GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 3 कुत्ते की वफ़ादारी

Gujarat Board GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 3 कुत्ते की वफ़ादारी Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.

Gujarat Board Textbook Solutions Class 7 Hindi Chapter 3 कुत्ते की वफ़ादारी

GSEB Solutions Class 7 Hindi कुत्ते की वफ़ादारी Textbook Questions and Answers

अभ्यास

1. नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग कहानी के जिस वाक्य में हुआ हो, वह वाक्य पढ़िए :

(1) समाधि : बनजारे ने उस वफ़ादार कुत्ते का समाधि मंदिर बनवाया।
(2) बनजारा : पुराने जमाने में व्यापार का सामान लाने-ले जाने का काम बनजारे करते थे।
(3) वफ़ादार : कुत्ता बड़ा वफ़ादार था।
(4) शव : वह कुत्ते के शव को अपनी गोदी में लेकर फूट-फूटकर रोने लगा।
(5) लुटेरा : अगर चोर-लुटेरे पड़ाव की तरफ आते दिखाई देते थे तो कुत्ता भौंक-भौंककर उन्हें दूर भगा देता था।
(6) जमानत : तो तुम इसे ही जमानत के रूप में दे दो।
(7) सूद : मैं आपकी पूरी रकम सूद समेत एक साल में ही चुका दूंगा।
(8) गोद : वह कुत्ते के शव को अपनी गोद में लेकर फूट-फूटकर रोने लगा।

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2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
समाधि क्यों बनाई जाती है?
उत्तर :
किसी विशिष्ट व्यक्ति या प्राणी की याद कायम रखने और उसके प्रति अपना प्रेम तथा सम्मान प्रकट करने के लिए उसकी समाधि बनाई जाती है।

प्रश्न 2.
आप इस कहानी को और कौन-कौन-से उचित शीर्षक देना चाहेंगे?
उत्तर :
मैं इस कहानी को निम्नलिखित शीर्षक देना चाहूँगा :
(1) जल्दबाजी का नतीजा (परिणाम)
(2) अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत
(3) एक कुत्ते का समाधि-मंदिर
(4) लाखा बनजारा और उसका कुत्ता

प्रश्न 3.
कुत्ते को वफ़ादार प्राणी क्यों कहा गया है?
उत्तर :
कुत्ता अपने मालिक के घर का भरोसेमंद चौकीदार है। कुत्ते के कारण चोर मालिक के घर में घुसने की हिम्मत नहीं करते। यदि चोर मालिक का सामान चुरा ले जा रहे हों तो कुत्ता उनका पीछा करता है। अगर चोरों ने कहीं सामान छिपाया हो तो कुत्ता मालिक को उस जगह तक ले जाता है और छिपाया हुआ सामान वापस दिला देता है। मालिक के लिए कुत्ता अपना जीवन भी कुर्बान कर देता है। अपने इन्हीं गुणों के कारण कुत्ते को ‘वफ़ादार प्राणी’ कहा गया है।

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प्रश्न 4.
बनजारे ने कुत्ते को आते देख कुछ सोचा होता तो क्या होता?
उत्तर :
बनजारे ने कुत्ते को आते देख कुछ सोचा होता तो वह कुत्ते पर लाठी से प्रहार न करता। कुत्ता बनजारे के पास पहुँच जाता तो बनजारा उसके गले में बंधी हुई चिट्ठी अवश्य देखता। चिट्ठी पढ़कर उसे खुशी होती और अपने कुत्ते पर गर्व का अनुभव होता।

प्रश्न 5.
सेठ ने कुत्ते को क्यों मुक्त कर दिया?
उत्तर :
सेठ के यहाँ चोरों ने डाका डाला था। कुत्ते ने चोरों का पीछा किया। चोरों ने दूर जंगल में जाकर सारा माल जमीन में गाड़ दिया । फिर वे भाग गए। कुत्ता सेठजी को जंगल में ले गया और भौंक-भौंककर वह जगह बताने लगा, जहाँ चोरों ने माल गाड़ा था। थोड़ा खोदने पर ही चुराया गया सारा सामान मिल गया। सेठजी की खुशी का पार न रहा। कुत्ते की वफ़ादारी पर मुग्ध होकर सेठजी ने उसे मुक्त कर दिया।

3. निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश के क्रम में लिखिए :

सुंदर, वापस, वफ़ादार, इसीलिए, आश्चर्य, लुटेरा।
उत्तर :
आश्चर्य, इसीलिए, लुटेरा, वफ़ादार, वापस, सुंदर ।

4. ‘यदि आप होते तो क्या करते?’ बताइए :

प्रश्न 1.
कुत्ते को जमानत पर रखकर सेठ ने पैसे दिए, सेठ की जगह आप होते तो …
उत्तर :
सेठ की जगह मैं होता तो मैं भी वही करता जो सेठ ने किया, क्योंकि रुपये उधार देने की यही रीति है।

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प्रश्न 2.
लाखा ने कुत्ते को बेवफा समझकर लाठी का प्रहार किया, लाखा की जगह आप होते तो …
उत्तर :
लाखा की जगह यदि मैं होता तो लाखा की तरह जल्दबाजी में कुत्ते पर प्रहार न करता। मैं कुत्ते को अपने पास आने देता। मैं उसके गले में बँधी सेठ की चिट्ठी देखता। उसे पढ़कर मैं अपने कुत्ते को गले लगा लेता।

5. पढ़िए, हँसिए और सही शब्द लिखिए :
GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 3 कुत्ते की वफ़ादारी 1
उत्तर :
राजा – रानी, ग्वाला – ग्वालिन, अभिनेता – अभिनेत्री, रानी – शेर। सुनार ऊंट – राजा, शेरनी
सुनार – सुनारिन, ऊँट – ऊँटनी, लुटेरा – लुटेरिन,
बनजारा – बनजारिन, सेठ – सेठानी।

स्वाध्याय

1. ढाँचे पर से कहानी लिखिए :
एक नौकर द्वारा हार चोरी करना – सेठ का सभी नौकरों से पूछना – किसी का चोरी कबूल न करना – सेठ द्वारा युक्ति करना – प्रत्येक को सात-सात ईंच की लकड़ी देना – जादू की छड़ी होने की बात कहना – दूसरे दिन दिखाने को कहना – चोर की लकड़ी एक ईंच बढ़ जाएगी – घर जाकर हार चुरानेवाले नौकर का ‘एक ईंच लकड़ी काटना – दूसरे दिन चोर का पकड़ा जाना।
उत्तर :
सेठ की चतुराई
सुंदर नगर में माणिकचंद नाम का एक सेठ रहता था। उसके घर में कई नौकर-चाकर थे।
एक दिन सेठानी अपना कीमती हार मेज पर ही रखकर किसी काम से चली गई। एक नौकर ने मौका देखा और हार ले लिया। सेठानी लौटकर आई तो मेज पर हार न देखकर सन्न रह गई। उसने सेठ से हार की चोरी की बात की। सेठ ने सभी नौकरों को बुलाकर पूछा, परंतु किसी ने हार की चोरी कबूल नहीं की।

सेठ बुद्धिमान थे। उन्होंने एक युक्ति की। उन्होंने प्रत्येक नौकर को सात ईंच की लकड़ी दी और कहा, “देखो, यह जादू की छड़ी है। तुम इसे घर ले जाओ। कल लाकर मुझे दिखाना। जिसने हार चुराया होगा, उसकी लकड़ी एक ईंच बढ़ जाएगी।”

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सभी नौकर अपनी-अपनी लकड़ी लेकर घर गए। हार चुरानेवाले नौकर ने सोचा, “मैंने हार की चोरी की है, इसलिए मेरी लकड़ी एक ईंच बढ़ जाएगी। क्यों न मैं एक ईंच लकड़ी काट दूं तो एक ईंच बढ़ने पर भी वह सात ईंच की ही रहेगी।” ऐसा सोचकर उसने अपनी लकड़ी एक ईंच काट दी।

दूसरे दिन सभी नौकर अपनी-अपनी लकड़ी लेकर सेठ के घर पहुँचे। सेठ ने प्रत्येक की लकड़ी देखी। एक नौकर की लकड़ी एक ईंच कम थी। जरा-सा धमकाने पर उसने चोरी कबूल कर ली। सेठ ने उससे हार वापस लिया और उसे नौकरी से निकाल दिया। इस तरह सेठ ने युक्ति से हार को चुरानेवाले नौकर को पकड़ा।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
रात को कुत्ता पड़ाव की रखवाली कैसे करता था?
उत्तर :
कुत्ता बहुत. वफ़ादार था। रात को वह सावधान रहकर पड़ाव की रखवाली करता था। अगर चोर-लुटेरे पड़ाव की तरफ आते दिखाई देते तो कुत्ता भौंक-भौंककर उन्हें दूर भगा देता था।

प्रश्न 2.
सेठ ने बनजारे के साथ कौन-सी शर्त रखी? .
उत्तर :
बनजारा सेठ के पास उधार रुपये लेने के लिए आया था; परंतु रुपये के बदले में गिरवी रखने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं था। तब सेठ ने बनजारे से कहा कि तुम अपना कुत्ता ही जमानत के रूप में रख दो। जब तुम सारे पैसे लौटा दोगे तब कुत्ता तुम्हें वापस लौटा दूंगा। इस प्रकार सेठ ने बनजारे के आगे रकम के बदले में कुत्ते को गिरवी रखने की शर्त रखी।

प्रश्न 3.
सेठ ने कुत्ते को क्यों मुक्त कर दिया?
उत्तर :
सेठ के यहाँ चोरों ने डाका डाला था। कुत्ते ने चोरों का पीछा किया। चोरों ने दूर जंगल में जाकर सारा माल जमीन में गाड़ दिया । फिर वे भाग गए। कुत्ता सेठजी को जंगल में ले गया और भौंक-भौंककर वह जगह बताने लगा, जहाँ चोरों ने माल गाड़ा था। थोड़ा खोदने पर ही चुराया गया सारा सामान मिल गया। सेठजी की खुशी का पार न रहा। कुत्ते की वफ़ादारी पर मुग्ध होकर सेठजी ने उसे मुक्त कर दिया।

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प्रश्न 4.
‘कुत्ते की वफ़ादारी’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर :
लाखा ने अपने कुत्ते को सेठ को छोड़कर अपने पास आते देखा तो जल्दबाजी में उस पर लाठी का प्रहार कर दिया। उससे कुत्ते की मृत्यु हो गई। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। सोच-समझकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। जल्दबाजी में काम करने पर बाद में लाखा बनजारा की तरह पछताना पड़ता है।

3. नीचे दिए गए वाक्यों के रेखांकित शब्द का लिंग-परिवर्तन करके वाक्य फिर से लिखिए :

उदा., घोड़ा दौड़ रहा है। – घोड़ी दौड़ रही है।

(1) सेठ ने कहा, “रुपये तो मैं दे दूंगा।”
(2) बनजारे को बहुत दुःख हुआ।
(3) ऊँट की पीठ पर सामान लदा है।
(4) मैदान में लड़का खेल रहा है।
उत्तर :
(1) सेठानी ने कहा, “रुपये तो मैं दे दूंगी।”
(2) बनजारिन को बहुत दुःख हुआ।
(3) ऊँटनी की पीठ पर सामान लदा है।
(4) मैदान में लड़की खेल रही है।

4. बक्से में से लिंग आधारित शब्दों के जोड़े मिलाइए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए :

शिष्य, नागिन, शिक्षक, घोड़ा, गाय, देव, बैल, शिष्या, घोड़ी, शिक्षिका, देवी, नाग
उत्तर :
(1) शिष्य – शिष्या :
शिष्य गुरु की सेवा कर रहा है।
शिष्या गुरु की सेवा कर रही है।

(2) नाग – नागिन :
नाग फन उठाए बैठा है।
नागिन फन उठाए बैठी है।

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(3) शिक्षक-शिक्षिका :
शिक्षक पढ़ा रहा है। .
शिक्षिका पढ़ा रही है।

(4) गाय-बैल :
गाय दूध देती है।
बैल किसान का मित्र है।

(5) देव – देवी :
देव प्रसन्न होकर वरदान देते हैं।
देवी प्रसन्न होकर वरदान देती है।

(6) घोड़ा-घोड़ी :
महाराणा का घोड़ा बहुत वफ़ादार था।
सवार की रक्षा के लिए घोड़ी ने अपने प्राण दे दिए।

5. रेखांकित शब्द की संज्ञा पहचानिए :

(1) सैनिक हमारे देश की रक्षा करते हैं।
(2) हमें देश की प्रगति के बारे में सोचना चाहिए।
(3) गंगा भारत की पवित्र नदी है।
उत्तर :
(1) सैनिक – जातिवाचक संज्ञा
(2) देश – जातिवाचक संज्ञा
(3) नदी – जातिवाचक संज्ञा

भाषा-सज्जता

नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़िए। रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए :

(1) आशा विमान चलाती है।
(2) नर्मदा गुजरात की सबसे बड़ी नदी है।
(3) हिमालय भारत का सबसे ऊँचा पर्वत है।
(4) नीम गुणकारी पेड़ है।
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द आशा, नर्मदा, हिमालय और नीम किसी खास व्यक्ति, नदी, पर्वत और पेड़ का निर्देश करते हैं।
व्यक्तिवाचक संज्ञा – किसी खास व्यक्ति, प्राणी या स्थान को सूचित करनेवाली संज्ञा को ‘व्यक्तिवाचक संज्ञा’ कहते हैं।

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प्रश्न 1.
निर्देशित शब्दों में से व्यक्तिवाचक संज्ञा छाँटिए।
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उत्तर :
व्यक्तिवाचक संज्ञा : मोहन, गुजरात, तापी, वीर सावरकर, गिरनार।

नीचे दिए गए वाक्यों को पढ़िए। रेखांकित शब्दों को ध्यान से पढ़िए :

(1) हमारे देश के सैनिक बहादुर है।
(2) हमारी गाय का नाम गौरी है।
(3) नदी को लोकमाता कहते हैं।
(4) कुत्ता वफ़ादार प्राणी है।
इन वाक्यों में रेखांकित ‘सैनिक’, ‘गाय’, ‘नदी’ और ‘कुत्ता’ – ये किसी के विशेष नाम नहीं हैं। इन नामों से इनकी पूरी जाति का बोध होता है। इसलिए ये जातिवाचक संज्ञा हैं
जातिवाचक संज्ञा : जो शब्द संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

प्रश्न 2.
जातिवाचक शब्द छाँटकर सूचि बनाइए :
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उत्तर :
जातिवाचक शब्द : छात्र, लड़का, पर्वत, गाय, नदी, पेड़। .

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए संज्ञा-शब्दों को कोष्ठक में उचित स्थान पर लिखिए :
(भारत, हिमालय, नदी, वीर सावरकर, सैनिक, नर्मदा, पर्वत, नीम का पेड़)
उत्तर :
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योग्यता विस्तार

पशु-पक्षियों के बोलने का अपना तरीका होता है। उनकी बोली को प्रकट करने के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग होता है। इतना जानिए …
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Hindi Digest Std 7 GSEB कुत्ते की वफ़ादारी Important Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए :

प्रश्न 1.
पाटण कहाँ है?
A. उत्तर गुजरात में
B. दक्षिण गुजरात में
C. पूर्व गुजरात में
D. पश्चिम गुजरात में
उत्तर :
A. उत्तर गुजरात में

प्रश्न 2.
बनजारा सामान ढोने के लिए ………………. उपयोग करता था।
A. हाथियों का
B. घोड़ों का
C. ऊँटों का
D. गधों का
उत्तर :
C. ऊँटों का

प्रश्न 3.
बनजारा अपने पास कौन-सा हथियार रखता था?
A. बंदूक
B. पिस्तौल
C. माला
D. लाठी
उत्तर :
D. लाठी

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प्रश्न 4.
उधार लिए गए रुपयों पर क्या देना पड़ता है?
A. मूलधन
B. सूद
C. जुर्माना
D. दंड
उत्तर :
B. सूद

प्रश्न 5.
चोरों ने चोरी का माल-सामान कहाँ गाड़ा था?
A. खेत में
B. बगीचे में
C. जंगल में
D. मैदान में
उत्तर :
C. जंगल में

2. कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

(जबान, डाका, वफ़ादारी, गिरवी, पड़ाव)
(1) कुत्ता रात को बनजारे के पड़ाव की रखवाली करता था।
(2) बनजारा अपने कुत्ते की वफ़ादारी से खुश था।
(3) अपने कुत्ते को सेठ के यहाँ गिरवी रखने में बनजारे को बहुत दुःख हुआ।
(4) सेठ के यहाँ चोरों ने डाका डाला।
(5) कुत्ते को अपनी ओर आते देखकर लाखा ने सोचा कि कुत्ते ने मेरी जबान काट ली है।

3. सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए.:

प्रश्न 1.
लोग बनजारे को ‘लाखा बनजारा’ कहते थे, क्योंकि …
(अ) वह लाख बेचता था।
(ब) वह लखपति बाप का बेटा था।
(क) वह लाखों का व्यापार करता था।
उत्तर :
लोग बनजारे को ‘लाखा बनजारा’ कहते थे, क्योंकि वह लाखों का व्यापार करता था

प्रश्न 2.
बनजारे को रुपयों की जरूरत पड़ी, क्योंकि …
(अ) उसे व्यापार में बड़ा नुकसान हुआ था।
(ब) उसने जरूरत से ज्यादा माल खरीद लिया था।
(क) उसे पूरे देश में तीर्थयात्रा करनी थी।
उत्तर :
बनजारे को रुपयों की जरूरत पड़ी, क्योंकि उसे व्यापार में बड़ा नुकसान हुआ था

प्रश्न 3.
बनजारा अपने कुत्ते से खुश था, क्योंकि …
(अ) वह बहुत समझदार था।
(ब) वह बड़ा वफ़ादार था।
(क) वह बहुत शानदार था।
उत्तर :
बनजारा अपने कुत्ते से खुश था, क्योंकि वह बड़ा वफ़ादार था

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प्रश्न 4.
सेठ के द्वारा मुक्त होने के बाद कुत्ता जल्दी-जल्दी भागने लगा, क्योंकि …
(अ) सेठ के यहाँ रहते-रहते उसका दम घुटने लगा था।
(ब) घर के बच्चे उसे बहुत परेशान करते थे।
(क) उसे अपने मालिक से मिलना था।
उत्तर :
सेठ के द्वारा मुक्त होने के बाद कुत्ता जल्दी-जल्दी भागने लगा, क्योंकि उसे अपने मालिक से मिलना था

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए :

प्रश्न 1.
राधनपुर कहाँ है?
उत्तर :
राधनपुर उत्तर गुजरात के पाटण जिले में है।

प्रश्न 2.
बनजारे क्या करते थे?
उत्तर :
बनजारे व्यापार के लिए माल-सामान लाने-ले जाने का काम करते थे।

प्रश्न 3.
लाखा बनजारा रुपये लेने किसके पास गया?
उत्तर :
लाखा बनजारा रुपये लेने राधनपुर के एक सेठ के पास गया।

प्रश्न 4.
चोरों का पीछा कर कुत्ते ने क्या देख लिया?
उत्तर :
चोरों का पीछा कर कुत्ते ने देख लिया कि सेठ की दुकान से चुराया हुआ सामान उन्होंने कहाँ गाड़ा है।

प्रश्न 5.
सेठ हक्का-बक्का क्यों रह गया?
उत्तर :
सेठ हक्का-बक्का रह गया, क्योंकि कुत्ते ने भौंक-भौंककर उन्हें बता दिया कि लुटेरे उनकी दुकान तोड़कर माल उठा ले गए हैं।

प्रश्न 6.
सेठ ने किसे मुक्त किया?
उत्तर :
सेठ ने जमानत के रूप में अपने पास रखे हुए लाखा के कुत्ते को मुक्त किया।

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प्रश्न 7.
कुत्ते के गले में बँधी हुई चिट्ठी लाखा ने कब देखी?
उत्तर :
लाखा ने कुत्ते के गले में बँधी हुई चिट्ठी कुत्ते के बेहोश होकर गिर पड़ने पर देखी।

प्रश्न 8.
लाखा ने कुत्ते के प्रति अपने अपराध का प्रायश्चित्त किस प्रकार किया?
उत्तर :
लाखा ने कुत्ते की समाधि बनवाकर उसके प्रति किए गए अपने अपराध . का प्रायश्चित्त किया।

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
बनजारे ने कुत्ते को सेठ के पास गिरवी क्यों रखा?
उत्तर :
बनजारा सेठ से रुपये उधार मांगने गया था। सेठ रुपये देने को तैयार थे, परंतु वह रुपयों के बदले लाखा से कुछ गिरवी रखवाना चाहते थे। बनजारे के पास उस समय फूटी कौड़ी भी
नहीं थी। सेठ ने लाखा से उसके कुत्ते को जमानत के रूप में रखने के लिए कहा। बनजारे को दुःख तो बहुत हुआ, परंतु सेठ की बात मानने के सिवा कोई चारा नहीं था। इसलिए बनजारे ने कुत्ते को सेठ के पास गिरवी रखा।

प्रश्न 2.
लाखा ने कुत्ते पर लाठी का प्रहार क्यों किया?
उत्तर :
कुत्ते की वफ़ादारी से खुश होकर सेठ ने कुत्ते को मुक्त कर दिया। कुत्ता अपने मालिक से मिलने के लिए जल्दी-जल्दी भाग रहा था। लाखा सेठ से उधार लिए हुए रुपये सेठ को लौटाने के लिए उसी रास्ते से आ रहा था। उसने कुत्ते को देखा तो सोचा कि कुत्ता सेठ के यहाँ से भागकर आ रहा है। अब वह सेठ को क्या मुँह दिखाएगा? इसलिए क्रोध में आकर लाखा ने कुत्ते पर लाठी का प्रहार किया।

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प्रश्न 3.
सेठ ने चिट्ठी में क्या लिखा था?
उत्तर :
सेठ ने लाखा के कुत्ते के गले में बँधी चिट्ठी में लिखा था कि तुम्हारे कुत्ते ने मुझे सूद समेत रुपये लौटा दिए हैं। मेरी दुकान से चोरी किए गए मालं-सामान को उसने वापस दिला

प्रश्न 4.
बनजारा फूट-फूटकर क्यों रोने लगा?
उत्तर :
लाखा ने कुत्ते को बेवफा समझकर उस पर लाठी से प्रहार किया था। उससे कुत्ता मर गया। बाद में लाखा ने कुत्ते के गले में बँधी हुई चिट्ठी पढ़ी। उसमें सेठ ने लिखा था कि तुम्हारे कुत्ते ने मुझे सुद समेत रुपये लौटा दिए हैं। कुत्ते की वफादारी से खुश होकर मैंने उसे मुक्त कर दिया है। चिट्ठी पढ़कर लाखा हक्का-बक्का रह गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। इसलिए वह फूट-फूटकर रोने लगा।

6. निम्नलिखित पात्रों के बारे में जानकारी दीजिए :

प्रश्न 1.
लाखा
उत्तर :
लाखा एक बनजारा था। वह अपने ऊँटों पर गाँव का सामान लादकर शहर ले जाता था और शहर से मिसरी, गुड़, मसाले आदि भरकर गाँव में लाता था। इस प्रकार उसका लाखों का व्यापार था। इसलिए लोग उसे ‘लाखा बनजारा’ कहते थे।

प्रश्न 2.
सेठ
उत्तर :
सेठ राधनपुर का रहनेवाला था। वह दूसरों की वस्तु गिरवी रखकर उन्हें ब्याज पर धन देता था। सेठ ने लाखा बनजारे का कुत्ता गिरवी रखकर उसे बड़ी रकम उधार दी थी। सेठ दिल का उच्छा था और गुण की कीमत करना जानता था। लाखा बनजारे के कुत्ते की वफ़ादारी पर खुश होकर उसे मुक्त कर दिया और लाखा का कर्ज भी माफ कर दिया।

कुत्ते की वफ़ादारी Summary in English

In the olden times the goods were transported by the traders on their oxen. There lived such a trader. He would load the merchantise from the villages on his camels and would go to cities and would return with sugar, jaggery, spices to villages. His business ran into lakh of rupees, hence people used to call him A millionaire trader – Lakho Vanzaro’. Lakha had a beautiful dog. The dog was very faithful. He would guard the camp of Lakha at night. He would start barking if the robbers tried to come near the camp and they had to run away. Lakha – the trader was pleased with his dog’s faithfulness.

Once Lakha had to suffer a great loss in his business and he needed money. He approached a rich trader of Radhanpur. He narrated his mishap to the rich trader.”

The rich trader said, “I will surely lend you money but what will you mortgage with me ?
Lakha replied, “O rich trader! I haven’t any money left with me. I have lost everything in the business. Have trust in me and lend me money. I promise you that I will repay your money with interest within a year.”
The rich trader said, “Never mind, but you have a dog. You can leave this dog as a mortgage. I shall return your dog as soon as you repay my money with interest.”

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Lakh was unhappy to leave his dog there but he was helpless. He took money and left. Some days passed. Once the burglars broke into the rich man’s shop and stole his valuables. The dog chased them. At the far off the place in the forest, the burglars buried the stolen goods in the ground and ran away from there. The dog returned and tried to inform the rich man, through barking that the burglars had decamped with his valuables from his shop. The, trader was shocked. The dog began pulling his dhoti to take him to the place where his valuables were buried.

The trader followed the dog. After reaching the place where the goods lay buried, the dog started digging the place. After some digging, the trader could see the goods. He was very happy. He began patting the dog. He was astonished at the dog’s loyalty. On returning home, the trader wrote something on a piece of paper and tied it round the dog’s neck and released him from the mortgage. He said to the dog, “My dear dog, you are free now and you may go to your owner – Lakha Vanzara.” The dog was glad and he ran to his master.

Here, Lakha too made huge profit in his business. He also was going on the same route to meet the trader and return his money. He saw his dog coming towards him from a distance. He became unhappy. He thought that the dog had broken his promise to the trader. He had been disloyal. Now how he would show his face to the trader. Without much thinking he beat the dog with a stick. The dog fell down and became unconscious. Then

Lakha saw a piece of paper round the dog’s neck. He opened it and read. It was written, “Lakha, your dog has repaid my money with interest. Therefore I release him from mortgage. He has helped me to retrieve my stolen goods. Having been pleased, I myself made him free.”

Lakha was speechless. He cried loudly and said, “Oh God ! What have I done ?” He took the body of the dead dog in his lap and began weeping loudly. But what avail is repentence after the damage has been caused !
He made a tomb for the faithful dog, which still can be seen near the lake in Radhanpur of Patan district. It tells the story of the dog’s faithfuiness to the world.

कुत्ते की वफ़ादारी Summary in Gujarati

કૂતરાની વફાદારી જૂના જમાનામાં વેપારનો સામાન લાવવા-લઈ જવાનું કામ વણજારા કરતા હતા. એક વણજારો હતો. તે પોતાના ઊંટ પર ગામડાંનો માલસામાન શહેરોમાં લઈ જતો અને ત્યાંથી ખાંડ, ગોળ, મસાલા વગેરે ભરીને ગામડાંમાં લઈ આવતો. તેનો લાખો રૂપિયાનો વેપાર હતો.

એટલે લોકો તેને ‘લાખો વણજારો’ કહેતા હતા. લાખા પાસે એક સુંદર કૂતરો હતો. કૂતરો બહુ વફાદાર હતો. રાત્રે એ વણજારાના પડાવની ચોકી કરતો. જો ચોર, લુટારા પડાવ તરફ આવતા દેખાતા તો કૂતરો ભસી ભસીને તેમને દૂર ભગાડી દેતો. વણજારો પોતાના કૂતરાની વફાદારીથી બહુ ખુશ હતો.

એક વાર વણજારાને વેપારમાં ભારે ખોટ ગઈ અને તેને રૂપિયાની જરૂર પડી. તે રાધનપુરના એક શેઠની પાસે ગયો. તેણે શેઠને પોતાની વાત કહી.

શેઠે કહ્યું, “રૂપિયા તો હું આપીશ, પરંતુ તેના બદલામાં તું શું ગીરવી મૂકીશ?

લાખો બોલ્યો, “શેઠજી, મારી પાસે ફૂટી કોડી પણ નથી. મેં વેપારમાં સર્વસ્વ ખોઈ દીધું છે. મારા વચન પર વિશ્વાસ રાખો અને મને રૂપિયા આપો. હું આપની પૂરેપૂરી રકમ વ્યાજ સાથે એક વર્ષમાં જ ચૂકવી દઈશ.”

શેઠ બોલ્યા, “કંઈ વાંધો નહિ. તારી પાસે આ કૂતરો છે, તો તું એને જ જામીન તરીકે આપી દે. જ્યારે તું બધા રૂપિયા પાછા આપી દઈશ ત્યારે હું તને કૂતરો પાછો આપી દઈશ.”

વણજારાને પોતાનો કૂતરો આપતાં દુઃખ તો ખૂબ થયું, પરંતુ કોઈ ઉપાય નહોતો. રૂપિયા લઈને તે ચાલ્યો ગયો.

થોડા દિવસો વીત્યા. એક વાર શેઠને ત્યાં ચોરી થઈ. કૂતરાએ ચોરોનો પીછો કર્યો. દૂર જંગલમાં જઈને ચોરોએ બધો માલસામાન જમીનમાં દાટી દીધો અને ત્યાંથી રફુચક્કર થઈ ગયા. કૂતરો પાછો આવ્યો અને ભસી-ભસીને શેઠને બતાવવા લાગ્યો કે લુટારા આપની દુકાન તોડીને માલ ઉપાડી ગયા છે. શેઠ તો સ્તબ્ધ થઈ ગયા. કૂતરો શેઠનું ધોતિયું પકડીને આગળ ખેંચવા લાગ્યો. શેઠ કૂતરાની પાછળપાછળ ચાલવા લાગ્યા.

જ્યાં ચોરોએ માલસામાન સંતાડ્યો હતો ત્યાં જઈને કૂતરો પોતાના પગથી માટી ખોદવા લાગ્યો. થોડું ખોદતાં જ બધો સામાન બહાર દેખાવા લાગ્યો. શેઠના આનંદનો પાર નહોતો. તે કૂતરાને પ્રેમથી થાબડવા લાગ્યા. કૂતરાની વફાદારીથી તે મુગ્ધ થઈ ગયા. ઘેર જઈને તેમણે એક ચિઠ્ઠી લખીને કૂતરાના ગળાના પટ્ટામાં બાંધી દીધી અને તેને પોતાની જવાબદારીમાંથી મુક્ત કરીને કહ્યું, “કૂતરાભાઈ, તમે તમારા માલિક લાખા વણજારાની પાસે જાઓ. તમે મુક્ત છો.” કૂતરો ખુશ થઈ ગયો અને પોતાના માલિકને મળવા માટે દોડ્યો.

આ બાજુ લાખો પણ વેપારમાં ખૂબ રૂપિયા કમાયો. તે શેઠને તેની રકમ પાછી આપવા માટે એ જ રસ્તે આવી રહ્યો હતો. તેણે દૂરથી પોતાના કૂતરાને પોતાની તરફ આવતો જોયો. તે નારાજ થઈ ગયો. તે વિચારવા લાગ્યો કે કૂતરાએ મારા વચનનો ભંગ કર્યો છે. તેણે બેવફાઈ કરી છે. હવે હું શેઠને શું મોં બતાવીશ? તેણે સમજ્યા-વિચાર્યા વિના કૂતરાના માથા પર લાઠીનો પ્રહાર કરી દીધો કૂતરો બેહોશ થઈને નીચે પડ્યો.

લાખાએ જોયું કે કૂતરાના ગળાના પટ્ટામાં એક ચિઠ્ઠી બાંધેલી છે. તેણે તે ખોલીને વાંચી. તેમાં લખ્યું હતું : “લાખા, તારા કૂતરાએ મને વ્યાજસહિત રૂપિયા પાછા આપી દીધા છે. આથી કૂતરાને હું મુક્ત કરું છું. તેણે મારા ઘેરથી ચોરાઈ ગયેલો માલસામાન પાછો અપાવી દીધો છે. ખુશ થઈને મેં જાતે જ તેને મુક્ત કર્યો છે.”

લાખો તો સ્તબ્ધ થઈ ગયો. તે ચીસ પાડીને કહેવા લાગ્યો, “હાય, આ મેં શું કરી નાખ્યું? તે કૂતરાના શબને પોતાના ખોળામાં લઈને જોર-જોરથી રડવા લાગ્યો. પરંતુ નુકસાન થઈ ગયા પછી પસ્તાવાનો શો અર્થ?

તેણે તે વફાદાર કૂતરાની સમાધિ બનાવી, જે આજે પણ રાધનપુરના તળાવને કિનારે ઊભી છે અને તે કૂતરાની વફાદારીની કથા સંસારને સંભળાવી રહી છે.

विषय-प्रवेश

वफ़ादारी का गुण केवल मनुष्यों में ही नहीं होता, जानवरों में भी होता है। कुत्ता अपनी वफ़ादारी के लिए प्रसिद्ध है। इस पाठ में एक वफ़ादार कुत्ते की कहानी है। जो मालिक उसे प्राणों के समान प्यार करता था, उसीके हाथों उसकी मृत्यु होती है। बाद में मालिक को अपने अविवेक पर पश्चात्ताप होता है और वह उसकी समाधि बनाकर अपनी भूल का प्रायश्चित्त करता है।

शब्दार्थ (Meanings)

वफ़ादारी-स्वामिभक्ति, नमक हलाली; faithfulness बनजारा – एक घुमक्कड़ जाति; a trader moving from place to place with his merchantise loaded on oxen मिसरी- चीनी, शक्कर; sugar पड़ाव – यात्रा में कुछ समय के लिए कहीं ठहरना; a camp गिरवी – अमानत, बंधक; mortgage जबान – वचन; a promise रकम – धन; money सूद – ब्याज; interest समेत- साथ; with जमानत – जामीन; a surety, a bail चारा – उपाय; a cure, a solution, a contrivance डाका डालना – माल लूटने के लिए लुटेरों द्वारा धावा बोलना; to break into one’s house to steal मुग्ध – प्रसन्न; astonished बेवफाई -विश्वासघात; disloyalty प्रहार – आक्रमण, हमला; attack (here to beat) मुक्त- आजाद; free शव- लाश; dead body समाधि- स्मारक; a monument, a tomb

मुहावरे- अर्थ और वाक्य-प्रयोग

(1) हृदय हिला देना – हृदय को द्रवित कर देना
वाक्य : शहीदों की ये कहानियाँ हमारे हृदय हिला देती हैं।

(2) मार खा जाना – नुकसान होना
वाक्य : सूखे के कारण किसानों को बहुत मार खानी पड़ी।

(3) फूटी कौड़ी न होना – बहुत गरीब होना, पास में पैसा न होना
वाक्य : लड़का मिठाई कैसे लेता, उसके पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं थी।

GSEB Solutions Class 7 Hindi Chapter 3 कुत्ते की वफ़ादारी!

(4) कोई चारा न होना – कोई उपाय न होना, कोई रास्ता न होना
वाक्य : कर्ज लेने के सिवाय गुप्ताजी के लिए और कोई चारा नहीं था।

(5) डाका डालना – चोरी करना, लूटने के लिए हमला करना
वाक्य : कल रात चौधरीजी के घर डाकुओं ने डाका डाला।

(6) नौ-दो ग्यारह होना – भाग जाना
वाक्य : पुलिस के आने के पहले ही अपराधी नौ-दो ग्यारह हो गए।

(7) हक्का-बक्का रह जाना – चकित होना
वाक्य : लड़के की स्मरणशक्ति देखकर शिक्षक हक्का-बक्का रह गया।

(8) खुशी का पार न रहना-बहुत खुश होना
वाक्य : खोया हुआ बच्चा पाकर माँ की खुशी का पार न रहा।

(9) फूट-फूटकर रोना – बहुत अधिक रोना
वाक्य : बेटे के मरने की खबर सुनकर माँ फूट-फूटकर रोई।

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(10) आव देखा न ताव – बिना सोचे-समझे काम करना
वाक्य : सेठजी ने आव देखा न ताव और गरीब किसान पर गोली चला दी।

कहावत

अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत – नुकसान हो जाने के बाद अर्थात् समय निकल जाने पर पछतावा करने से कोई लाभ नहीं होता।

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