GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 भरत

Gujarat Board GSEB Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 भरत Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

Gujarat Board Textbook Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 भरत

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
सर्वदमन के व्यवहारों को देखकर दुष्यंत के मन में कौन-कौन-से विचार आते थे?
उत्तर :
सर्वदमन का साहस, निर्भयता और बालहठ देखकर दुष्यंत बहुत आनंदित होते हैं। उनके मन में सर्वदमन के प्रति प्रेम उमड़ आता है। सर्वदमन के मुख पर अग्नि जैसी दमक देखकर उन्हें आश्चर्य होता है। उन्हें लगता है कि यह निश्चय ही किसी तेजस्वी वीर का पुत्र है। बालक के हाथ में चक्रवर्तियों जैसे लक्षण और उसकी कमल जैसी हथेली देखकर वे आनंद और आश्चर्य में डूब जाते हैं। सर्वदमन के हाथ से सिंहशावक छड़ाते समय वे बालक के हाथ का स्पर्श कर अत्यंत सुख का अनुभव करते हैं। वे सोचते हैं कि जब उन्हें इतना सुख होता है तो जिस भाग्यवान का यह बेटा है, उसे कितना सुख होगा। इस प्रकार सर्वदमन के व्यवहारों को देखकर दुष्यंत के मन में तरह-तरह के विचार आते थे।

प्रश्न 2.
इस एकांकी के आधार पर बालक सर्वदमन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सर्वदमन सुंदर, स्वस्थ और आकर्षक बालक है। उसका मुख अग्नि के समान दमक रहा है। उसका साहसी और निर्भय स्वभाव देखकर आश्चर्य होता है। सिंहशावक के साथ खेलने में वह जरा भी नहीं डरता। शावक की माँ सिंहनी का भी उसे भय नहीं है। वह इतना हठी है कि तपस्विनियों के समझाने का उस पर कोई असर नहीं होता। उसके हाथ में चक्रवर्ती सम्राट के लक्षण हैं। उसे खिलौनों से स्वाभाविक लगाव है।

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प्रश्न 3.
इस एकांकी में निहित पात्रों का अंतर्निहित मूल्य बताइए :
(1) दुष्यंत
(2) सर्वदमन
उत्तर :
(1) दुष्यंत : राजा दुष्यंत कोमल हृदय के व्यक्ति हैं। बालक सर्वदमन की बालचेष्टाएँ उन्हें मुग्ध कर देती हैं। उसके प्रति राजा के मन में स्नेह उमड़ने लगता है। वे सोचते हैं कि यह उनका पुत्र होता तो कितना अच्छा होता! फिर ऐसी घटनाएँ घटती हैं जिनसे सिद्ध हो जाता है कि बालक सर्वदमन उन्हीं का पुत्र है। तब दुष्यंत के आनंद की सीमा नहीं रहती। उनका पितृहृदय वात्सल्य से भर जाता है।

(2) सर्वदमन : सर्वदमन असाधारण बालक है। आश्रम की तपस्विनियाँ उसे सिंहशावक को छोड़ देने के लिए समझाती हैं, पर वह उनकी बात नहीं मानता। दुष्यंत से वह जरा भी परिचित नहीं है, फिर भी वह उनके कहने पर सिंहशावक को छोड़ देता है। उसकी सूरत भी दुष्यंत की सूरत से मिलती है। ‘अपराजित’ नामक रक्षासूत्र भी प्रमाणित कर देता है कि सर्वदमन दुष्यंत का ही पुत्र है। इस प्रकार पिता और पुत्र दोनों एक-दूसरे से अनजान हैं, फिर भी उनके बीच पिता-पुत्र जैसी भावधारा बहने लगती है।

प्रश्न 4.
दुष्यंत को कैसे पता चला कि सर्वदमन पुरुवंशी बालक है?
उत्तर :
सर्वदमन तपस्विनी के कहने से सिंहशावक को छोड़ नहीं रहा था। तब तपस्विनी ने दुष्यंत से कहा कि अब तुम्ही सिंहशावक को इसके हाथ से छुड़ाओ। दुष्यंत के कहने पर सर्वदमन ने सिंहशावक को छोड़ दिया। यह देखकर तपस्विनी को बहुत आश्चर्य हुआ। दुष्यंत ने उसके आश्चर्य का कारण पूछा। तब तपस्विनी ने कारण बताते हुए कहा कि इस बालक की सूरत तुम्हारी सूरत से बहुत मिलती-जुलती है और यह बालक तुम्हें जानता नहीं है, फिर भी इसने तुम्हारा कहना मान लिया। तुम इसे ऋषिकुमार समझते हो पर यह ऋषिकुमार नहीं, पुरुवंशीय है। इस प्रकार दुष्यंत को पता चला कि सर्वदमन पुरुवंशीय बालक है।

प्रश्न 5.
दुष्यंत को ऐसा कब लगता है कि उनका मनोरथ पूरा हुआ?
उत्तर :
बालक सर्वदमन की दाई बाँह में एक रक्षा का धागा बँधा हुआ था। इस रक्षाबंधन का नाम ‘अपराजित’ था। सिंहशावक के साथ खेलते समय वह धागा बालक की बाँह से नीचे गिर गया था। दुष्यंत जब उसे उठाने लगे तो तपस्विनियों ने उन्हें रोका, फिर भी उन्होंने उसे उठा लिया। तपस्विनियों को आश्चर्यचकित देखकर दुष्यंत ने उसका कारण पूछा। तपस्विनियों ने कहा – यदि यह धागा जमीन पर गिर जाए तो उसे बालक के माता-पिता के सिवाय दूसरा कोई नहीं उठा सकता। अगर कोई उठा ले तो यह साँप बनकर उसे डस लेता है। ऐसा अनेक बार हो चुका था। परंतु धागा उठाने पर दुष्यंत को कुछ नहीं हुआ। इससे सिद्ध हो गया कि वे ही बालक के पिता हैं। तब राजा दुष्यंत को लगता है कि उनका मनोरथ पूरा हुआ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-दो वाक्यों में दीजिए :

प्रश्न 1.
ऋषियों ने बालक का नाम सर्वदमन क्यों रखा?
उत्तर :
बालक वन के पशुओं के बच्चों के साथ निडर होकर खेलता था। उसके इसी साहसी और निर्भीक स्वभाव के कारण ऋषियों ने उसका नाम सर्वदमन रखा था।

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प्रश्न 2.
दुष्यंत बालक के प्रति आकृष्ट क्यों हो रहे थे?
उत्तर :
बालक स्वस्थ, सुंदर, निर्भीक तथा हठीला था। उसकी इन्हीं विशेषताओं पर मुग्ध होकर दुष्यंत उसके प्रति आकृष्ट हो रहे थे।

प्रश्न 3.
दुष्यंत ने पुरुवंशीय जीवन की कौन-सी दो रीतियाँ बताई?
उत्तर :
दुष्यंत ने पुरुवंशीय जीवन की ये दो रीतियाँ बताईं :
(1) वे युवावस्था में महलों में रहकर पृथ्वी की रक्षा और पालन करते हैं।
(2) वृद्धावस्था में वे तपस्वियों के आश्रम में वृक्षों के नीचे कुटी बनाकर रहते हैं।

प्रश्न 4.
दुष्यंत के क्या कहने पर बालक ने सिंहशावक को छोड़ दिया?
उत्तर :
दुष्यंत ने बालक से कहा कि प्राणियों के बच्चों को सताना तपोवन के आचरण के विरुद्ध है और इससे तुम्हारे कुल की भी निंदा होती है। उनके ऐसा कहने पर बालक ने सिंहशावक को छोड़ दिया।

प्रश्न 5.
दुष्यंत क्या जानने के लिए व्याकुल हैं?
उत्तर :
दुष्यंत को मालूम हो गया है कि बालक सर्वदमन की माँ का नाम ‘शकुंतला’ है। अब वे यह जानने के लिए व्याकुल है कि क्या यह शकुंतला उनकी  पत्नी है, जिसका उन्होंने त्याग कर दिया था।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए :

प्रश्न 1.
सर्वदमन क्या करना चाहता था?
उत्तर :
सर्वदमन सिंहशावक के दाँत गिनना चाहता था।

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प्रश्न 2.
तपस्विनी के अनुसार बालक का ‘सर्वदमन’ नाम सार्थक क्यों था?
उत्तर :
तपस्विनी के अनुसार बालक का ‘सर्वदमन’ नाम सार्थक था, क्योंकि वह वन के प्राणियों के बच्चों से निर्भीक होकर खेलता था।

प्रश्न 3.
दुष्यंत ने सर्वदमन के बारे में क्या अनुमान लगाया?
उत्तर :
दुष्यंत ने सर्वदमन के बारे में अनुमान लगाया कि यह बालक अवश्य किसी तेजस्वी वीर का पुत्र है।

प्रश्न 4.
दुष्यंत सर्वदमन की हथेली को देखकर क्यों चकित रह गए?
उत्तर :
दुष्यंत सर्वदमन की हथेली को देखकर चकित रह गए, क्योंकि उसमें चक्रवर्तियों के लक्षण थे और कमल के समान सुंदर थी।

प्रश्न 5.
दुष्यंत के अनुसार कौन-से मनुष्य धन्य हैं?
उत्तर :
दुष्यंत के अनुसार वे मनुष्य धन्य हैं जो अपने पुत्रों को गोद में लेकर उनके अंग की धूलि से अपनी गोद मैली करते हैं और उनके तुतले बोल सुनते हैं।

प्रश्न 6.
दुष्यंत अपनी तुलना प्यासे हिरन से क्यों करते हैं?
उत्तर :
दुष्यंत अपनी तुलना प्यासे हिरन से करते हैं, क्योंकि जैसे मृगतृष्णा प्यासे हिरन को व्याकुल करती है, वैसे ही शकुंतला उसकी पत्नी ही है या अन्य स्त्री यह बात दुष्यंत को व्याकुल कर रही है।

प्रश्न 7.
बालक को रक्षाबंधन किसने दिया था?
उत्तर :
बालक को रक्षाबंधन महात्मा मरीचि के पुत्र कश्यप ने दिया था।

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प्रश्न 8.
रक्षाबंधन के साँप न बनने पर दुष्यंत क्या अनुभव करते हैं?
उत्तर :
रक्षाबंधन के साँप न बनने पर दुष्यंत अपना मनोरथ पूर्ण होने के आनंद का अनुभव करते हैं।

प्रश्न 9.
शकुंतला किसकी पुत्री थी?
उत्तर :
शकुंतला मेनका नामकी अप्सरा की पुत्री थी।

सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :

(1) दुष्यंत ने सर्वदमन को ऋषिकुमार समझ लिया, क्योंकि …
(अ) उसके बाल ऋषिकुमारों जैसे थे।
(ब) उसकी वेशभूषा ऋषिकुमारों जैसी थी।
(क) उन्होंने सर्वदमन को ऋषि के आश्रम में देखा था।
उत्तर :
दुष्यंत ने सर्वदमन को ऋषिकुमार समझ लिया, क्योंकि उन्होंने सर्वदमन को ऋषि के आश्रम में देखा था

(2) तपस्विनी ने दुष्यंत को शकुंतला के पति का नाम नहीं बताया, क्योंकि …
(अ) उसने बिना किसी अपराध के पत्नी को छोड़ दिया था।
(ब) वह उसका नाम भूल गई थी।
(क) उसे उसका नाम बताने से मना किया गया था।
उत्तर :
तपस्विनी ने दुष्यंत को शकुंतला के पति का नाम नहीं बताया, क्योंकि उसने बिना किसी अपराध के पत्नी को छोड़ दिया था

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(3) तपस्विनी घबरा गई, क्योंकि …
(अ) सिंहनी बालक की तरफ बढ़ रही थी।
(ब) बिना सूचना के आश्रम में एक अपरिचित व्यक्ति घुस आया था।
(क) उस बालक की बाँह से रक्षाबंधन कहीं गिर गया था।
उत्तर :
तपस्विनी घबरा गई, क्योंकि उस बालक की बाँह से रक्षाबंधन कहीं गिर गया था

कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(कमल, अपराजित, तपोवन, सर्वदमन, स्नेह)
(1) तेरा नाम ऋषियों ने सर्वदमन रखा है, सो ठीक ही है।
(2) क्या कारण है कि मेरा स्नेह इस बालक की ओर उमड़ा-सा आता है।
(3) हथेली का शोभा प्रायः कमल को भी लज्जित कर रही है।
(4) तुमने तपोवन के विरुद्ध यह आचरण क्यों सीखा है?
(5) इस रक्षाबंधन का नाम अपराजित है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए :
(1) सर्वदमन के मुख की दमक …………….. के समान थी।
A. बिजली
B. सोने
C. हीरे
D. अग्नि
उत्तर :
D. अग्नि

(2) मेनका कौन थी?
A. महारानी
B. अप्सरा
C. देवी
D. गंधर्व
उत्तर :
B. अप्सरा

(3) पहली तपस्विनी का नाम क्या था?
A. सुव्रता
B. नम्रता
C. अमृता
D. सुरुचि
उत्तर :
A. सुव्रता

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(4) महर्षि कश्यप के पिता का नाम …………… था।
A. विश्वामित्र
B. मरीचि
C. भृगु
D. मतंग
उत्तर :
B. मरीचि

निम्नलिखित परिच्छेद को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार एक अच्छा जंगल ‘जैविक भंडार घर’ होता है। यह हजारों प्रजातियों के पौधों को उगाकर रखता है, जो बाद में चलकर बहुमूल्य हो जाते हैं। अगर हम जंगल को एक सीमा से भी ज्यादा छाँटते है या खत्म करते हैं, तो वे चीजें भी नष्ट हो जाती हैं जिनकी हमें कभी भी बहुत जरूरत हो सकती है। यह एक संभवित पौधा खाने की औषधीय वस्तु या कोई उपयोगी चीज बनाने में इस्तेमाल होनेवाली कोई जरूरी वस्तु में से कुछ भी हो सकता है।

प्रश्न 1.
(1) एक अच्छा जंगल क्या कहलाता है? ।
उत्तर :
एक अच्छा जंगल ‘जैविक भंडार घर’ कहलाता है।

प्रश्न 2.
जंगल को ज्यादा छाँटने या खत्म करने से क्या नुकसान होता है?
उत्तर :
जंगल को ज्यादा छाँटने या खत्म करने से अत्यंत उपयोगी और जरूरत के समय काम आनेवाली बहुमूल्य वस्तुएँ नष्ट हो जाती हैं।

प्रश्न 3.
इस परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर :
उचित शीर्षक : जंगल की सुरक्षा – हमारा कर्तव्य

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प्रश्न 4.
पर्यायवाची शब्द लिखिए :
(1) जंगल = ………..
(2) घर = ………….
(3) बहुत = …………
उत्तर :
(1) जंगल = वन
(2) घर = गृह, आवास
(3) बहुत = अधिक

प्रश्न 5.
इस परिच्छेद आधारित दो प्रश्न बनाइए।
उत्तर :
(1) जंगलों की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?
(2) जंगल हमारे लिए महत्त्वपूर्ण क्यों है?

सोच अपनी-अपनी

प्रश्न 1.
आपको कौन-सा टीवी प्रोग्राम अच्छा लगता है? क्यों? दस-पंद्रह वाक्यों में वर्णन कीजिए।
उत्तर :
आजकल टीवी के विविध चैनलों पर कई प्रोग्राम दिखाए जाते हैं। सी.आई.डी., क्राईम पेट्रोल, रसोई शो, सास बिना ससुराल, समाचार, बड़े अच्छे लगते हैं, कुछ तो लोग कहेंगे, तारक मेहता का उल्टा चश्मा आदि प्रोग्राम बहुत लोकप्रिय हैं। इन प्रोग्रामों में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ नामक कार्यक्रम मुझे बहुत अच्छा लगता है। यह स्वच्छ पारिवारिक कार्यक्रम है। इसमें गोकुलधाम सोसायटी

के सभ्यों के जीवन से संबंधित विविध प्रसंगों और घटनाओं का सुंदर चित्रण किया गया है। जेठालाल, दयाबेन, डॉक्टर हाथी, बबीताजी, सोढी और टप्पू-सेना आदि पात्रों का अभिनय जानदार है।

एक दिन जेठालाल अपने ही गोदाम में अपने सहायक नटुकाका के हाथों गलती से कैद हो जाते हैं। इसके कारण उन पर जो बीतती है उसका बड़ा मार्मिक चित्रण दिखाया गया था। इसके अतिरिक्त टप्पू-सेना की शरारतें, सोसायटी का खेल-महोत्सव, पत्रकार पोपटलाल की पार्टी आदि प्रसंगों का प्रदर्शन बहुत ही मनोरंजक था।

इस सिरियल में दिखाए जानेवाले सभी प्रसंग सुरुचिपूर्ण एवं शिष्ट होते हैं। विविध प्रसंगों में हास्यरस सहज ढंग से निष्पन्न होता है। सब प्रसंग बहुत ही मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद होते हैं। इसलिए ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ प्रोग्राम मुझे बहुत अच्छा लगता है।

प्रश्न 2.
आप कक्षा में पढ़ाई कर रहे हों तब भूकंप आ जाए तो आप क्या करेंगे?
उत्तर :
कक्षा में पढ़ाई करते समय यदि भूकंप आ जाए तो मैं खड़ा होकर जोर से चिल्लाऊँ, “भागो, भागो, जल्दी बाहर निकल जाओ, भूकंप आया” और ऐसा चिल्लाते हुए साथियों के साथ मैं शालाभवन से बाहर आ जाऊँगा।

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प्रश्न 3.
चित्रों का अवलोकन करके अपने शब्दों में कहानी लिखिए :
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उत्तर :
लकड़हारा और देवदूत
एक लकड़हारा था। वह रोज जंगल में जाता, लकड़ियाँ काटता और उन्हें बाजार में बेच देता था। इन पैसों से ही उसके परिवार का गुजारा होता था।
एक दिन लकड़हारा एक पेड़ पर चढ़कर उसकी एक डाल काट रहा था। पेड़ नदी के किनारे था। अचानक उसकी कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूट गई और नीचे नदी में जा गिरी। लकड़हारा पेड़ से उतरा, पर उसे तैरना नहीं आता था। अतः उदास होकर वहीं बैठ गया।

संयोग से एक देवदूत वहाँ से गुजरा। उसकी दृष्टि लकड़हारे पर पड़ी। उसने लकड़हारे से उसकी उदासी का कारण पूछा। लकड़हारे ने उसे नदी में अपनी कुल्हाड़ी गिरने की बात बताई। देवदूत ने कहा, “तुम घबराओ मत। मैं नदी से तुम्हारी कुल्हाड़ी निकाल दूंगा।”

देवदूत ने पहले एक सोने की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” लकड़हारे ने कहा, “नहीं, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।” तब देवदूत ने चाँदी की कुल्हाड़ी निकाली। लकड़हारे ने कहा, “यह भी मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।” अंत में देवदूत ने लोहे की कुल्हाड़ी निकाली उसे देखकर लकड़हारा खुशी से चिल्ला उठा, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है।”

देवदूत लकड़हारे की ईमानदारी पर बहुत खुश हुआ। उसने सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी लकड़हारे को इनाम के रूप में दे दी।

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भाषा सज्जता

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, संख्या, परिणाम आदि)
बताते हैं। वे ‘विशेषण’ कहलाते हैं।

विशेषण के चार प्रकार हैं :

(1) गुणवाचक विशेषण : अच्छा लड़का, चतुर लड़की।
(2) संख्यावाचक विशेषण : दो लड़के, पाँच उँगलियाँ।
(3) परिमाणवाचक विशेषण : दो लीटर दूध, एक किलो मिठाई, थोड़ी शक्कर।
(4) सार्वनामिक विशेषण : वह आदमी, ये आम ।

निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण छाँटकर उनके प्रकार बताइए:

(1) सानिया बाजार से थोड़ी चीनी लाई।
(2) कुछ लड़के उद्यान में खेल रहे हैं।
(3) ओम चतुर लड़का है।
(4) श्याम बीस किलो आटा लाया।
(5) साहिल के पास दस रुपए हैं।
(6) सूरत ऐतिहासिक नगर है।
(7) परिश्रमी छात्र कभी असफल नहीं होता।
(8) हमने बाजार से दो लीटर दूध लिया।
(9) छात्रावास में बीस छात्र हैं।
(10) वे लड़के खेल रहे हैं।
उत्तर :
(1) थोड़ी – परिमाणवाचक विशेषण
(2) कुछ _ – संख्यावाचक विशेषण
(3) चतुर – गुणवाचक विशेषण
(4) बीस किलो – परिमाणवाचक विशेषण
(5) दस – संख्यावाचक विशेषण
(6) ऐतिहासिक – गुणवाचक विशेषण
(7) परिश्रमी – गुणवाचक विशेषण
(8) दो लीटर – परिमाणवाचक विशेषण
(9) बीस – संख्यावाचक विशेषण
(10) वे – सार्वनामिक विशेषण

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निम्नलिखित विशेषणों का तीन प्रकार से वाक्य में उपयोग कीजिए :

(1) सुंदर
(2) बड़ा
(3) मेहनती
(4) चालाक
उत्तर:
(1) सुंदर :
(अ) मल्लिका सुंदर लड़की है।
(ब) निधि मल्लिका से सुंदर लड़की है।
(क) निधि सबसे सुंदर लड़की है।

(2) बड़ा:
(अ) गीताभवन बड़ा मकान है।
( ब ) गीताभवन रामभवन से बड़ा मकान है।
( क ) गीताभवन मुहल्ले में सबसे बड़ा मकान है।

(3) मेहनती :
(अ) रोमील मेहनती लड़का है।
(ब) रोमील साहिल से मेहनती लड़का है।
(क) रोमील कक्षा में सबसे मेहनती लड़का है।

(4).चालाक:
(अ) रूपा चालाक लड़की है।
(ब) रूपा मोना से चालाक लड़की है।
(क) रूपा कक्षा में सबसे चालाक लड़की है।

निम्नलिखित शब्दों का लिंग-परिवर्तन कीजिए :

(1) हिरन – हिरनी
(2) शिक्षक – शिक्षिका
(3) पंडित – पंडिताइन
(4) छात्र – छात्रा
(5) दास – दासी
(6) मोर – मोरनी
(7) मजदूर – मजदूरनी
(8) पुजारी – पुजारिन
(9) पड़ोसी – पड़ोसिन
(10) गुरु – गुरुआइन
(11) बूढ़ा – बुढ़िया
(12) नायक – नायिका

भरत Summary in Hindi

ऋषि के आश्रम का दृश्य : आश्रम में शकुंतला का पुत्र भरत एक सिंहशावक के साथ खेल रहा है। वह उसके दाँत गिनना चाहता है। आश्रम में रहनेवाली दो तपस्विनियाँ उसे रोकने का प्रयत्न करती हैं। राजा दुष्यंत एक पेड़ के पीछे छिपकर यह दृश्य देख रहे हैं। बालक के प्रति राजा दुष्यंत के मन में स्नेह उमड़ता है।

खिलौना देने का लालच : एक तपस्विनी खिलौना देने का लालच बताकर बालक से सिंहशावक को छोड़ देने के लिए कहती है। बालक खिलौना लिए बिना उसे छोड़ना नहीं चाहता। तब उस तपस्विनी को दूसरी तपस्विनी मिट्टी का मोर लाने के लिए भेजती है।

बालक ऋषिकुमार नहीं : बालक सिंह के बच्चे को नहीं छोड़ता तो एक तपस्विनी दुष्यंत से कहती है कि वह बालक को समझाए। दुष्यंत बालक को ‘ऋषिकुमार’ कहकर संबोधित करता है। दुष्यंत के कहने पर बालक सिंहशावक को छोड़ देता है। तपस्विनी दुष्यंत को बताती है कि बालक ऋषिपुत्र नहीं है, पुरुवंशी है। तपस्विनी को इन बातों से आश्चर्य होता है, बालक की सूरत राजा दुष्यंत की सूरत से मिलती है और बालक दुष्यंत को नहीं पहचानता फिर भी उनकी बात मान ली।

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शकुंत-लावण्य : एक तपस्विनी बालक को मिट्टी का मोर लाकर देती है और उससे ‘शकुंत-लावण्य (पक्षी का सौंदर्य)’ देखने के लिए कहती है। ‘शकुंत-ला’ शब्द सुनकर बालक उसे अपनी माँ का नाम समझ लेता है। राजा दुष्यंत को अपनी पत्नी ‘शकुंतला’ की याद आती है, जिसका उन्होंने त्याग कर दिया था।

रक्षाबंधन : सिंहशावक के साथ खेलते समय बालक की बाँह में बँधा हुआ रक्षा का धागा (रक्षाबंधन) जमीन पर गिर जाता है। दुष्यंत उसे उठा लेते हैं, तो तपस्विनियों को बहुत अचरज होता है। वे बताती हैं कि इस रक्षाबंधन को बालक के माता-पिता को छोड़कर यदि दूसरा कोई उठाए तो वह साँप बनकर उसे इस तरह यह निश्चित हो जाता है कि भरत (सर्वदमन) नामक वह बालक दुष्यंत और शकुंतला का ही पुत्र है।

भरत Summary in English

Scene of Kanva Rushi’s Ashram : Shakuntala’s son Bharat is playing with a cub in the ashram (hermitage). He wants to count the teeth of the cub. The two women practising penance in the ashram try to stop the child from counting the teeth. The King Dushyant is looking at the scene hiding behind a tree. Seeing the scene, his love for the child overflows.

Temptation of giving a toy to Bharat : One of the women from the ashram tries to make the child leave the cubby tempting to give him a toy. When the child is not ready to leave the cub without getting a toy, the woman asks other woman to bring a toy-peacock from the ashram and give it to the child.

The child is not a ‘Rushikumar’: As the child does not leave the cub, the woman (practising penance) requests Dushyant to make the child leave the cub. When Dushyant addresses the child ‘Rushikumar’ and tells him to leave the cub, the child at once leaves the cub. The woman tells Dushyant that the child is not a son of a sage (Rushikumar) but is belonging to Puru family. But the woman gets astonished that the child’s face is just like the face of Dushyant and the child also agreas to him without recognizing Dushyant.

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Shakunt-charm (Charm of a bird) : The woman (tapaswini) brings a toy-peacock and tells the child to see (Shakunt-charm) the charm of a bird. Hearing this, the child at once remembers his mother ‘Shakuntala’. The King Dushyant also remembers his wife ‘Shakuntala’ to whom he had abandoned.

Rakshabandhan (A thread) : While playing with the cub, the thread (Rakshabandhan) which is tied around his hand drops on the floor. Dushyant at once picks it up. So the women (tapaswini) get astonished. They say that no one except the child’s parents can pick up the thread (Rakshabandhan). If someone picks up the thread, the thread becomes (turns into) a snake and bites him. In this way they (two women in the ashram) become sure that the child named Bharat is the son of Dushyant and Shakuntala.

विषय-प्रवेश

संस्कृत भाषा के महाकवि कालिदास का लिखा हुआ ‘अभिज्ञानशाकुंतल’ बहुत प्रसिद्ध नाटक है। राजा लक्ष्मणसिंह ने उसका हिन्दी में अनुवाद किया है। यह पाठ उसीका एक अंश है। बालक भरत (सर्वदमन) सिंह के बच्चे के साथ खेल रहा है। छिपकर खड़े राजा दुष्यंत उसे बड़े चाव से देख रहे हैं। बाद में पता चलता है कि भरत उन्हीं का पुत्र है।

शब्दार्थ (Meanings)

तपस्विनी – तप करनेवाली स्त्री; a woman practising penance ओट- आड़, पीछे का भाग; backyard सर्वदमन – सबका दमन करनेवाला, दुष्यंतपुत्र भरत का एक नाम; proper name of Dushyant’s son Bharat उमड़ आना – बढ़ना; to grow हठीला – जिद्दी; obstinate तेजस्वी – पराक्रमी; brave दमकना – चमकना; to shine, to flash चक्रवर्ती – समुद्र तक की पृथ्वी को जीतनेवाला सम्राट; an emperor धूलि – मिट्टी; soil उज्ज्वल – चमकते हुए, स्वच्छ; clean तुतले वचन – तुतली बोली में बोले गए शब्द; words spoken in stammering अकारण – बिना किसी कारण, बेवजह; without any reason बली – बलवान; strong आचरण-व्यवहार; conduct, behaviour बढ़भागी-बड़े भाग्यवाला; very lucky अचंभा- आश्चर्य, विस्मय; astonishment, wonder सूरत – चेहरा; a face पुरुवंशी – ‘पुरु’ नाम के राजा के कुल का (राजा दुष्यंत पुरुवंशी हैं।); belonging to Puru family वृद्धावस्था – बुढ़ापा; old age जितेन्द्रिय – इन्द्रियों को जीतनेवाला; having thorough control over one’s senses कुटी – झोंपड़ी; a cottage, a hut परदेशी – दूसरे देश का; a foreigner निडर – निर्भय; brave अप्सरा – देवलोक में रहनेवाली स्त्री; a celestial, a nymph, a fairy देवपितर – देव और पूर्वज; a god and an ancestor विवाहिता – शादीशुदा स्त्री; a married woman शकुंतलावण्य – पक्षी का सौंदर्य; charm of a bird व्याकुल – बेचैन; uneasy वृत्तांत – वर्णन, घटना; description, narration मृगतृष्णा- तेज धूप में चमकती रेत को पानी समझना; to believe water to bright sand, mirage नाहर – शेर; a lion नामकरण – बालक का नाम निश्चित करने की विधि; a ceremony of giving name to a child, the naming ceremony धागा – दोरा; a thread

मुहावरे-अर्थ और वाक्य-प्रयोग

प्रश्न 1.
बात कान पर न धरना – बात अनसुनी करना
वाक्य :
मैं कब से बोल रहा हूँ और तुम मेरी बात कान पर नहीं धरते।

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प्रश्न 2.
धोखा खा जाना – मूर्ख बनना, सच्ची बात को न समझ पाना।
वाक्य :
भोलेभाले लोग पीतल को सोना समझकर धोखा खा जाते हैं।

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