GSEB Solutions Class 9 Hindi Chapter 24 कबीर के दोहे

   

Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 9 Solutions Chapter 24 कबीर के दोहे Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

GSEB Std 9 Hindi Textbook Solutions Chapter 24 कबीर के दोहे

Std 9 GSEB Hindi Solutions कबीर के दोहे Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय

1. एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
मृग कस्तूरी को कहाँ ढूँढ़ता है?
उत्तर :
मृग कस्तूरी को वन में इधर-उधर इदता है।

प्रश्न 2.
हमारा जन्म कृतार्थ करने के लिए किसकी सेवा करनी चाहिए?
उत्तर :
हमारा जन्म कृतार्थ करने के लिए हमें संतों की सेवा करनी चाहिए।

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प्रश्न 3.
भवसागर तरने के लिए कौन-कौन से पाँच तत्त्व हैं? ।
उत्तर :
भवसागर तैरने के लिए ये पाँच तत्त्व हैं – साधु का मिलना (सत्संग), हरिभजन, दया की भावना, नम्रता और परोपकार।

2. निम्नलिखित भावार्थवाले दोहे ढूँढ़कर उनका गान कीजिए :

प्रश्न 1.
परमात्मा घट-घट में व्याप्त है, फिर भी हम देख नहीं पाते हैं।
उत्तर :
कस्तूरी कुंडली बसै, मग ढूँढे वन माहि।
ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि ।।

प्रश्न 2.
हमें जो कुछ मिला है, वह ईश्वर का ही है और वह ईश्वर को सौंपने से अपना कुछ नहीं रहता है।
उत्तर :
मेरा मुझमें कछु नहीं, जो कछु हय सो तेरा।
तेरा तुझको सौंपते, क्या लगेगा मेरा।।

प्रश्न 3.
अप्रामाणिक रूप से संपत्ति इकट्ठी करके उसमें से दान करने पर स्वर्गप्राप्ति नहीं हो सकती है।
उत्तर :
एहरन की चोरी करे, करे सुई का दान।
ऊँचे चढ़कर देखते, कैतिक दूर विमान।।

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प्रश्न 4.
दूसरों की संपत्ति देखकर दुःखी होने के बजाय ईश्वर ने हमें जो कुछ दिया है उसमें संतोष रखना चाहिए।
उत्तर :
रूखा-सूखा खाई कै, ठंडा पानी पीव।
देखि पराई चूपड़ी, मत ललचावै जीव।।

3. निम्नलिखित दोहों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए :

प्रश्न 1.
संत मिले सुख उपजे, दुष्ट मिले दुःख होय।
सेवा किजे संत की, तो जनम् कृतार्थ सोय ॥
उत्तर :
संत के मिलने पर सुख का अनुभव होता है और दुष्ट के मिलने पर मन दुःखी हो जाता है। इसलिए संत की सेवा कीजिए। उससे तुम्हारा जन्म सफल होगा। (वहाँ कबीर ने संत और दुष्ट का अंतर बताते हुए संत-सेवा की महिमा बताई है।)

प्रश्न 2.
सोना सज्जन साधु जन, टूटि जुरै सौ बार ।
दुर्जन कुंभ कुम्हार के, एकै धका दरार ॥
उत्तर :
सोना, सज्जन और साधु लोग रुठने पर भी बार-बार जुड़ते रहते हैं। सज्जन अच्छे लोगों से संबंध बनाकर उसे कायम रखते हैं। जबकि दुर्जन लोगों का व्यवहार इससे उलटा है। जैसे जरा-सी दरारवाले मटके को थोड़ा धक्का मारने पर फूट जाता है, ठीक उसी तरह दुर्जन व्यक्ति टूटते हुए संबंध को पूरी तरह तोड़ देने में संकोच नहीं करते। (यहाँ कबीर ने सजन और दुर्जन के स्वभाव का अंतर बताया है। सज्जन जोड़ने और दुर्जन तोड़ने की बुद्धि रखता है।)

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प्रश्न 3.
काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई चुनाय।
ता चढि मुल्ला बाँग दै, क्या बहिरा हुआ खुदाय ॥
उत्तर :
कंकड़-पत्थर जोड़कर मस्जिद बनाई और उस पर चढ़कर मुल्ला बौग देने लगा (जोर से खुदा को पुकारने लगा)। कबीर पूछते हैं कि खुदा क्या बहरा हो गया है जो उसे इस तरह जोर से पुकारने की जरूरत पड़ती है। (कबीर के अनुसार भगवान हृदय में है। उसका स्मरण मन में करना चाहिए। आडंबर से दूर रहना चाहिए।)

प्रश्न 4.
दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥
उत्तर :
दुःख में सब लोग भगवान को याद करते हैं, सुख में उसे कोई याद नहीं करता। यदि सुख में भगवान को याद किया जाए तो दुःख आए ही क्यों? (कबीर कहना चाहते हैं कि चाहे दुःख हो या सुख, भगवान का हमेशा स्मरण करना चाहिए।)

GSEB Solutions Class 9 Hindi कबीर के दोहे Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पांच-छ: वाक्यों में लिखिए :

प्रश्न 1.
कस्तूरी और मृग के उदाहरण द्वारा कबीर ने क्या संदेश दिया है?
उत्तर :
कस्तूरी मृग की नाभि में रहती है, पर मृग को इसका पता नहीं होता। वह उसे वन में यहाँ-वहाँ हूँढ़ता-फिरता है। कबीर कहते हैं कि संसार के लोगों की यही दशा है। परमात्मा उनके हृदय में निवास करता है, पर वे अज्ञान के कारण इस सत्य को जान नहीं पाते। वे उसे पाने के लिए इधर-उधर चक्कर लगाते रहते हैं। इस प्रकार कबीर कहते हैं कि मनुष्य को अपने हृदय में ही ईश्वर की खोज करनी चाहिए।

प्रश्न 2.
कबीर सज्जन और दुर्जन में क्या अंतर बताते हैं?
उत्तर :
कबीर कहते हैं कि सज्जन अच्छे लोगों से संबंध बनाकर उसे कायम रखता है। वे रूठते हैं तो भी उन्हें बार-बार मनाकर संबंध को जोड़े रखता है। दुर्जन का व्यवहार इससे उलटा है। जैसे मटके को जरा-सा धक्का मारने पर वह फूट जाता है, उसी तरह दुर्जन व्यक्ति टूट रहे संबंध को पूरी तरह तोड़ने में संकोच नहीं करता। इस तरह सज्जन में जोड़ने और दुर्जन में तोड़ने की बुद्धि होती है।

प्रश्न 3.
कबीर ने संतोष की महिमा किस प्रकार बताई है? ।
उत्तर :
कबीर कहते हैं कि मनुष्य को लालच के जाल में नहीं फैसना चाहिए। जो कुछ भगवान ने उसे दिया है, उसीमें संतुष्ट रहना चाहिए। मनुष्य को गायें, हाथी, घोड़े तथा खान से मिलनेवाले बहुमूल्य रत्न मिल जाएँ, फिर भी धन-संपत्ति के लोभ से वह मुक्त नहीं हो सकता। जब तक यह लोभ है, तब तक उसे सुख-शांति नहीं मिल सकती। यदि मनुष्य जो कुछ उसके पास है, उसीमें संतोष माने तो सभी तरह के धन उसे मिट्टी के समान तुच्छ लगने लगेंगे। उसे अनुभव होगा कि संतोष से बड़ा कोई धन नहीं है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :

प्रश्न 1.
संत की सेवा करने से क्या लाभ होगा?
उत्तर :
संत का इदय पवित्र होता है। संत भगवान का ही रूप है। उसकी सेवा करने से जीवन में कृतार्थता अर्थात् सफलता प्राप्त होगी।

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प्रश्न 2.
कबीर भगवान के स्मरण का क्या महत्त्व बताते हैं?
उत्तर :
मनुष्य का यह स्वभाव है कि दुःख का समय आने पर वह भगवान को याद करता है और सुख के दिनों वह भगवान को भूल जाता है। कबीर कहते है कि यदि सुख में भी हम भगवान को न भूलें तो हमारे जीवन में कभी दुःख नहीं आएगा।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :

प्रश्न 1.
कस्तूरी कहाँ रहती है?
उत्तर :
कस्तूरी मृग की अपनी नाभि ही में रहती है।

प्रश्न 2.
सबसे श्रेष्ठ धन कौन-सा है?
उत्तर :
संतोष ही सबसे श्रेष्ठ धन है।

सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 1.

  1. कबीर की कविता अनुभव का …….. ज्ञान भण्डार है। (अधाह, थाह)
  2. कबीर की वाणी का संग्रह ………. नाम से प्रसिद्ध है। (बौजक, शबद)
  3. …….. कुंडली बसै, मृग दूंहे बन माहि। (कस्तूरी, सुगंधी)
  4. सेवा किजे संत की तो जनम् …….. सोय। (सार्थक, कृतार्थ)
  5. जो सुख में ……… करे, तो दुःख काहे को होय। (सुमिरन, स्मरण)

उत्तर :

  1. अथाह
  2. बोजक
  3. कस्तूरी
  4. कृतार्थ
  5. सुमिरन

निम्नलिखित विधान ‘सही’ हैं या ‘गलत’ यह बताइए :

प्रश्न 1.

  1. दुष्ट के मिलने से सुख मिलता है।
  2. अप्रामाणिक लोग ढेर सारा कमाकर जरा-सा दान करने की मूर्खता करते हैं।
  3. दुष्ट लोग तोड़ने का कार्य करते हैं।
  4. संतोष से ही सबसे बड़ा सुख मिलता है।
  5. खुदा बहरा हो गया है इसलिए मुल्ला जोर-जोर से बांग देता है।

उत्तर :

  1. गलत
  2. सही
  3. सही
  4. सही
  5. गलत

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. कस्तूरी किसकी नाभि में होती है?
  2. संत मिलने पर किस बात का अनुभव होता है?
  3. जोड़ने का कार्य कौन करता है?
  4. हमारा जन्म कृतार्थ करने के लिए किसकी सेवा करनी चाहिए?

उत्तर :

  1. कस्तूरी मृग की
  2. सुख का
  3. सज्जन लोग
  4. संतों की

निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
किसका मिलन सुख देता है?
A. मित्र का
B. सम्बन्धी का
C. संत का
D. भाई का
उत्तर :
C. संत का

प्रश्न 2.
किसकी सेवा से जन्म कृतार्थ होता है?
A. संत की
B. भिक्षुक की
C. रोगी की
D. वृद्ध की
उत्तर :
A. संत की

प्रश्न 3.
लोग कब भगवान का सुमिरन नहीं करते?
A. दुःख में
B. सुख में
C. बचपन में
D. यौवन में
उत्तर :
B. सुख में

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प्रश्न 4.
कबीर के अनुसार भगवान कहाँ है?
A. मंदिर में
B. हमारे मस्तिष्क में
C. हमारे हृदय में
D. सेवाकार्यों में
उत्तर :
B. हमारे मस्तिष्क में

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. मृग
  2. सार
  3. दीन
  4. स्मरण
  5. कुम्हार
  6. गज
  7. वाजी

उत्तर :

  1. हिरन
  2. तत्त्व
  3. गरीब
  4. याद
  5. कुंभकार
  6. हाथी
  7. घोड़ा

निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. नम्र
  2. स्मरण
  3. सज्जन
  4. प्रामाणिक
  5. दवा

उत्तर :

  1. उदंड
  2. विस्मरण
  3. दुर्जन
  4. अप्रामाणिक
  5. निर्दयता

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निम्नलिखित शब्दों का संधि-विग्रह करके लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. अभ्युदय
  2. बाह्याडंबर
  3. कृतार्थ
  4. भावार्थ

उत्तर :

  1. अभ्युदय = अभि + उदय
  2. बाझाडंबर = बाहा + आडंबर
  3. कृतार्थ = कृत + अर्थ
  4. भावार्थ = भाव + अर्थ

निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए

प्रश्न 1.

  1. मृगनाभि से निकलनेवाला सुगंधित पदार्थ
  2. जिसका कार्य सिद्ध हो चुका हो
  3. आत्माओं में सर्वश्रेष्ठ
  4. मिट्टी के बर्तन बनानेवाला
  5. मुस्लिमों का इबादत करने का स्थान
  6. गाय रूपी धन
  7. हाथी रूपी धन

उत्तर :

  1. कस्तूरी
  2. कृतार्थ
  3. परमात्मा
  4. कुम्हार
  5. मस्जिद
  6. गोधन
  7. गजधन

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. निर्गुण
  2. अनुभव
  3. त्रिवेणी
  4. सर्वव्यापक
  5. अप्रामाणिक
  6. व्यापक
  7. संगति
  8. प्रार्थना
  9. सज्जन
  10. अनुसार
  11. व्यवहार
  12. स्वभाव
  13. बहुमूल्य
  14. अज्ञान
  15. विस्मरण
  16. दुर्जन
  17. अभ्युदय
  18. उदंड

उत्तर :

  1. निर्गुण – निर् + गुण
  2. अनुभव – अनु + भव
  3. त्रिवेणी – त्रि + वेणी
  4. सर्वव्यापक – सर्व + व्यापक
  5. अप्रामाणिक – अ + प्रामाणिक
  6. व्यापक – वि + आपक
  7. संगति – सम् + गति
  8. प्रार्थना – प्र + अर्थना
  9. सज्जन – सत् + जन
  10. अनुसार – अनु + सार
  11. व्यवहार – वि + अवहार
  12. स्वभाव – स्व + भाव
  13. बहुमूल्य – बहु + मूल्य
  14. अज्ञान – अ + ज्ञान
  15. विस्मरण – वि + स्मरण
  16. दुर्जन – दुः (दुर) + जन
  17. अभ्युदय – अभि + उदय
  18. उदंड – उत् + दंड

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निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. प्रामाणिक
  2. व्यापकता
  3. महत्त्व
  4. दूरी
  5. कुंभकार
  6. दोनता
  7. नम्रता
  8. कुम्हारिन
  9. हिरनी
  10. चोरनी
  11. लोहारिन
  12. भगवती
  13. साक्षात्कार
  14. मानवतावादी

उत्तर :

  1. प्रामाणिक – प्रमाण + इक
  2. व्यापकता – व्यापक + ता
  3. महत्त्व – महत् + त्व
  4. दूरी – दूर + ई
  5. कुंभकार – कुंभ + कार
  6. दीनता – दीन + ता
  7. नम्रता – नम + ता
  8. कुम्हारिन – कुम्हार + इन
  9. हिरनी – हिरन + ई
  10. चोरनी – चोर + नी
  11. लोहारिन – लोहार + इन
  12. भगवती – भग + वती
  13. साक्षात्कार – साक्षात् + कार
  14. मानवतावादी – मानवता + वादी

कबीर के दोहे Summary in Gujarati

ગુજરાતી ભાવાર્થ :

હરણની નાભિમાં કસ્તુરી હોય છે, છતાં પણ હરણ તેને જંગલમાં આમતેમ શોધતું ફરે છે. એવી જ રીતે રામ અર્થાત્ પરમાત્મા સૌના હૃદયમાં રહે છે, પરંતુ લોકો એ જોઈ શકતા નથી. (કબીરે ઈશ્વરની સર્વવ્યાપકતાનો સંકેત કરતાં ઈશ્વરનું મંદિર, મસ્જિદ વગેરેમાં ન શોધતાં હૃદયમાં જ શોધવાનો ઉપદેશ આપ્યો છે.)

હે પરમાત્મા, મારામાં જે કાંઈ છે તે મારું નથી. જે કંઈ પણ છે, તે તારું છે. તે હું તને સોંપું છું, કારજ્ઞ કે તેમાંથી કોઈની સાથે પણ મારો કોઈ સંબંધ નથી.

સંતનો મેળાપ થતાં સુખનો અનુભવ થાય છે અને દુષ્ટના મેળાપથી મન દુ:ખી થઈ જાય છે. એટલે સંતની સેવા કરવી જોઈએ. તેનાથી તમારો જન્મ સફળ થશે. (અહીં કબીરે સંત અને દુષ્ટનો તફાવત દર્શાવીને સંતસેવાનો મહિમા ગાયો છે.)

કબીર કહે છે કે લોકો એરણની ચોરી કરે છે અને સોયનું દાન કરે છે. પછી તેઓ ઊંચી છત પર ચઢીને જુએ છે કે તેમને માટે સ્વર્ગથી આવનારું વિમાન કેટલું દૂર છે. (અપ્રામાણિક રીતે ખૂબ ધન કમાઈને જરા જેટલું દાન આપનારાઓની મૂર્ખતાનો વિચાર કરી કબીરે તેમના પર કટાક્ષ ક્યોં છે.)

સોનું, સજ્જન, સાધુ લોકો નારાજ થાય તો પણ વારંવાર તેમને મનાવી પોતાનાથી જુદા પડવા દેતા નથી, ફરી ફરીને જોડાય છે, જ્યારે દુર્જન કુંભારની જેમ માટલામાં તડ જોઈ એક જ ધક્કાથી તેને ફોડી નાખે છે. (અહીં કબીરે સજજન અને દુર્જનના સ્વભાવનો તફાવત દર્શાવ્યો છે. સજ્જન જોડવાની અને દુર્જન તોડવાની બુદ્ધિ ધરાવે છે.)

લૂખું-સૂકું ખાઈને, ઠંડું પાણી પીને સંતોષ માનો, પરંતુ બીજાની ઘીથી ચોપડેલી રોટલી જોઈને લલચાશો નહિ. (અહીં કબીરે આત્મસંયમ અને સંતોષ રાખવાની શિખામણ આપી છે.)

કબીર કહે છે કે સંસારમાં રત્ન જેવી બહુમૂલ્ય પાંચ વસ્તુઓ સારરૂપે સમાયેલી છે. – સત્સંગ, ભગવાનનું ભજન, દયા, નમ્રતા અને પરોપકાર, (કબીરના મત અનુસાર આ પાંચ વસ્તુ અપનાવવાથી મનુષ્ય સુખ-શાંતિથી ભવસાગર પાર કરી શકે છે.)

કાંકરા-પથરા જોડીને મસ્જિદ બનાવી અને એના પર ચઢીને મુલ્લા બાંગ પોકારવા લાગ્યો. (મોટેથી ખુદાને બોલાવવા લાગ્યો.) કબીર પૂછે છે કે શું ખુદા બહેરા થઈ ગયા છે કે એને આ રીતે જોરથી બોલાવવાની જરૂર છે. (કબીરના મતે ભગવાન હૃદયમાં છે. તેનું સ્મરણ મનમાં કરવું જોઈએ અને આડંબરથી દૂર રહેવું જોઈએ.)

દુઃખમાં સૌ લોકો ભગવાનને યાદ કરે છે; સુખમાં કોઈ નથી, જો સુખમાં ભગવાનને યાદ કરવામાં આવે તો દુ:ખ શા માટે આવે? (કબીર કહે છે કે દુઃખ હોય કે સુખ, ભગવાનનું હંમેશાં સ્મરણ કરવું જોઈએ.).

ગાયો, હાથી અને ખામાંથી મળનાર રન વગેરે ધન મનાય છે, પરંતુ જ્યારે સંતોષરૂપી ધન પ્રાપ્ત થઈ જાય છે ત્યારે આ બધું ધન ધૂળ સમાન તુચ્છ બની જાય છે. (અહીં કબીરે સંતોષનું મહત્ત્વ દર્શાવ્યું છે.)

GSEB Solutions Class 9 Hindi Chapter 24 कबीर के दोहे

कबीर के दोहे Summary in English

Though there is musk in deer’s neval, the deer is wandering here and there in search of it! In this way Ram means God is there in our heart, but we cannot see Him. (Kabir wants to say that God is everywhere, So we should not find God in a temple or a masjid, we should find Him in our heart.)

1210 God, what I have is not mine. Whatever I have is yours. I offer it to you, because I have no relation with anything.

We experience happiness while we meet a saint and we experience sadness while we meet a wicked person. So we should serve a saint so that our life will become successful. (Here Kabir has showed the difference between a saint and a wicked person and has sung the importance of service to saint)

Kabir says that people steal an anil and donate a needle. Then they climb up a roof and wait for the aeroplane from heaven for them to arrive. (Kabir has sarcastic for the dishonest people who earn a lot and donate a little.)

Gold, noble men and saints sometime become displeased but they never try to differ. They join often and often. But a wicked person breaks a pot with a push seeing a crack in it like a potter (Here Kabir has showed the difference of nature between a noble man and a wicked man. A noble man tries to join and a wicked man tries to break.)

Satisfy eating your tasteless bread and drinking cool water, but don’t be greedy seeing tasty bread with ghee of other. (Here Kabir wants to give us advice that we should satisfy with what we have and should have self-control.)

Kabir says that there are five important things in the world like diamonds. They are association with saints, bhajans, mercy, courtesy and benevolence. (According to Kabir the person who adopt these five things can live a happy – peaceful life.)

The mulla began to pray after building a masjid of stones and climbing on it. (Began to call Khuda (God) shouting loudly. (Kabir asks if Khuda (God) has become deaf and if it is necessary to call Him loudly. God is in our heart. We should recite Him in our mind and avoid pomp.)

People remember God is unhappiness. Nobody remembers Him in happiness. If God is remembered in happiness, how can unhappiness come? (Kabir says that we should remember God whether we are happy or unhappy.)

Cows, elephants and diamonds are considered wealth, but when we get wealth of satisfaction, the whole wealth is useless like dust. (Here Kabir has showed the importance of satisfaction.)

कबीर के दोहे Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :

निर्गुण संतों में कबीर का स्थान सबसे ऊपर है। अनुभव के आधार पर लिखे गए उनके पद और दोहे आज भी लोकप्रिय हैं। कबीर के दोहे ज्ञान के भंडार हैं। यहाँ उनके दस दोहे दिए गए हैं। इनमें भक्ति, ज्ञान और कर्म की त्रिवेणी के दर्शन होते हैं।

कविता का सार :

पहले दोहे में परमात्मा की सर्वव्यापकता, दूसरे दोहे में जो कुछ है वह ईश्वर का है ऐसी भावना, तीसरे में साधु-संगति की महिमा, चौथे में अप्रामाणिकता का फल, पांचवें में सज्जनों की संगति की प्रशंसा, छठे में संतोष की शिक्षा, सातवे में पंचतत्त्वों का महत्त्व, आठवें में बाहरी आडम्बर का विरोध, नवें में सुख में भगवान की बाद का महत्त्व और दसवें में संतोष की महिमा बताई गई है।

GSEB Solutions Class 9 Hindi Chapter 24 कबीर के दोहे

कविता का अर्थ :

कस्तूरी ……… देखे नाहि।

कस्तूरी हिरन की नाभि में रहती है, फिर भी वह उसे जंगल में इधर-उधर हूंढता फिरता है। उसी तरह राम अर्थात् परमात्मा सबके हृदय में वास करता है, पर लोग इस सत्य को समझ नहीं पाते और वे यहाँ-वहाँ भटकते हैं। (यहाँ कबीर ने ईश्वर की सर्वव्यापकता की ओर संकेत करते हुए ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, तीर्थों आदि में न ढूंढ़कर हृदय में ढूंढने का उपदेश दिया है।)

मेरा मुझमें ……. मेरा।

हे परमात्मा, मेरे अंदर जो कुछ है, वह मेरा नहीं है। जो भी कुछ है वह तुम्हारा है। जो तुम्हारा है, उसे मैं तुम्हीं को सौंपता हूँ, क्योंकि उसमें से किसीसे भी मेरा कोई संबंध नहीं है।

संत मिले ……… कृतार्थ होय।

संत के मिलने पर सुख का अनुभव होता है और दुष्ट के मिलने पर मन दुःखी हो जाता है। इसलिए संत की सेवा कीजिए। उससे तुम्हारा जन्म सफल होगा। (वहाँ कबीर ने संत और दुष्ट का अंतर बताते हुए संत-सेवा की महिमा बताई है।)

एहरन …….. विमान।

कबीर कहते हैं कि लोग ऐरण की चोरी करते हैं और सुई का दान देते हैं। फिर वे ऊंची छत पर चढ़कर देखते हैं कि उनके लिए स्वर्ग से आनेवाला विमान अभी कितना दूर है। (अप्रामाणिक ढंग से ढेर सारा कमाकर जरा-सा दान देनेवालों की मूर्खता की ओर इशारा करते हुए उन पर व्यंग्य किया है।)

सोना सज्जन ……….. धका दरार।

सोना, सज्जन और साधु लोग रुठने पर भी बार-बार जुड़ते रहते हैं। सज्जन अच्छे लोगों से संबंध बनाकर उसे कायम रखते हैं। जबकि दुर्जन लोगों का व्यवहार इससे उलटा है। जैसे जरा-सी दरारवाले मटके को थोड़ा धक्का मारने पर फूट जाता है, ठीक उसी तरह दुर्जन व्यक्ति टूटते हुए संबंध को पूरी तरह तोड़ देने में संकोच नहीं करते। (यहाँ कबीर ने सजन और दुर्जन के स्वभाव का अंतर बताया है। सज्जन जोड़ने और दुर्जन तोड़ने की बुद्धि रखता है।)

रूखा-सूखा ………. जीव।

रूखा-सूखा खाकर और ठंडा पानी पीकर संतोष मान लो लेकिन दूसरे की घी से चुपड़ी हुई रोटी देखकर मन को मत ललचाओ। (यहाँ कबीर ने आत्मसंयम और संतोष रखने की सीख दी है।)

कबीर ………. उपकार।

कबीर कहते हैं कि इस संसार में रत्न जैसी बहुमूल्य पाँच वस्तुएँ हैं। इन्हीं में संसार का तत्त्व (सार) समाया हुआ है। ये वस्तुएं हैं- साधु का मिलना (सत्संग), हरिभजन, दया की भावना, नम्रता और परोपकार।
(कबीर के अनुसार इन पांच बातों को अपनाने से मनुष्य सुखशांति से भवसागर पार कर सकता है।)

कांकर-पाथर ………… खुदाय।

कंकड़-पत्थर जोड़कर मस्जिद बनाई और उस पर चढ़कर मुल्ला बौग देने लगा (जोर से खुदा को पुकारने लगा)। कबीर पूछते हैं कि खुदा क्या बहरा हो गया है जो उसे इस तरह जोर से पुकारने की जरूरत पड़ती है। (कबीर के अनुसार भगवान हृदय में है। उसका स्मरण मन में करना चाहिए। आडंबर से दूर रहना चाहिए।)

दुःख में ………. होय।

दुःख में सब लोग भगवान को याद करते हैं, सुख में उसे कोई याद नहीं करता। यदि सुख में भगवान को याद किया जाए तो दुःख आए ही क्यों? (कबीर कहना चाहते हैं कि चाहे दुःख हो या सुख, भगवान का हमेशा स्मरण करना चाहिए।)

गोधन ………. धूरि समान।

गायें, हाथी, घोड़े और खान से मिलनेवाले रत्न आदि धन माने जाते हैं। परंतु जब संतोषरूपी धन प्राप्त हो जाता है, तब ये सभी धन धूल के समान तुच्छ हो जाते हैं। (यहाँ कबीर ने संतोष का महत्त्व बताया है।)

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कबीर के दोहे शब्दार्थ : 

  1. कस्तूरी – मृग की नाभि से निकलनेवाला एक सुगंधित पदार्थ।
  2. कुंडली – नाभि।
  3. मृग – हिरन।
  4. कृतार्थ – सफल ।
  5. एहरन – एरण (એ૨ણ), लोहार का एक औजार।
  6. कैतिक दूर – कितना दूर।
  7. कैतिक – कितना।
  8. जुरै – जुड़ता है।
  9. दरार – दरज।
  10. सार – मुख्य।
  11. दान – नम्र, विनीत।
  12. कांकर – कंकड़।
  13. पाथर – पत्थर।
  14. सुमिरन – स्मरण।
  15. गज – हाथी।
  16. वाजी – घोड़ा।
  17. धूरि – धूल, मिट्टी।

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