों दिया?
उत्तर :
ममता ब्राह्मणी थी और अतिथियों का देव मानकर सत्कार करना अपना कर्तव्य समझती थी। कर्तव्यपालन की इसी भावना से प्रेरित होकर उसने पथिक को आश्रय दिया।

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प्रश्न 8.
अश्वारोही ने ममता की झोंपड़ी देखकर क्या कहा?
उत्तर :
अश्वारोही ने ममता की झोंपड़ी देखकर कहा कि मिरज़ा ने जो चित्र बनाकर दिया है, वह इसी जगह का होना चाहिए। वह बुढ़िया तो मर गई होगी, अब किससे पूर्छ कि एक दिन शहंशाह हुमायूँ किस छप्पर के नीचे बैठे थे।

प्रश्न 9.
अष्टकोण मंदिर के शिलालेख पर क्या लिखा था?
उत्तर :
अष्टकोण मंदिर के शिलालेख पर ये वाक्य खुदे थे, “सातों देशों के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था। उनके पुत्र अकबर ने उनकी स्मृति में यह विशाल गगनचुंबी मंदिर बनवाया।”

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए :

प्रश्न 1.
ममता की झोंपड़ी में आश्रय माँगने कौन आया?
उत्तर :
चौसा युद्ध में शेरशाह से विपन्न होकर शहंशाह हुमायूँ आश्रय माँगने के लिए ममता की झोपड़ी में आया।

प्रश्न 2.
ममता कौन थी?
उत्तर :
ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र विधवा पुत्री थी।

प्रश्न 3.
ममता ने उत्कोच में मिली स्वर्णराशि का स्वीकार क्यों नहीं किया?
उत्तर :
ममता ने उत्कोच में मिली स्वर्णराशि का स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उसमें उसे अर्थ नहीं, ‘अनर्थ’ लगा।

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प्रश्न 4.
डोलियों में कौन थे?
उत्तर :
डोलियों में महिलाओं के वेश में पठान सैनिक थे।

प्रश्न 5.
दुर्ग से निकलकर ममता ने कहाँ आश्रय लिया?
उत्तर :
दुर्ग से निकलकर ममता ने काशी के उत्तर में स्थित एक पुराने स्तूप के खंडहर में आश्रय लिया।

(6) ममता ने किस धर्म का पालन किया?
उत्तर :
ममता ने ‘अतिथि देव का सत्कार’ करने के धर्म का पालन किया।

(7) हुमायूँ ने मिरज़ा को क्या आदेश दिया?
उत्तर :
हुमायूँ ने मिरज़ा को ममता के लिए घर बनवा देने का आदेश दिया।

सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :

(1) ममता के लिए किसी वस्तु का अभाव संभव न था, क्योंकि …
(अ) वह मगध की राजकुमारी थी।
(ब) वह मगध के महाराज की पुत्रवधू थी।
(क) वह मंत्री चूड़ामणि की अकेली दुहिता थी।
उत्तर :
ममता के लिए किसी वस्तु का अभाव संभव न था, क्योंकि वह मंत्री चूड़ामणि की अकेली दुहिता थी

(2) मुगल के प्राणों की रक्षा हुई, क्योंकि …
(अ) ममता ने उसे आश्रय दिया।
(ब) उसके साथी मौके पर पहुंच गए थे।
(क) शत्रु के सैनिक उसे ढूँढ़ नहीं पाए।
उत्तर :
मुगल के प्राणों की रक्षा हुई, क्योंकि ममता ने उसे आश्रय दिया

(3) ममता की दृष्टि में उसका धर्म था …
(अ) नित्य पूजा-पाठ करना।
(ब) निराश्रित को आश्रय देना।
(क) अतिथिदेव का सत्कार।
उत्तर :
ममता की दृष्टि में उसका धर्म था अतिथिदेव का सत्कार

(4) ममता मृगदाव में चली गई, ताकि …
(अ) वह हुमायूँ के साथियों की दृष्टि में न पड़े।
(ब) उसके विश्राम में दखल न पड़े।
(क) वह वहाँ आनेवाले लोगों से मिल सके।
उत्तर :
ममता मृगदाव में चली गई, ताकि वह हुमायूँ के साथियों की दृष्टि में न पड़े

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(5) ममता ने सुना था कि पथिक ने …
(अ) सेवक को उसके लिए घर बनवाने की आज्ञा दी थी।
(ब) उसकी झोंपड़ी खुदवाने का आदेश दिया था।
(क) चलते-चलते ‘धन्यवाद’ शब्द कहा था।
उत्तर :
ममता ने सुना था कि पथिक ने सेवक को उसके लिए घर बनवाने की आज्ञा दी थी

(6) ममता को अपनी झोंपड़ी टूट जाए इसकी परवाह नहीं थी, क्योंकि …
(अ) गाँववालों ने उसके रहने की नई व्यवस्था कर दी थी।
(ब) वह बहुत पुरानी हो गई थी।
(क) अब वह अपने चिर-विश्रामगृह में जा रही थी।
उत्तर :
ममता को अपनी झोंपड़ी टूट जाए इसकी परवाह नहीं थी, क्योंकि अब वह अपने चिर-विश्रामगृह में जा रही थी

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए :
(1) मंत्री चूड़ामणि की दुहिता का नाम …
A. समता
B. क्षमता
C. ममता
D. नम्रता
उत्तर :
C. ममता

(2) मंत्री चूड़ामणि के साथ चाँदी के थाल लेकर कितने सेवक आए थे?
A. पाँच
B. बारह
C. सात
D. दस
उत्तर :
D. दस

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(3) पिता द्वारा ली गई रिश्वत को ममता ने क्या कहा?
A. व्यर्थ
B. बोझ
C. कलंक
D. अनर्थ
उत्तर :
D. अनर्थ

(4) उत्कोच ठुकराने पर चूड़ामणि ने ममता को
A. बुद्धिमान
B. मूर्ख
C. स्वाभिमानी
D. मनमौजी
उत्तर :
B. मूर्ख

(5) ममता से आश्रय माँगनेवाला मुगल कौन था?
A. हुमायूँ
B. अकबर
C. जहाँगीर
D. औरंगजेब
उत्तर :
A. हुमायूँ

(6) ममता किस धर्म का पालन करना चाहती थी?
A. ब्राह्मणधर्म का
B. अतिथिधर्म का
C. हिन्दूधर्म का
D. मानवधर्म का
उत्तर :
B. अतिथिधर्म का

(7) ममता कहाँ छिप गई थी?
A. मृगदाव में
B. गुफा में
C. खंडहर में
D. जंगल में
उत्तर :
A. मृगदाव में

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(8) ममता की सेवा कौन कर रहा था?
A. उसकी सेविकाएँ
B. आदिवासी महिलाएँ
C. गाँव की स्त्रियाँ
D. वनवासी कन्याएँ
उत्तर :
C. गाँव की स्त्रियाँ

(9) चौसा युद्ध के कितने वर्ष बाद ममता की मृत्यु हुई?
A. बयालीस
B. चवालीस
C. पैंतालीस
D. सैंतालीस
उत्तर :
D. सैंतालीस

(10) अष्टकोण मंदिर पर बने शिलालेख में किसका नाम नहीं था?
A. ममता का
B. शेरशाह का
C. हुमायूँ का
D. अकबर का
उत्तर :
A. ममता का

कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(कर्तव्य, स्वर्ण, विडंबना, अनंत, दुश्चिंता, आयोजन)
उत्तर :
(1) वह विधवा थी; उसकी विडंबना का अंत कहाँ था?
(2) ऐसा प्रायः होता था, परंतु आज मंत्री के मन में बड़ी दुश्चिंता थी।
(3) स्वर्ण का पीलापन उस सुनहरी संध्या में विकीर्ण होने लगा।
(4) हे भगवान ! विपद के लिए इतना आयोजन!
(5) परंतु यह दया तो नहीं, कर्तव्य करना है।
(6) बुढ़िया के प्राण-पक्षी अनंत में उड़ गए।

दिए गए वाक्यों का परिवर्तन निर्देशानुसार भिन्न-भिन्न कालों में कीजिए :

(1) तेनालीराम के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं। (भूतकाल)
(2) सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में गई। (भविष्यकाल)
(3) प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो गया। (भविष्यकाल)
(4) हर्ष आज उपवास करेगा। (भूतकाल)
(5) मनोज अक्सर जागता रहता था। (वर्तमानकाल)
उत्तर :
(1) तेनालीराम के बारे में अनेक कहानियाँ प्रचलित थीं।
(2) सुबह होने पर हिना अपने बेटे को साथ लेकर उद्यान में जाएगी।
(3) प्रिया का गृहकार्य जल्दी समाप्त हो जाएगा।
(4) हर्ष ने आज उपवास किया।
(5) मनोज अक्सर जागता रहता है।

कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(कर्तव्य, स्वर्ण, विडंबना, अनंत, दुश्चिंता, आयोजन)
उत्तर :
(1) वह विधवा थी; उसकी विडंबना का अंत कहाँ था?
(2) ऐसा प्रायः होता था, परंतु आज मंत्री के मन में बड़ी दुश्चिंता थी।
(3) स्वर्ण का पीलापन उस सुनहरी संध्या में विकीर्ण होने लगा।
(4) हे भगवान ! विपद के लिए इतना आयोजन!
(5) परंतु यह दया तो नहीं, कर्तव्य करना है।
(6) बुढ़िया के प्राण-पक्षी अनंत में उड़ गए।

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शब्दों के अर्थ देकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :

(1) दुहिता – पुत्री
वाक्य : सीता जनक की दुहिता थी।

(2) वेदना – पीड़ा, दर्द
वाक्य : औषधि से मेरी वेदना दूर हो गई।

(3) उत्कोच – रिश्वत
वाक्य : सरकारी पद पर रहकर उसने कभी उत्कोच नहीं लिया।

(4) जीर्ण – पुराना, फटा
वाक्य : कीमती वस्त्र पहननेवाली महिला अब जीर्ण वस्त्र पहनती थी।

(5) आततायी – अत्याचारी
वाक्य : आततायी शांति और प्रेम की भाषा नहीं जानता।

नीचे लिखी कहानी एकवचन में है। इसे बहुवचन में लिखकर उच्च स्वर में पढ़िए :

एक चिड़िया पेड़ पर रहती थी। उसका घोंसला जंगल के पास था। घोंसले में उसके तीन बच्चे थे। वह अपने बच्चों के साथ रहती थी। एक दिन एक शिकारी वहाँ आया। वह चिड़िया को मारना चाहता था। चिड़िया ने बच्चों को घोंसले में सिर नीचा कर बैठने को कहा। वह खुद वहाँ से उड़ गई और पत्तों में छिपकर बैठ गई, शिकारी चिड़िया को न देख वहाँ से चला गया।
उत्तर :
अनेक चिड़ियाँ पेड़ पर रहती थीं। उनके घोंसले जंगल के पास थे। घोंसलों में उनके तीन बच्चे थे। वे अपने बच्चों के साथ रहती थीं। एक दिन कई शिकारी वहाँ आए। वे चिड़ियों को मारना चाहते थे। चिड़ियों ने बच्चों को घोंसलों में सिर नीचे कर बैठने को कहा। वे खुद वहाँ से उड़ गईं और पत्तों में छिपकर बैठ गईं। शिकारी चिड़ियों को न देख वहाँ से चले गए।

नीचे शरीर के कुछ अंगों के चित्र दिए गए हैं। प्रत्येक अंग से संबंधित तीन मुहावरे अर्थ सहित लिखें और वाक्य में प्रयोग कीजिए : 
GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 3
(1) आँख आना – आँख लाल होकर उसमें पीड़ा होना
वाक्य : आजकल शहर में आँखें आने की बीमारी फैली हुई है।

(2) आँख जाना – अंधा होना
वाक्य : आँखें जाने से वह पढ़ाई न कर सका।

(3) आँखें फेरना – उपेक्षा करना
वाक्य : समय बुरा आने पर मित्र भी आँखें फेर लेते हैं।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 4
(1) कान देना – ध्यान से सुनना
वाक्य : कृपया आप कान देकर मेरी बातें सुनें ।

(2) कान खाना-बकबक करना
वाक्य : आप पहले इसकी बात सुन लीजिए, यह काफी देर से

(3) कान खा रहा है। –
वाक्य : गोली की आवाज सुनते ही हिरन के कान खड़े हो गए।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 5
(1) सिर उठाना – बगावत करना
वाक्य : राजा कमजोर हुआ तो सामंत सिर उठाने लगे।

(2) सिर नीचा होना – लज्जित होना, पराजित होना
वाक्य : चोरी पकड़ी जाने पर नौकर का सिर नीचा हो गया।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

(3) सिर पकड़कर बैठना – पछताना
वाक्य : मौके का फायदा न उठा पानेवाले ही अंत में सिर पकड़कर बैठते हैं।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 6

(1) हाथ आना – मिलना
वाक्य : कई दिनों के बाद एक अच्छा मौका हाथ आया है।

(2) हाथ मलना – पछताना
वाक्य : अवसर चूक गए तो हाथ मलते रहोगे।

(3) हाथ फैलाना – मदद माँगना
वाक्य : वाक्य : हे ईश्वर, मुझे कभी किसीके सामने हाथ न फैलाना पड़े।

निम्नलिखित रूपरेखा के आधार पर कहानी लिखिए। कहानी से मिलनेवाली सीख भी लिखिए :

एक निर्दयी राजा – गुलाम को दंड – गुलाम का जंगल में भाग जाना – सिंह से भेंट – सिंह के पैर से काँटा निकालना – मित्रता – गुलाम की गिरफ्तारी – मौत की सजा – उसे भूखे सिंह के सामने छोड़ना – सिंह का स्नेहपूर्ण व्यवहार – दोनों की रिहाई – सीख।
उत्तर :
कृतज्ञता अथवा सिंह और गुलाम
ग्रीस देश का एक राजा बहुत निर्दयी था। उसके यहाँ अनेक गुलाम थे। वह उनसे सख्त मजदूरी करवाता था।

एक बार एक गुलाम ने चोरी से एक फल खा लिया। गुलाम अभी लड़का ही था, फिर भी राजा ने उसे कठोर दंड देने का निश्चय किया। दंड के भय से वह गुलाम जंगल में भाग गया। वहाँ एक झाड़ी में छिपकर बैठ गया।

झाड़ी में बैठे गुलाम लड़के ने एक सिंह के कराहने की आवाज सुनी। लड़का झाड़ी से निकलकर सिंह के पास आया। उसे लगा कि सिंह के पैर में कुछ तकलीफ है। उसने सिंह के पैर का दाँया पंजा उठाकर देखा। उसमें एक बड़ा काँटा घुस गया था। लड़के ने धीरे से वह काँटा निकाल दिया। सिंह की पीड़ा दूर हो गई। इसके बाद दोनों में मित्रता हो गई। गुलाम लड़के को पकड़ने के लिए राजा के सिपाही चारों ओर घूम रहे थे। उन्होंने लड़के को जंगल में देख लिया। वे उसे गिरफ्तार कर राजा के सामने ले गए। राजा ने लड़के को मौत की सजा सुनाते हुए कहा, “इसे भूखे सिंह के सामने डाल दिया जाए।”

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

जंगल से सिंह को पकड़कर लाया गया। उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया। फिर एक दिन लड़के को उसके पिंजड़े में बंद कर दिया। भूखा सिंह उस लड़के को खाने के लिए झपटा, परंतु एकदम रुक गया। वह उस लड़के के पैर चाटने लगा। वास्तव में यह वही सिंह था, जिसके पैर से उस लड़के ने काँटा निकाला था।

लड़के के प्रति सिंह के स्नेहपूर्ण व्यवहार ने सबको चकित कर दिया। राजा भी इससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “जब जंगल का राजा इस लड़के के प्रति दयालु है, तो मुझे भी इस पर दया करनी चाहिए।” ऐसा सोचकर उसने लड़के को क्षमा कर दिया। उसने सिंह और लड़के को गुलामी के बंधन से मुक्त कर दिया । सीख : सचमुच, खूखार पशु भी अपने साथ किए गए उपकार को नहीं भूलते।

चित्र के आधार पर कहानी लिखिए :
GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 1
GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता 2
उत्तर :
पुराने समय में आज की तरह आने-जाने के साधन न थे। साधारण लोग पैदल ही यात्रा करते थे। उन्हीं दिनों की घटना है। एक बुढ़िया लकड़ी टेकती हुई किसी काम से दूसरे गाँव जा रही थी। गर्मी के दिन थे। दोपहर होते-होते धूप तेज हो गई। बुढ़िया को जोर की प्यास लगी। थकावट और प्यास के कारण वह आगे न चल पाईं और रास्ते के किनारे एक पेड़ के नीचे बैठ गई। आते-जाते लोगों से वह पानी माँगती थी, पर उस प्यासी बुढ़िया पर किसीको तरस न आया।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

एक बालक ने उस बुढ़िया की आवाज सुनी। उसका घर पास में ही था। वह दौड़कर घर से लोटा भरकर पानी ले आया। बुढ़िया ने पानी पिया। उसकी जान में जान आई। बालक आग्रह करके बुढ़िया को अपने घर ले गया और चारपाई पर बिठाया। बुढ़िया को बहुत आराम मिला। उसने लड़के को अपनी बाँहों में ले लिया और बोली, “तू सचमुच बहुत अच्छा बच्चा है।”

नीचे दिए गए शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण पहचानकर वर्गीकृत कीजिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए :

हिमालय, मुझे, खट्टा, तुम्हें, बड़ौदा, सपना, साबरमती, सुंदर, छोटा, होशियार, हमारा, गुजरात
उत्तर :
संज्ञा : हिमालय, बड़ौदा, सपना, साबरमती, गुजरात
सर्वनाम : मुझे, तुम्हें, हमारा
विशेषण : खट्टा, सुंदर, छोटा, होशियार

वाक्य:

(1) हिमालय : हिमालय विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत है।
बड़ौदा : बड़ौदा गुजरात का एक बड़ा शहर है।
सपना : सपना अच्छी लड़की है।
साबरमंती : अहमदाबाद साबरमती नदी के किनारे बसा है।
गुजरात : हमारे प्रदेश का नाम गुजरात है।

(2) मुझे : मुझे अपना देश अच्छा लगता है।
तुम्हें : माँ तुम्हें बुला रही है।
हमारा : भारत हमारा देश है।

(3) खट्टा : वह आम खट्टा है।
सुंदर : यह स्थान बहुत सुंदर है।
छोटा : मोहन छोटा लड़का है।
होशियार : होशियार लड़के कभी पीछे नहीं रहते।

ममता Summary in Hindi

पाठ का सार बेटी के लिए पिता की चिंता : चूड़ामणि रोहतास दुर्ग के मंत्री हैं। दुर्ग पर शेरशाह अधिकार करना चाहता है। चूड़ामणि का मंत्रीपद उनसे छिननेवाला है। उन्हें अपनी बेटी ममता के भविष्य की चिंता है। ममता विधवा है। चूड़ामणि उसके भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं।

ममता को उत्कोच स्वीकार नहीं : चतुर शेरशाह चूड़ामणि को चाँदी के थालों में सोना भरकर उत्कोच (रिश्वत) देता है। चूड़ामणि चाहते हैं कि ममता इसे अपने पास रख ले, पर ममता इसे स्वीकार नहीं करती। वह इसे अनर्थ मानती है। चूड़ामणि ममता को मूर्ख मानता है।

दुर्ग पर शेरशाह का अधिकार : अगले ही दिन डोलियों में महिलाओं के रूप में बैठकर शेरशाह के सैनिक रोहतास दुर्ग में प्रवेश करते हैं। चूड़ामणि द्वारा विरोध करने पर उनका वध कर दिया जाता है। चूड़ामणि की पुत्री ममता किसी तरह वहाँ से बच निकलती है। वह काशी के उत्तर में स्थित एक स्तूप के खंडहर में आश्रय लेती है।

GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 9 ममता

अनचाहा अतिथि : एक रात दीपक के प्रकाश में ममता गीता का पाठ कर रही थी। उसी समय एक भीषण और हताश व्यक्ति उसकी झोंपड़ी के द्वार पर आकर खड़ा हुआ। वह मुगल बादशाह हुमायूँ था। चौसा के युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वह जान बचाने के लिए भाग निकला था। वह बहुत प्यासा और थका हुआ था। ममता ने पानी पिलाकर उसके प्राण बचाए।

आश्रय की मांग : हुमायूँ ने ममता से रातभर के लिए उसकी कुटी में आश्रय माँगा। ममता ने ‘अतिथिदेवो भव’ के आदर्श का पालन किया। हुमायूँ को अपनी झोंपड़ी में आश्रय देकर वह पास की टूटी हुई दीवारों के पीछे चली गई।

‘मिरज़ा उसका घर बनवा देना’ : अगले दिन सुबह हुमायूँ के साथी उसे खोजते हुए वहाँ आ पहुँचे। हुमायूँ झोंपड़ी से निकलकर बाहर आया। उसने ममता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की इच्छा की, पर ममता तो दिनभर मृगदाव में छिपकर बैठी रही। हुमायूँ ने चलते समय अपने साथी मिरज़ा से कहा, “मिरज़ा, उस स्त्री को मैं कुछ दे न सका। उसका घर बनवा देना, क्योंकि मैंने विपत्ति में यहाँ विश्राम पाया है।”

चिर-विश्रामगृह में जाना : सैंतालीस साल बीत गए। ममता सत्तर साल की हो चुकी थी। उसके जीवन का अंतभाग आ गया था। उस समय मिरज़ा के बनाए हए चित्र के आधार पर एक घुड़सवार ममता की झोंपड़ी के पास पहँचा। उसे बादशाह अकबर ने उस जगह का पता लगाने के लिए भेजा था, क्योंकि वहाँ एक रात उसके पिता ने विश्राम किया था। ममता ने उस घुड़सवार को अपने पास बुलाया और कहा

“तुम यहाँ मकान बनवाओ या महल, मैं तो अब अपने चिरविश्रामगृह में जा रही हूँ।” .
अष्टकोण मंदिर : बाद में ममता की झोंपड़ी की जगह एक अष्टकोण मंदिर बना। उसमें हुमायूँ का नाम था, जिसकी याद में वह बनवाया गया था और शहंशाह अकबर का नाम था, जिसने उसे बनवाया

ममता Summary in English

Father’s worry for daughter : Chudamani is the minister of Rohitas Fort. Shershah wants to possess the fort. The post of Chudamani’s ministry is to be snatched but he is worried about his daughter Mamata who is a widow. Chudamani wants to secure his daughter’s future.

Mamata does not accept bribe : The clever Shershah offers a silver plate full of gold to Chudamani as bribe. Chudamani wishes that Mamata should accept gold but Mamata does not accept it. She believes that to accept bribe is a misdeed. Chudamani calls her foolish.

Shershah’s possession on the fort : The next day disguised as women Shershah’s soldiers enter Rohitas fort. They are opposed by Chudamani and so he is killed. Chudamani’s daughter anyhow succeeds in escaping from there and saving herself. She takes shelter in an old stupa which is situated in north of Kashi.

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Unwanted guest : Once at night while Mamata is reading ne Geeta in the light of a lamp, a sad and disappointed person comes and stands near her hut. He is Mughal emperor, Humayun. He has escaped to save his life, defeated by Shershah in Chausa War. He is very thirsty and tired. Mamata saves his life by giving him water.

Humayun asks for shelter : Humayun asks for shelter in Mamata’s hut for a night. Mamata follows the principle, ‘Guest is God.’ She gives shelter to Humayun in her hut and she herself goes away to the old stupa.

‘Mirja, build her a house’: The next day Humayun’s companions come there in search of him. Humayun comes out of the hut. Humayun wants to express his gratitude to Mamata, but she is hiding in a thick bush. Humayun while departing from the hut, says to Mirja, “I can’t give anything to the woman who has given me shelter in her hut and saved me from trouble. I order you to build her house.”

Going to heaven : Forty-seven years have passed. Now Mamata is seventy years old. The end of her life has approached. A horse-rider with reference of picture on a hut comes near Mamata’s hut. He has been sent by Humayun’s son Akbar to find out the place where his father had got shelter. Mamata calls the horse-rider to her and says, “You may build here a house or a palace. It is useless for me because I am going to heaven – my permanent rest house.”

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Eight angled temple : At the place of Mamata’s hut, an eight angled temple is built. It is written, “Once, Humayun had sought shelter and rest here. His son Akbar built this grand temple in his menory.” However, Mamata’s name was no where there.

विषय-प्रवेश

भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता के तुल्य माना गया है। उसके धर्म और जाति पर ध्यान दिए बिना उसका स्वागत करने के लिए कहा गया है। इतिहास के आधार पर लिखी गई जयशंकर प्रसाद की इस कहानी का प्रमुख सूत्र है – ‘अतिथिदेवो भव’। कहानी की मुख्य पात्र ममता इसी भावना का अनुसरण करती है। उसका त्यागमय आचरण हमें प्रभावित किए बिना नहीं रहता।

शब्दार्थ (Meanings)

दुर्ग – किला; a fort प्रकोष्ठ – भवन का फाटक के पासवाला कमरा; a room near the gate of the building शाण – नदी का नाम; the name of the river, Shon तीक्षण – तेज; sharp गंभीर – गहरा ;deep प्रवाह – बहाव; a flow वेदना – पीड़ा, दुःख; pain विकल- बेचैन व्याकुल; up set, restless दुहिता- पुत्री; a daughter विडंबना – भाग्य की विचित्रता; irony, mockery कलनाद – पानी की आवाज; sound of flow बेसुध – तल्लीन, बेखबर; engrossed व्यथित – पीड़ित; sad स्थिर – (यहाँ) निश्चित; (here) decided, settled अनुचर – सेवक; a servant पद-शब्द – पाँवों की आवाज; sound of walking उपहार – भेंट, सौगात; a gift, a present आवरण – ढंका हुआ वस्त्र, पर्दा; a curtain विकीर्ण होना – फैल जाना; to scatter उत्कोच – घूस, रिश्वत; bribe अनर्थ – बहुत बुरा; a misdeed पतनोन्मुख – जिसका पतन (विनाश) शीघ्र होनेवाला हो; downfall of a person मंत्रित्व – मंत्रीपद; a rank of a secretary (minister) आयोजन – पूर्व व्यवस्था; management तृण-गुल्म – घास और लताएँ, झाड़ी; bush प्राचीर – चहारदीवारी; protecting wall विभूति – समृद्धि, धरोहर; prosperity स्तूप- बौद्ध मठ; a dome, a worshiping place of Buddha भग्नावशेष – खंडहर; an old damage building दीपालोक- दीपक का प्रकाश; the light of a lamp हताशा-निराशा; disappointment मंद – धीमा; slow आश्रय – ठिकाना, आसरा; shelter, .protection विपन्न – संकटग्रस्त; distressed क्रूर – निर्दय, निष्ठुर; cruel ब्रह्मांड – सृष्टि; universe, earth वध – हत्या; murder विरक्त – खिन्न, दुःखी; disappointed, gloomy आततायी-अत्याचारी, दुष्ट; wicked घृणा – नफरत; repulsion, hatred छल- धोखा, कपट; fraud, deceit, महिमामय – प्रभावशाली; miraculous, extraordinary संधि – सुराख, जोड़; compromise अश्वारोही – घुड़सवार; a horse-rider चीत्कार-ध्वनि – प्रसन्नताभरी आवाज; scream of joy सचेष्ट- सावधान; cautious, alert प्रांत – प्रदेश; region मृगदाव-शिकारियों से बचने के लिए मृगों के छिपने का वन; a hiding place (jungle) for deer to save themselves from hunters Fruf – वृद्ध, जर्जर; old, worn-out कंकाल – शरीर का ढाँचा; structure आजीवन – जीवनभर; whole life चिर-विश्रामगृह – स्वर्ग; heaven

मुहावरे-अर्थ और वाक्य-प्रयोग

प्रश्न 1.
हृदय धक-धक् करना- घबराना
वाक्य :
किसीके पैरों की आहट सुनकर चोर का हृदय धक्-धक् करने लगा।

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प्रश्न 2.
बात बढ़ना – झगड़ा होना
वाक्य :
बात बढ़ गई और दोनों में गाली-गलौज होने लगी।

प्रश्न 3.
तलवारें खिंचना – लड़ने के लिए तलवारों को म्यान से बाहर निकालना
वाक्य :
बात बढ़ते-बढ़ते उनमें तलवारें खिंच गईं।

प्रश्न 4.
होंठ काटना – क्रोध व्यक्त करना
वाक्य :
पति की बेतुकी बात सुनकर स्त्री होंठ काटने लगी।

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प्रश्न 5.
गला सूखना – प्यास लगना
वाक्य :
तेज धूप में चलते-चलते मेरा गला सूखने लगा।

प्रश्न 6.
ब्रह्मांड घूमने लगना – चक्कर आना
वाक्य :
कमजोरी के कारण उसके सामने ब्रह्मांड घूमने लगा।

प्रश्न 7.
दया का पात्र होना- दया करने योग्य होना
वाक्य :
तुम जैसे कामचोर लोग दया के पात्र नहीं हो।

प्रश्न 8.
भाग्य का खेल – जैसा भाग्य में लिखा है वैसा होना
वाक्य :
धंधे में कितने ही लोग करोड़पति बन गए, पर मैं असफल रहा, इसे मैं भाग्य का खेल ही समझता हूँ।

प्रश्न 9.
चिर-विश्रामगृह में जाना – मृत्यु होना
वाक्य :
राम-राम रटते-रटते बाबाजी चिर-विश्रामगृह में चले गए। .

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