GSEB Solutions Class 9 Hindi Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 9 Solutions Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

GSEB Std 9 Hindi Textbook Solutions Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

Std 9 GSEB Hindi Solutions नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया Textbook Questions and Answers

प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1.
बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ?
उत्तर :
बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को महल न तोड़ने का निवेदन किया और कहा कि आपके विरुद्ध जिन्होंने शस्त्र उठाये थे, वे दोषी हैं पर इस जड़ पदार्थ (महल) ने आपका क्या अपराध किया है । मेरा उद्देश्य इतना है कि यह स्थान मुझो बहुत प्रिय है, इसी से मैं प्रार्थना करती हूँ कि इस महल की रक्षा कीजिए ।

बालिका मैना ने सेनापति ‘हे’ को स्मरण कराया कि यह उसकी पुत्री और सहचरी रही हैं । कभी सेनापति भी उनके घर आते थे और बालिका को प्यार करते थे । उनकी बेटी की एक चिट्ठी अभी भी उसके पास है । इसके द्वारा बालिका मैना ‘हे’ को पुराने संबंध की याद दिलाती है, जिससे की वे महल को न तोड़े और उसकी रक्षा करें ।

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प्रश्न 2.
मैना जड़ पदार्थ को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे, क्यों ?
उत्तर :
मैना जड़ पदार्थ अर्थात् अपने पिता का राजमहल बचाना चाहती थी । उसके पिता का यह महल उसे बहुत प्रिय था, वह अपने पिता के उसी राजमहल में पली बढ़ी थी, उसका बचपन वहीं बीता था । इसके विपरीत नाना साहब ने अंग्रेजों से बगावत करके असंख्य अंग्रेजों का नरसंहार किया था । इसलिए अंग्रेज नाना साहब के किसी भी रिश्तेदार भाई, कन्या या उनसे संबंधित किसी भी स्मृति-चिह्न को साबुत नहीं छोड़ना चाहते थे । यही कारण है कि मैना उस जड़ पदार्थ को बचाना चाहती थी और अंग्रेज उसे नष्ट करना चाहते थे ।

प्रश्न 3.
सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव के क्या कारण थे ?
उत्तर :
सर टामस ‘हे’ के मैना पर दया-भाव दिखाने के कई कारण थे –

1. मैना और ‘हे’ की पुत्री मेरी दोनों सहचरी थीं ।
2. सेनापति ‘हे’ नाना साहब के घर आया-जाया करते थे । अर्थात् उनमें पहले से ही मित्रता के संबंध थे ।
3. सेनापति ‘हे’ मैना को अपनी पुत्री के समान प्यार करते थे । अतः सेनापति ‘हे’ को मैना अपनी ही पुत्री के समान नजर आने लगी ।
4. सेनापति ‘हे’ की पुत्री मेरी का दुःखद निधन हो चुका था । मैना में उन्हें अपनी पुत्री की छवि दिखाई देने लगी ।
5. ये सहृदय और संवेदनशील थे । इसलिए सर टामस ‘हे’ ने मैना पर दया-भाव दिखाया ।

प्रश्न 4.
मैना की अंतिम इच्छा थी कि उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भर रो ले लेकिन पाषाण हृदयवाले जनरल ने किस भाव से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी ?
उत्तर :
पाषाण-हृदयी जनरल अंग्रेज सरकार का नौकर था । वह अंग्रेजों के प्रति अपनी वफादारी साबित करना चाहता था । यदि मैना को छोड़ दिया जाय तो अन्य लोग पुनः विद्रोह कर सकते थे । पुनः दूसरा कोई ऐसा दुष्कृत्य न कर सके । मैना रात्रि के समय विलाप करती तो उसकी आवाज दूर-दूर तक जाती और संभवतः बहुत से लोग वहाँ एकत्रित होते और नाना साहब के आन्दोलन को और भी वेग मिलता । इन सभी संभावनाओं से डरकर पाषाण हृदयवाले जनरल ने नाना के प्रति घृणा भाव से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी ।

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प्रश्न 5.
बालिका मैना की कौन-कौन सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगे और क्यों ?
उत्तर :
बालिका मैना की निम्नलिखित विशेषताओं ने मुझे आकर्षित किया, जिसे मैं अपनाना चाहूँगा ।

1. तार्किकता : मैना में वाक्पटुता का गुण है । वह सेनापति ‘हे’ को महल की रक्षा करने के लिए तर्क देकर तैयार कर । लेती है ।
2. साहस : मैना साहसी बालिका है । सेनापति ‘हे’ के सभी सवालों का जवाब साहस से देती है और रात्रि के समय उसके रोने की आवाज सुनकर कई सैनिक उससे प्रश्न पूछते हैं किन्तु वह तनिक भी डरी नहीं । अतः मैना में साहस कूट-कूट कर भरा था ।
मातृभूमि के प्रति लगाव : मैना अपने पिता के महल अर्थात् अपनी मातृभूमि के प्रति अत्यधिक प्रेम है । इसीलिए वह इस महल को बचाना चाहती थी । अंतिम समय में भी वह अपनी जन्मभूमि पर जी भरकर रो लेना चाहती थी । ग्रह मैना का अपनी जन्मभूमि के प्रति प्रेम ही तो दर्शाता है । मैं उपर्युक्त विशेषताओं को अपने जीवन में अपनाना चाहूँगा ।

प्रश्न 6.
‘टाइम्स’ पत्र ने 6 सितंबर को लिखा था – ‘बड़े दुःख का विषय है कि भारत सरकार आजतक उस दुर्दान्त नाना साहब को
नहीं पकड़ सकी ।’ इस वाक्य में भारत सरकार से क्या आशय है ?
उत्तर :
इस वाक्य में भारत सरकार से आशय है – गुलाम भारत में ब्रिटिश शासन के निर्देश पर चलनेवाली यह सरकार जिसे अंग्रेज अधिकारी चलाते थे । कहने के लिए भारत सरकार थी पर उसकी डोर ब्रिटिशरों के हाथों में थी ।

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रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7.
स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी?

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि मैना के बलिदान की यह खबर आपको रेडियो पर प्रस्तुत करनी है । इन सूचनाओं के आधार पर आप एक रेडियो समाचार तैयार करें और कक्षा में भावपूर्ण शैली में पढ़े ।
उत्तर :
अब एक विशेष समाचार कल शाम 7 बजे कानपुर के किले में एक भयानक हत्याकांड हो गया । यह जघन्यकांड अंग्रेजों द्वारा किया गया । हम आपको बताना चाहते हैं कि कल आधी रात में नाना साहब की बालिका मैना को अउटरम ने उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह रात्रि के समय अपने भग्न महल पर विलाप कर रही थी । बेरहम जनरल ने मैना की जी भर के रोने की अंतिम इच्छा पूर्ण करने से इन्कार कर दिया और उसे कानपुर के जेल में बंदी बनाकर भेज दिया । आगे हमारे संवाददाता श्री मोहन मिश्रा ने बताया कि आज रात योजनाबद्ध ढंग से मैना को धधकती आग में डालकर उसकी क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई । स्थानीय लोगों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाकर घटना की जाँच कराने की मांग की है ।

प्रश्न 9.
इस पाठ में रिपोर्ताज के प्रारंभिक रूप की झलक मिलती है । लेकिन आज अखबारों में अधिकांश खबरें रिपोर्ताज की शैली
में लिखी जाती हैं । आप
(क) कोई दो खबरों को किसी अखबार से काटकर अपनी कॉपी में चिपकाइए तथा कक्षा में पढ़कर सुनाइए ।
(ख) अपने आस-पास की किसी घटना का वर्णन रिपोतार्ज शैली में कीजिए ।
उत्तर :
(क) छात्र अपनी इच्छानुसार किसी अखबार से दो खबरों को काटकर अपनी कॉपी में चिपकाएँगे तथा कक्षा में सुनाएंगे ।
(ख) अपने आस-पास की घटना का रिपोतार्ज शैली में वर्णन :
बटवा में पानी के लिए विधायक का घेराव
अहमदाबाद (मुख्य संवाददाता),
पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे वटवा निवासियों ने विधायक के घर घेराव किया । पिछले कई दिनों से बटवा वार्ड के लोग पीने के पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं । गर्मी के इन दिनों में जहाँ पानी की जरूरत ज्यादा होती है वहीं ये नागरिक एक-एक बूंद पानी के लिए मुहताज हैं । यहाँ के स्थानीय लोगों ने इसके पहले भी नगर निगम में पानी की समस्या से लिखित में अवगत कराया है । पर अधिकारियों ने इस समस्या पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया । हार कर यहाँ के स्थानीय लोगों ने विधायक के घर जाकर घेराव किया । नारेबाजी की । शीघ्र समस्या के निराकरण की गुहार लगाई । विधायक महोदय ने अग्रणी लोगों से इस विषय पर चर्चा की और जल्द ही पीने के पानी को हल करवाने का आश्वासन दिया ।

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प्रश्न 10.
आप किसी ऐसे बालक/बालिका के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए जिसने कोई बहादुरी का काम किया हो ।
उत्तर :
पिछले वर्ष हमारा विद्यालय नारेश्वर प्रवास पर गया हुआ था । सभी लोग नर्मदा के मनोरम दृश्य को देखने में व्यस्त थे । कुछ लोग नर्मदा के किनारे पानी में घुस गये । वे पानी में धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे । तभी अचानक पानी का जल स्तर बढ़ने लगा । एक बालक जिसका नाम रोहित था, उसका पैर फिसल गया और यह पानी में डूबने लगा ।

तभी हमारी कक्षा का एक लड़का वैश्विक चौधरी पानी में छलांग मारकर तुरंत उस बालक का हाथ पकड़ लिया और तैरते हुए उसे बाहर निकाल लिया । सभी के जीव तलवे पर चिपके हुए थे । रोहित के पेट में पानी घुस गया था । उसे हाथों से पंप करके पानी निकाला गया और उसे अस्पताल ले जाया गया । जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि रोहित एकदम सरक्षित है । तब सभी बच्चों और शिक्षकों ने राहत की साँस ली । अगले दिन विद्यालय की प्रार्थना सभा में वैश्विक को सम्मानित किया । रोहित के माता-पिता ने भी वैश्विक का शुक्रिया अदा किया ।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 11.
भाषा और वर्तनी का स्वरूप बदलता रहता है । इस पाठ में हिंदी गद्य का प्रारंभिक रूप व्यक्त हुआ है, जो लगभग 75-80 वर्ष पहले था । इस पाठ के किसी पसंदीदा अनुच्छेद को वर्तमान मानक हिंदी रूप में लिखिए :
अनुच्छेद : लण्डन के मन्त्रिमंडल … कुछ नहीं हो सकता ।
उत्तर :
लंडन के मंत्रिमंडल का यह मत है कि नाना का स्मृति चिन तक मिटा दिया जाए । इसलिए वहाँ की आज्ञा के विरुद्ध कुछ नहीं हो सकता ।

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लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
देवी मैना कौन थी ? और वे कहाँ रहती थीं?
उत्तर :
देवी मैना विद्रोही नेता नाना साहब की पुत्री थीं । वे कानपुर के बिठूर में अपने पिता के राजमहल में रहती थीं ।

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प्रश्न 2.
अंग्रेजों ने मैना की हत्या क्यों की?
उत्तर :
मैना के पिता नाना साहब ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध बगावत किया और असंख्य अंग्रेजी नर-नारियों को मौत के घाट उतार दिया । अंग्रेजी सेना का मुकाबला न कर पाने के कारण नाना कानपुर से भागने लगे किन्तु अपनी पुत्री को साथ न ले जा सके । नाना साहब का बदला लेने के लिए अंग्रेजों ने मैना को धधकती आग में डालकर भस्म कर दिया ।

प्रश्न 3.
अंग्रेज बिठूर की ओर क्यों गये थे ?
उत्तर :
बिटूर में नाना साहब का राजमहल था । अंग्रेजों को लगा कि नाना साहब वहाँ हो सकते हैं इसलिए ये बिठूर गये । जहाँ नाना साहब को न पाकर उनका राजमहल लूट लिया ।

प्रश्न 4.
मैना को देखकर अंग्रेज सेनापति क्यों आश्चर्य में पड़ गया ?
उत्तर :
मैना को देखकर अंग्रेज सेनापति इसलिए आश्चर्य में पड़ गया क्योंकि अंग्रेज सैनिक जब महल में लूटपाट कर रहे थे तब यह बालिका कहीं दिखाई नहीं दी थी ।

प्रश्न 5.
मैना ने सेनापति ‘हे’ से क्या निवेदन किया ? क्यों ?
उत्तर :
मैना ने सेनापति ‘हे’ से महल को नष्ट न कर उसकी रक्षा करने का निवेदन किया । क्योंकि यह महल उसके पिता का था तथा उसे अत्यंत प्रिय था ।

प्रश्न 6.
महल गिराने के पीछे अंग्रेज सरकार का क्या उद्देश्य था ?
उत्तर :
यह महल विद्रोहियों के नेता नाना साहब का वासस्थान था । अंग्रेज सरकार ने नाना से संबंधित सभी स्मृतिचिह्नों को नष्ट करने का आदेश दिया था । अंग्रेज सरकार इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए महल को गिराना चाहती थी ।

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प्रश्न 7.
सेनापति ‘हे’ मैना का निवेदन क्यों स्वीकार नहीं कर पा रहे थे ?
उत्तर :
सेनापति ‘हे’ की पुत्री मेरी और मैना दोनों सहचरी थीं । यह जानने के बाद सेनापति ‘हे’ के मन में मैना के प्रति सहानुभूति उत्पन्न हुई । किन्तु वे अंग्रेज सरकार के कर्मचारी थे । उनके आदेश की अवहेलना वे नहीं कर सकते थे । इसलिए वे मैना का निवेदन स्वीकार नहीं कर पा रहे थे ।

प्रश्न 8.
प्रधान सेनापति जनरल अउटरम सेनापति ‘हे’ पर क्यों बिगड़ गये ?
उत्तर :
अंग्रेज सरकार ने नाना साहब के राजमहल को विध्वंस करने का आदेश दे दिया था । सेनापति ‘हे’ महल को ध्वंस करने ही गये थे किन्तु बालिका के निवेदन पर वे असमंजस में पड़ गये । तभी प्रधान सेनापति वहाँ आ पहुँचे और सेनापति हे पर बिगड़ उठे कि उन्होंने अभी तक नाना का महल तोप से क्यों नहीं उड़ाया ।

प्रश्न 9.
सेनापति ‘हे’ ने जनरल अउटरम से क्या निवेदन किया ?
उत्तर :
सेनापति ‘हे’ ने जनरल अउटरम से यह निवेदन किया कि क्या किसी तरह नाना का महल बच सकता है ?

प्रश्न 10.
सेनापति के जाते ही अंग्रेज सैनिकों ने क्या किया ?
उत्तर :
सेनापति के जाते ही अंग्रेज सैनिकों ने महल को घेर लिया । वे फाटक तोड़कर महल में घुस गये और हर जगह मैना को ढूँढ़ने – लगे । पर मैना कहीं न मिली । उन्होंने महल को लूट लिया ।

प्रश्न 11.
जनरल अउटरम ने सेनापति ‘हे’ का निवेदन क्यों अस्वीकार कर दिया ?
उत्तर :
जनरल अउटरम ने सेनापति ‘हे’ का निवेदन इसलिए अस्वीकार कर दिया क्योंकि वह गवर्नर जनरल की आज्ञा के बिना कोई निर्णय नहीं ले सकता था । सेनापति ‘हे’ का निवेदन स्वीकार कर के वह अंग्रेजी सरकार के कोप का भाजन नहीं बनना चाहता ‘था ।

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प्रश्न 12.
नाना साहब के महल के विषय में भेजे गये केनिंग के तार का क्या आशय था ?
उत्तर :
नाना साहब के महल के विषय में भेजे गये केनिंग के तार का यह आशय था कि ‘लंदन के मंत्रीमंडल का यह मत था कि अंग्रेज नर-नारियों की हत्या करनेवाले नाना साहब के स्मृतिचिन को मिटा दिया जाय ।’

प्रश्न 13.
नानासाहब के भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर कौन रो रहा था ? क्यों ?
उत्तर :
नाना साहब के भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर नाना साहब की पुत्री मैना रो रही थी । विध्वंस कर दिया गया महल उसके पिता का था और यह महल उसे बहुत प्रिय था । इसलिए बालिका मैना भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर बैठी रो रही थी ।

प्रश्न 14.
रात्रि के समय खंडहर महल की तरफ सैनिक क्यों गये ?
उत्तर :
रात्रि के समय खंडहर महल की ढेर पर बालिका मैना के रोने की आवाज सुनकर सैनिक उस ओर यह पता लगाने के लिए गए कि इस ढेर पर कौन इतनी रात को रो रहा है ।

प्रश्न 15.
मेरी कौन थी?
उत्तर :
मेरी अंग्रेज सेनापति ‘हे’ की पुत्री थी तथा बालिका मैना की सहचरी थी । जिसकी अकाल मृत्यु हो चुकी थी।

दीर्घ उत्तरी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अंग्रेजों से बगावत करनेवाले नाना साहब की विशेषताएँ या खूबियाँ बताइए ।
उत्तर :
नाना साहब सन् 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शिल्पकार थे । उनका मूल नाम धुंधूपंत था । स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोहियों का नेतृत्व किया । उन्होंने अंग्रेजों की अधीनता न स्वीकार कर उनसे डरकर मुकाबला किया । उन्होंने कानपुर में अनेक अंग्रेज नर-नारियों को मौत के घाट उतार दिया ।

वे एक निडर और साहसी सेनापति थे जो अंग्रेजों से तनिक भी न डरते थे । अंग्रेजों द्वारा एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बाद भी नाना साहब उन्हें चकमा देकर भाग गये । और बहुत प्रयास के बावजूद ये अंग्रेजों की पकड़ में नहीं आ रहे थे । भागते समय वे अपनी बेटी मैना को न ले जा सके । बाद में अंग्रेजों ने उनकी बेटी मैना को आग में डालकर भस्म कर दिया था ।

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प्रश्न 2.
बालिका मैना की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए ।
उत्तर :
(पृ. 54, प्रश्न 5 का उत्तर देखें ।)

प्रश्न 3.
मैना ने अपना परिचय देते हुए सेनापति ‘हे’ से क्या कहा ? क्यों ?
उत्तर :
मैना ने अपना परिचय देते हुए सेनापति ‘हे’ से कहा कि ‘मैं जानती हूँ आप जनरल ‘हे’ हैं । आपकी प्यारी पुत्री मेरी और मुझमें बहुत प्रेम संबंध था । कई वर्ष पूर्व मेरी मेरे पास बराबर आती थी और मुझे हृदय से चाहती थी । उस समय आप भी हमारे घर आते थे और मुझे अपनी पुत्री के समान प्यार करते थे । मेरी की मृत्यु से मुझे बड़ा दुःख हुआ । उसकी एक चिट्ठी अब तक मेरे पास है ।’ मैना ने ऐसा इसलिए कहा ताकि सेनापति ‘हे’ उसके साथ सहानुभूतिपूर्वक बर्ताव करें और महल की सुरक्षा करें ।

प्रश्न 4.
उस समय लंदन के सुप्रसिद्ध ‘टाइम्स’ पत्र में छपे लेख्न की मुख्य बातें क्या थी ?
उत्तर :
उस समय लंदन के सुप्रसिद्ध ‘टाइम्स’ पत्र में छपे लेख्न की मुख्य बातें निम्नलिखित थीं –

  1. नाना साहब का न पकड़ पाने का दुख
  2. कानपुर के हत्याकांड का बदला लेने की प्रतिज्ञा
  3. टामस ‘हे’ के चरित्र पर लांछन लगाना
  4. टामस ‘हे’ के कर्तव्य पर सवालिया निशान लगाना
  5. नाना के पुत्र, कन्या या निकट संबंधी को जिन्दा न छोड़ने का आदेश
  6. टामस ‘हे’ के सामने ही बालिका मैना को फाँसी पर लटकाने का जिक्र ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए :

प्रश्न 1.
विद्रोही नेता धुंधूपंत नाना साहब कानपुर में असफल होने पर जब भागने लगे, तो जल्दी में किसे साथ न ले जा सके ?
(क) अपनी पुत्री मैना को
(ख) अपनी पत्नी को
(ग) अपने बेटे को
(घ) अपने भाई को
उत्तर :
(क) अपनी पुत्री मैना को

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प्रश्न 2.
नाना साहब का राजमहल कहाँ था ?
(क) गुजरात के अहमदाबाद में
(ख) गोरखपुर के गोलघर में
(ग) कानपुर के बिठूर में
(घ) बनारस के रामनगर में
उत्तर :
(ग) कानपुर के बिठूर में

प्रश्न 3.
सेनापति ‘हे’ ने बालिका मैना को क्या आश्वासन दिया ?
(क) मैं तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होने दूंगा ।
(ख) मैं तुम्हारी रक्षा का प्रयत्न करूँगा ।
(ग) मैं तुम्हारी सहायता करूँगा ।
(घ) मैं अंग्रेज सरकार से तुम्हें बचाऊँगा ।
उत्तर :
(ख) मैं तुम्हारी रक्षा का प्रयत्न करूँगा ।

प्रश्न 4.
बालिका मैना की अंतिम इच्छा क्या थी ?
(क) भग्न महल पर बैठकर जी भर रो लेने की ।
(ख) अपने परिजनों से मिलने की ।
(ग) अपने पिता के विषय में जानकारी लेने की ।
(घ) अपने पिता से मिलने की ।
उत्तर :
(क) भग्न महल पर बैठकर जी भर रोने लेने की ।

निम्नलिखित गद्यखण्ड को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

पढ़ता-लिखता हूँ । यही पेशा है । सो दुनिया के बारे में पोथियों के सहारे ही थोड़ा बहुत जानता हूँ, पढ़ा हूँ हिन्दुस्तान के जवानों में कोई उमंग नहीं है, इत्यादि इत्यादि । इधर देखता हूँ कि पेड़ पौधे और भी बुरे है सारी दुनिया में हल्ला हो गया कि बसन्त आ गया । पर इन कम्बख्तों को कोई खबर ही नहीं । कभी कभी सोचता हूँ कि इनके पास तक संदेश पहुँचाने का क्या कोई साधन नहीं हो सकता ?

प्रश्न 1.
लेखक का पेशा क्या है ?
उत्तर :
पढ़ना-लिखना लेखक का पेशा है ।

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प्रश्न 2.
दुनिया के बारे में लेखक ने कैसे जाना है ?
उत्तर :
पोथियों के सहारे लेखक ने दुनिया के बारे में थोड़ा बहुत जाना है ।

प्रश्न 3.
लेखक ने किसी लेख में हिंदुस्तान के जवानों के विषय में क्या पढ़ा था ?
उत्तर :
लेखक ने पढ़ा है कि हिन्दुस्तान के जवानों में कोई उमंग उत्साह नहीं है ।

प्रश्न 4.
परिवेश में किस बात का हल्ला हो गया है ?
उत्तर :
बसंत के आने का हल्ला हो गया है।

प्रश्न 5.
किस पर वसंत का प्रभाव दिखाई नहीं देता ?
उत्तर :
पेड़-पौधों पर वसंत का कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा था ।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

सन् 1857 ई. के विद्रोही नेता धुंधूपंत नाना साहब कानपुर में असफल होने पर जब भागने लगे, तो ये जल्दी में अपनी पुत्री मैना को साथ न ले जा सके । देवी मैना बिठूर में पिता के महल में रहती थी; पर विद्रोह दमन करने के बाद अंग्रेजों ने बड़ी ही क्रूरता से उस निरीह और निरपराध देवी मैना को अग्नि में भस्म कर दिया । उसका रोमांचकारी वर्णन पाषाण हृदय को भी एक बार द्रवीभूत कर देता है ।।

प्रश्न 1.
नाना साहब जल्दीबाजी में किसे अपने साथ न ले जा सके ?
उत्तर :
नाना साहब जल्दीबाजी में अपनी पुत्री मैना को अपने साथ न ले जा सके ।

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प्रश्न 2.
विद्रोही नेता धुंधूपंत नाना साहब क्यों भागने लगे थे ?
उत्तर :
अंग्रेजों के विरुद्ध 1857 के युद्ध में नाना साहब की हार हुई थी, उन्होंने अंग्रेज नर-नारियों का संहार करवाया था और पकड़ जाने के भय से वे कानपुर त्यागकर भागने लगे थे ।

प्रश्न 3.
अंग्रेजों ने किसे भस्म कर दिया ?
उत्तर :
अंग्रेजों ने नाना साहब की पुत्री मैना को भस्म कर दिया ।

प्रश्न 4.
देवी मैना कहाँ रहती थी ?
उत्तर :
देवी मैना कानपुर के बिठूर में स्थित अपने पिता के महल में रहती थी ।

प्रश्न 5.
‘विद्रोह’ तथा ‘असफल’ शब्द का विलोम शब्द लिखिए :
उत्तर :
विद्रोह × समर्थन
असफल × सफल

कानपुर में भीषण हत्याकांड करने के बाद अंग्रेजों का सैनिक दल बिठूर की ओर गया । बिठूर में नाना साहब का राजमहल लूट लिया गया; पर उसमें बहुत थोड़ी सम्पत्ति अंग्रेजों के हाथ लगी । इसके बाद अंग्रेजों ने तोप के गोलों से नाना साहब का महल भस्म कर देने का निश्चय किया । सैनिक दल ने जब वहाँ तोपें लगायीं, उस समय महल के बरामदे में एक अत्यंत सुंदर बालिका आकर खड़ी हो गयी । उसे देखकर अंग्रेज सेनापति को बड़ा आश्चर्य हुआ । क्योंकि महल लूटने के समय वह बालिका वहाँ कहीं दिखाई न दी थी ।

प्रश्न 1.
कानपुर में भीषण हत्याकांड करने के बाद अंग्रेजों का सैनिक दल कहाँ गया ? और उन्होंने वहाँ क्या किया ?
उत्तर :
कानपुर में भीषण हत्याकांड करने के बाद अंग्रेजों का सैनिक दल बिठूर गया । वहाँ उन्होंने नाना साहब का राजमहल में लूटपाट की किन्तु ज्यादा संपत्ति उनके हाथ न लगी ।

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प्रश्न 2.
सुन्दर बालिका कौन थी ? उसे देखकर सैनिकों को क्यों आश्चर्य हुआ ?
उत्तर :
सुन्दर बालिका नाना साहब की एकलौती पुत्री मैना थी । महल लुटने के समय वह बालिका कहीं नहीं दिखाई दी थी इसलिए उसे देखकर सैनिकों को आश्चर्य हुआ ।

प्रश्न 3.
‘राजमहल’ शब्द का सामासिक विग्रह करते हुए उसका प्रकार लिखिए ।
उत्तर :
राजमहल → राजा का महल – तत्पुरुष समास

सेनापति ने दुःख्न प्रकट करते हुए कहा, कि कर्तव्य के अनुरोध से मुझे यह मकान गिराना ही होगा । इस पर उस बालिका ने अपना परिचय बताते हुए कहा कि – ‘मैं जानती हूँ, कि आप जनरल ‘हे’ हैं । आपकी प्यारी कन्या मेरी में और मुझ में बहुत प्रेम-संबंध था । कई वर्ष पूर्व मेरी मेरे पास बराबर आती थी और मुझे हृदय से चाहती थी । उस समय आप भी हमारे यहाँ आते थे और मुझे अपनी पुत्री के ही समान प्यार करते थे । मालूम होता है, कि आप वे सब बातें भूल गये हैं | मेरी की मृत्यु से मैं बहुत दुःखी हुई थी; उसकी एक चिट्ठी मेरे पास अब तक है ।’

प्रश्न 1.
सेनापति को किस बात का दुःख्न था ?
उत्तर :
सेनापति अंग्रेजी सरकार के कर्मचारी थे । ये चाहते हुए भी महल की रक्षा करने में असमर्थ थे । उन्हें इसी बात का दुःख था ।

प्रश्न 2.
परिचय देते समय मैना ने सेनापति से क्या कहा ?
उत्तर :
परिचय देते समय मैना ने सेनापति से कहा कि आपकी प्यारी बेटी मेरी और मुड़ामें मैन्नी संबंध था । वर्षों पूर्व मेरी मेरे पास बराबर आती थी । उस समय आप भी हमारे यहाँ आते थे और मुझे अपनी पुत्री के समान प्यार करते थे ।

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प्रश्न 3.
‘मृत्यु’ व ‘दुःखी’ शब्द का विलोम शब्द लिखिए ।
उत्तर :
मृत्यु × जीवन
दुःखी × सुखी

इसी समय प्रधान सेनापति जनरल अउटरम वहाँ आ पहुँचे और उन्होंने बिगड़ कर सेनापति हे से कहा, – ‘नाना का महल अभी तक तोप से क्यों नहीं उड़ाया गया ?’ सेनापति ‘हे’ ने विनय-पूर्वक कहा, – ‘मैं इसी फ़िक्र में हूँ : किन्तु आपसे एक निवेदन है । क्या किसी तरह नाना का महल बच सकता है ?’

प्रश्न 1.
जनरल अउटरम सेनापति ‘हे’ पर क्यों क्रोधित हुआ ?
उत्तर :
जनरल अउटरम सेनापति ‘हे’ पर इसलिए क्रोधित हुआ क्योंकि सेनापति ‘हे’ अब तक महल को विध्यंश न करके अंग्रेज सरकार की आज्ञा का उल्लंघन कर रहे थे । अउटरम ये चाहते यह कि जल्द से जल्द महल को ध्वस्त कर दिया जाए ।

प्रश्न 2.
सेनापति ‘हे’ ने जनरल अउटरम से क्या अनुरोध किया ?
उत्तर :
सेनापति ‘हे’ ने जनरल अउटरम से अनुरोध किया कि क्या नाना साहब का महल बच सकता है ?

प्रश्न 3.
‘सेनापति’ का सामासिक विग्रह कर उसका प्रकार बताइए ।
उत्तर :
सेनापति का सामासिक विग्रह व उसका प्रकार निम्नानुसार है :
सेना का पति → तत्पुरुष समास

आउटरम, – ‘आखिर आप ऐसा क्यों चाहते हैं ? हम यह महल विध्वंस किये बिना, और नाना की लड़की को गिरफ्तार किये बिना नहीं छोड़ सकते ।’ सेनापति ‘हे’ मन में दुखी होकर वहाँ से चला गया । इसके बाद जनरल अउटरम ने नाना का महल फिर घेर लिया । महला का फाटक तोड़कर अंग्रेज सिपाही भीतर घुस गये, और मैना को खोजने लगे, किन्तु आश्चर्य है, कि सारे महल का कोना-कोना खोज डाला: पर मैना का पता नहीं लगा ।

प्रश्न 1.
सेनापति ‘हे’ क्यों दुःखी होकर चले गये ?
उत्तर :
सेनापति ने जनरल अउटरम के समक्ष महल व बालिका को बचाने का अनुरोध किया था तब अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अउटरम ने कहा कि हम महल विध्वंस किए बिना और नाना की लड़की को गिरफ्तार किए बिना नहीं छोड़ सकते । इसलिए ये दुःखी होकर चले गये ।

GSEB Solutions Class 9 Hindi Kshitij Chapter 5 नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

प्रश्न 2.
जनरल अउटरम के सैनिकों ने क्या किया ?
उत्तर :
जनरल अउटरम के सैनिकों ने महल को चारों तरफ से घेर लिया । महल का फाटक तोड़कर सैनिक महल के भीतर घुस गये और मैना को खोजने लगे ।

प्रश्न 3.
अंग्रेज सैनिक क्यों आश्चर्य में पड़ गये ?
उत्तर :
अंग्रेज सैनिक नाना साहब के महल में तोड़फोड़ करके उनकी पुत्री मैना को खोजने लगे थे तब उन्होंने महल का कोना कोना छान डाला लेकिन मैना का कहीं पता न चला । इसलिए वे आश्चर्य में पड़ गये कि मैना कहाँ चली गई ।

प्रश्न 4.
विध्वंस शब्द का समानार्थी शब्द लिजिए ।
उत्तर :
विध्वंस शब्द का समानार्थी शब्द है ‘तोड़-फोड़’ । ‘बड़े दुःख का विषय है, कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दान्त नाना साहब को नहीं पकड़ सकी, जिस पर समस्त अंग्रेज जाति का भीषण क्रोध है । जब तक हम लोगों के शरीर में रक्त रहेगा, तब तक कानपुर में अंग्रेजों के हत्याकाण्ड का बदला लेना हम लोग न भूलेंगे । उस दिन पार्लामेण्ट की ‘हाउस आफ़ लार्ड्स’ सभा में सर टामस ‘हे’ की एक रिपोर्ट पर बड़ी हँसी हुई, जिसमें सर ‘हे’ ने नाना की कन्या पर दया दिखाने की बात लिखी थी ।

‘हे’ के लिये निश्चय ही एक यह कलंक की बात है – जिस नाना ने अंग्रेज नर-नारियों का संहार किया, उसकी कन्या के लिये क्षमा ! अपना सारा जीवन युद्ध में बिता कर अन्न में वृद्धावस्था में सर टामस ‘हे’ एक मामूली महाराष्ट्र बालिका के सौन्दर्य पर मोहित होकर अपना कर्तव्य ही भूल गये ।’

प्रश्न 1.
दुन्ति विशेषण का प्रयोग किसके लिए किया गया है ? क्यों ?
उत्तर :
दुर्दान्त विशेषण का प्रयोग नाना साहब के लिए किया गया है । क्योंकि नाना साहब ने अंग्रेजों के विरुद्ध बगायत कर दी थी और कानपुर में सैंकड़ों अंग्रेजों को मार डाला था ।

प्रश्न 2.
सर टामस ‘हे’ पर क्या आरोप लगाया गया ?
उत्तर :
सर टामस ‘हे’ पर यह आरोप लगाया गया कि ‘हे’ ने सारा जीवन युद्ध में बिता दिया । वृद्धावस्था में एक मामूली महाराष्ट्रियन बालिका के सौन्दर्य पर मोहित होकर अपना कर्तव्य भूल गये ।।

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प्रश्न 3.
‘वृद्धावस्था’ का संधि-विच्छेद कीजिए ।
उत्तर :
वृद्ध + अवस्था

सन् 57 के सितम्बर मास में अर्द्ध रात्रि के समय चाँदनी में एक बालिका स्वच्छ उज्ज्वल वस्त्र पहने हुए नानासाहब के भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर बैठी रो रही थी । पास ही जनरल अउटरम की सेना भी ठहरी थी । कुछ सैनिक रात्रि के समय रोने की आवाज़ सुनकर यहाँ गये । बालिका केवल रो रही थी । सैनिकों के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं देती थी । इसके बाद कराल रूपधारी जनरल अउटरम भी वहाँ पहुँच गया । वह उसे तुरन्त पहिचानकर बोला – ‘ओह ! यह नाना की लड़की मैना है !’

प्रश्न 1.
देर पर बैठी बालिका क्यों रो रही थी ?
उत्तर :
ढेर पर बैठी बालिका के पिता नाना के महल को अंग्रेजों ने तोप के गोलों से नष्ट कर दिया था । बालिका को यह महल बहुत प्रिय था । सेनापति ‘हे’ के समक्ष वह इस महल को बचाने का अनुरोध भी कर चुकी थी । महल के भग्न होने के दुख में बालिका रो रही थी।

प्रश्न 2.
बालिका सैनिकों के प्रश्नों का उत्तर क्यों नहीं दे पा रही थी?
उत्तर :
बालिका मैना अपने प्रिय महल के विध्वंस होने के कारण बहुत दुःखी थी । दुःख की अधिकता के कारण यह बहुत जोरों से रो रही थी । जिसके कारण वह सैनिकों के प्रश्नों को सुन पाने में असमर्थ थी । इस कारण बालिका सैनिकों के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पा रही थी ।

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प्रश्न 3.
‘रात्रि’ तथा चाँदनी शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए ।
उत्तर :
रात्रि तथा चाँदनी शब्द के पर्यायवाची निम्नलिखित हैं
रात्रि → रात, निशा, यामिनी
चाँदनी → कौमुदी, ज्योत्स्ना चंद्रिका

पर पाषाण-हृदययाले जनरल ने उसकी अन्तिम इच्छा भी पूरी होने न दी । उसी समय मैना के हाथ में हथकड़ी पड़ी और वह कानपुर के किले में लाकर कैद कर दी गयी । उस समय महाराष्ट्रीय इतिहासवेत्ता महादेव चिटनवीस के ‘बाखर’ पत्र में छपा था – ‘कल कानपुर के किले में एक भीषण हत्याकांड हो गया । नाना साहब की एकमात्र कन्या मैना धधकती हुई आग में जलाकर भस्म कर दी गयी । भीषण अग्नि में शान्त और सरल मूर्ति उस अनुपमा बालिका को जलती देख, सब ने उसे देवी समझा कर प्रणाम किया ।’

प्रश्न 1.
जनरल अउटरम ने मैना की कौन-सी इच्छा नहीं पूरी होने दी ?
उत्तर :
मैना अपने भग्न महल पर जी भरकर रोना चाहती थी किन्तु जनरल ने मैना की इस इच्छा को नजरअंदाज कर उसे गिरफ्तार कर लिया और कानपुर के जेल में भेज दिया ।

प्रश्न 2.
अंग्रेज सरकार ने मैना के साथ कौन-सा अमानवीय व्यवहार किया ?
उत्तर :
अंग्रेज सरकार ने मैना को गिरफ्तार करके कानपुर के एक जेल में बंद कर दिया । इसके बाद मैना को धधकती आग में जलाकर भस्म कर दिया इस तरह उसकी क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई । एक नारी और उस पर भी बालिका होने के नाते भी अंग्रेज सरकार ने मैना को नहीं छोड़ा । अंग्रेज सरकार का यह अमानवीय व्यवहार था ।

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प्रश्न 3.
‘पाषण-हृदय’ विशेषण किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ? क्यों ?
उत्तर :
‘पाषाण-हृदय’ विशेषण जनरल अउटरम के लिए प्रयुक्त हुआ है । क्योंकि उसने नाना साहब की बेटी मैना के प्रति तनिक भी सहानुभूति न रखकर उसे धधकती अग्नि में जलाकर भस्म कर दिया ।

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया Summary in Hindi

चपलादेवी द्विवेदी युगीन लेखिका हैं । इनके व्यक्तित्व और कृतित्व के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है । स्वतंत्रता आंदोलन को वेग देने के लिए पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी अपने-अपने लेखन से आजादी के आन्दोलन को गतिमान बनाया था, उनमें से चपला देवी का भी महत्त्वपूर्ण स्थान था । कई बार किसी कारणवश कुछ सर्जनकारों के नाम इतिहास के पन्नों पर अंकित नहीं हो पाता । चपलादेवी भी एक ऐसी ही रचनाकार हैं ।

प्रस्तुत पाठ में नाना साहब की पुत्री मैना के बलिदान की गाथा का वर्णन किया गया है । इस गय रचना को जिस शैली में लिखा गया है उसे उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है । इसे रिपोर्ताज का प्रारंभिक रूप कहा जा सकता है । इसे ‘हिंदू पंच’ के बलिदान अंक से लिया गया है । इस रचना को विद्यार्थी के समक्ष रखने का मुख्य आशय है कि वे हिंदी गद्य के प्रारंभिक सप को जान सके । इसलिए इस रचना को ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है ।

पाठ का सार :

1857 का विद्रोह और नाना साहब :

सन् 1857 के विद्रोह में नाना साहब को असफलता मिली, इस कारण वे बिठूर को छोड़कर भाग गये । जाते समय जल्दीबाजी में वे अपनी पुत्री मैना को साथ न ले जा सके । मैना अपने पिता के महल में ही थी । बाद में अंग्रेजों ने बड़ी करता से उन्हें अग्नि में भस्म कर दिया ।

राजमहल में लूटपाट :

कानपुर में भीषण हत्याकांड करने के बाद अंग्रेजों का सैनिक दल बिठूर की ओर गया । उन्होंने नाना साहब के महल में लूटपाट की । नाना साहब की बहुत थोड़ी सम्पत्ति अंग्रेजों के हाथ लगी । इसके बाद अंग्रेजों ने नाना साहब के महल को भस्म करने का निश्चय किया । सैनिकों ने वहाँ तोप लगाई, उस समय एक सुन्दर सी बालिका आकर खड़ी हो गई । अंग्रेज सैनिकों को बड़ा आश्चर्य हुआ कि महल लूटने के समय वह बालिका कहीं दिखाई नहीं दी थी ।

मैना का विनम्रतापूर्वक निवेदन :

बालिका मैना ने बरामदे में खड़ी होकर अंग्रेज सेनापति को गोले बरसाने से मना किया । उसका करुणापूर्ण मुख और अल्पवयस देखकर सेनापति को भी उस पर दया आ गई । उन्होंने पूछा कि क्या ‘चाहती है ?’ तब बालिका ने उनसे महल की रक्षा करने की प्रार्थना की और बताया कि यह महल उसे अति प्रिय है । इस जड़ मकान ने अंग्रेजों के विरुद्ध कोई अपराध नहीं किया ।

मैना का परिचय :

सेनापति ने बालिका से कहा कि उन्हें हर हाल में इस महल को गिराना होगा । तब बालिका ने अपना परिचय देते हुए कहा कि आप जनरल ‘हे’ हैं । आपकी पुत्री मेरी और मैं सहचरी थीं । उस समय आप हमारे घर आया जाया करते थे । मेरी की मृत्यु से मैं बहुत दुःखी हुई । उसकी एक चिट्ठी अब तक मेरे पास है । यह सुनकर सेनापति ने महल की सुरक्षा का आश्वासन दिया ।

अउटरम का फरमान :

सेनापति और मैना की बातचीत के दौरान वहाँ प्रधान सेनापति अउटरम आ पहुँचा और महल न गिराने का कारण पूछा । सेनापति ‘हे’ ने उनसे महल बचाने का अनुरोध किया । प्रधान सेनापति ने कहा कि यह गवर्नर जनरल की आज्ञा के बिना संभव नहीं । तार से उन्हें पूछने को कहा गया । प्रधान सेनापति ने कहा कि हम महत्त्व को विध्वंश किए बिना और नाना की लड़की को गिरफ्तार किए बिना नहीं छोड़ सकते ।।

सैनिकों का महल में प्रवेश :

सेनापति ‘हे’ वहाँ से दुखी होकर चले गये । इसके बाद जनरल अउटरम ने नाना का महल फिर घेर लिया । महल का फाटक तोड़कर अंग्रेज सिपाही भीतर घुस गये और मैना को खोजने लगे । किन्तु आश्चर्य की बात है कि मैना कहीं नजर नहीं आई ।

नाना का महल मिला मिट्टी में :

लाई केनिंग के आदेश मुताबिक नाना का कोई भी स्मृतिचिह्न या रिश्तेदार बचना नहीं चाहिए । अतः क्रूर जनरल अउटरम की सेना ने नाना साहब के विशाल महल पर तोप के गोले बरसाने लगे । घण्टे भर में महल को मिट्टी में मिला दिया ।

टाइम्स पत्र में छपा लेख :

टाइम्स पत्र में एक लेख छपा था जिसका आशय यह था कि अंग्रेज जाति का नाना पर भीषण क्रोध है । हम लोग (अंग्रेज) कानपुर के हत्याकांड का बदला लेना नहीं भूलेंगे । उस दिन पार्लामेन्ट की ‘हाउस आफ लाडू’ सभा में सर टामस ‘हे’ की एक रिपोर्ट पर बड़ी हंसी हुई थी । अंग्रेज नर-नारियों का संहार करनेवाले नाना की कन्या मैना पर सर ‘हे’ ने जो दया दिखाने की बात की थी उसकी बड़ी आलोचना हुई । उन पर कन्या से प्रेमालाप करने का भी आरोप लगा ।

भग्न प्रासाद पर बालिका मैना का विलाप :

सन् 15 के दिसम्बर मास में अर्द्ध रात्रि के समय चाँदनी चौक में एक बालिका उज्ज्वल वस्त्र पहने हुए नाना साहब के भग्नावशिष्ट प्रासाद के ढेर पर बैठी रो रही थी । पास ही में ठहरी जनरल अउटरम भी वहाँ पहुँच गया । उसने तुरंत बालिका मैना को पहचान लिया । अपने चारों ओर घिरी सेना को देखकर मैना तनिक भी डरी नहीं । उसे गिरफ्तार कर लिया गया । उसकी अंतिम इच्छा भी पूरी करने का समय नहीं दिया गया ।

कानपुर के किले में भीषण हत्याकांड :

मैना को गिरफ्तार करके कानपुर के किले में कैद कर दिया गया । उसके बाद ‘बाख्नर’ पत्र में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें लिखा था कि कानपुर के जिले में एक भीषण हत्याकांड हो गया । नाना साहब की एकमात्र कन्या मैना को धधकती हुई आग में जलाकर भस्म कर दिया गया । इस प्रकार अंग्रेजों ने बालिका मैना को आग में जलाकर मार डाला ।

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मुहावरे तथा उनके अर्थ :

भष्म कर देना – जलाकर राख कर देना
वाक्य प्रयोग – देखते-ही देखते ‘सोने की लंका’ भस्म हो गई ।।

होश उड़ जाना – घबरा जाना
वाक्य प्रयोग – कार दुर्घटना की खबर सुनते ही ममता के होश उड़ गये ।

कोना-कोना खोजना – हर जगह तलाश करना
वाक्य प्रयोग – पुलिस ने शहर का कोना-कोना छान डाला, लेकिन अपहृत बालिका का कहीं पता न चला ।

मिट्टी में मिला देना – नष्ट कर देना
वाक्य प्रयोग – समझौता न करने पर अवधेश ने रामेश्वर को मिट्टी में मिला देने की धमकी दी ।

मोहित होना – मुग्ध हो जाना
वाक्य प्रयोग – मोहन की बाँसुरी की सुरीली आवाज पर सभी मोहित हो गये ।

जी भर कर – जितना जी चाहे
वाक्य प्रयोग – अपने बेटे आशुतोष की शादी में रमादेवी ने जीभर कर पैसे लुटाए ।

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शब्दार्थ और टिप्पण :

  • बिठूर – कानपुर के पास एक जगह
  • विद्रोह – विरोध
  • दमन – बलपूर्वक दबाना
  • क्रूरता – निर्दयता
  • निरीह – बेचारा
  • निरपराध – निर्दोष
  • अग्नि – आग
  • रोमांचकारी – रोंगटे खड़ा कर देनेवाला
  • पाषाण – पत्थर
  • द्रवीभूत – दया की भावना से युक्त
  • भीषण – भयानक
  • भरम – जला देना
  • अल्पवयस – कम उम्र की
  • वासस्थान – निवासस्थान
  • विध्वंस – नष्ट
  • सहचरी – साथ में खेलने-कूदनेवाली; सखी
  • टालना – मना कर देना
  • प्रयत्न – कोशिश
  • निवेदन – प्रार्थना
  • बंश – कुल
  • फिक्र – चिंता
  • गिरफ्तार – कैद
  • आशय – उद्देश्य
  • स्मृतिचिह्न – याद रखने योग्य निशानी
  • दुदान्त – अत्यंत भयंकर
  • कलंक – संहार – जान से मार देना
  • मोहित – मुग्ध
  • उज्ज्वल – सफेद
  • चरत्र – कपड़ा
  • भग्नावशिष्ट – टूटा-फूटा, खंडहर
  • प्रासाद – महल
  • कराल – भयंकर
  • आर्त – दुःखी
  • पाषाण-हृदय – पाषाण (पत्थर) के समान हृदय
  • इतिहासवेत्ता – इतिहास का ज्ञाता
  • अनुपमा – जिसके समान दूसरा कोई न हो, अतुलनीय ।

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